7 सितंबर 1776 का दिन इतिहास में बेहद खास है. इसी दिन अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध के दौरान पहली बार पनडुब्बी का इस्तेमाल किया गया था. मिशन बेहद खतरनाक था. एक छोटी-सी पनडुब्बी पानी के नीचे से ब्रिटिश नौसेना के एक बड़े युद्धपोत तक पहुंची थी. मकसद था जहाज के निचले हिस्से में टाइम बम लगाकर उसे उड़ा देना. इस पनडुब्बी का नाम 'टर्टल' था और इसे चलाने वाले शख्स का नाम एजरा ली था. हालांकि यह मिशन अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सका, लेकिन इसने समुद्री युद्ध का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया.
पनडुब्बी बनाने का विचार नया नहीं था. 17वीं सदी की शुरुआत में डच आविष्कारक कॉर्नेलियस वैन ड्रेबेल ने पानी के अंदर चलने वाली शुरुआती नाव बनाई थी. लेकिन युद्ध में इसका इस्तेमाल करीब 150 साल बाद हुआ. अमेरिकी आविष्कारक डेविड बुशनेल ने अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस दिशा में काम शुरू किया. वह येल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान पानी के नीचे विस्फोटक पहुंचाने के तरीकों पर प्रयोग कर रहे थे.
बुशनेल को लगा कि अगर विस्फोटक को पानी के रास्ते दुश्मन के जहाज तक पहुंचाया जाए, तो हमला ज्यादा प्रभावी हो सकता है. इसी सोच से उन्होंने एक छोटी पनडुब्बी तैयार की. इसका आकार करीब 8 फीट था और यह लकड़ी से बनी थी. इसका आकार ऊपर से देखने पर कुछ-कुछ कछुए जैसा लगता था. इसलिए इसका नाम 'टर्टल' रखा गया.
यह पनडुब्बी सिर्फ एक व्यक्ति के बैठने लायक थी. इसमें इंजन नहीं था. इसे पूरी तरह हाथ से चलाया जाता था. पनडुब्बी को पानी में संतुलित रखने के लिए इसमें सीसे का भार यानी लीड बैलास्ट लगाया गया था.
1775 में ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद टर्टल को अमेरिकी क्रांतिकारियों के अभियान में शामिल कर लिया गया. 7 सितंबर 1776 को एजरा ली ने इसे चलाते हुए न्यूयॉर्क हार्बर में मौजूद ब्रिटिश नौसेना के 64 तोपों वाले युद्धपोत HMS Eagle की तरफ बढ़ना शुरू किया.ली का मकसद था कि वह बिना ब्रिटिश सैनिकों की नजर में आए जहाज के नीचे पहुंचे और उसके ढांचे में एक टाइम बम लगा दे.
सोचिए, पानी के अंदर एक छोटी-सी लकड़ी की पनडुब्बी और ऊपर दुश्मन का भारी-भरकम युद्धपोत. ली धीरे-धीरे जहाज के नीचे पहुंच गए. उन्हें ऊपर डेक पर ब्रिटिश नौसैनिक दिखाई दे रहे थे, लेकिन किसी को पानी के अंदर चल रही इस अजीब मशीन की भनक तक नहीं लगी. ली ने बम को जहाज के निचले हिस्से से जोड़ने की कोशिश शुरू कर दी. लेकिन तभी मिशन में बड़ी दिक्कत आ गई.
लोहे की परत ने बिगाड़ दिया पूरा खेल
ली को टाइम बम लगाने के लिए जहाज के निचले हिस्से में छेद करना था. उन्होंने इसके लिए अपने उपकरण का इस्तेमाल किया, लेकिन उनकी ड्रिल जहाज पर लगी लोहे की परत को भेद नहीं सकी.
काफी कोशिश के बाद भी जब छेद नहीं हुआ तो ली को पीछे हटना पड़ा. बम बाद में जहाज के पास ही फट गया, लेकिन इससे न तो ब्रिटिश जहाज को कोई नुकसान हुआ और न ही अमेरिकी पनडुब्बी को. यानी इतिहास में पहली बार युद्ध में इस्तेमाल की गई पनडुब्बी अपना पहला हमला करने में सफल नहीं हो सकी. लेकिन उसने यह जरूर साबित कर दिया कि दुश्मन के जहाज तक पानी के नीचे पहुंचकर हमला करने का विचार संभव है.
अगले कुछ दिनों में भी नहीं मिली सफलता
टर्टल ने अगले हफ्ते हडसन नदी में ब्रिटिश जहाजों को निशाना बनाने की कई और कोशिशें कीं. लेकिन हर बार मिशन नाकाम रहा. दरअसल, इस पनडुब्बी को चलाना बिल्कुल आसान नहीं था. इसमें कई तरह के जटिल काम एक साथ करने पड़ते थे और ऑपरेटर को काफी अभ्यास की जरूरत थी.
डेविड बुशनेल ही ऐसे व्यक्ति थे जो टर्टल की सभी गतिविधियों को अच्छी तरह से संभाल सकते थे. लेकिन उनकी शारीरिक कमजोरी की वजह से वह किसी भी युद्ध अभियान में खुद इसे नहीं चला सके. आखिरकार फोर्ट ली की लड़ाई के दौरान टर्टल को ले जा रहा अमेरिकी स्लूप ब्रिटिश सेना के हमले में डूब गया और उसके साथ यह ऐतिहासिक पनडुब्बी भी खो गई.
पनडुब्बी का मिशन फेल हुआ, लेकिन बुशनेल नहीं रुके
टर्टल की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं, लेकिन डेविड बुशनेल ने हार नहीं मानी. अमेरिकी जनरल जॉर्ज वॉशिंगटन ने उन्हें सेना में इंजीनियर के तौर पर नियुक्त किया. इसके बाद बुशनेल ने पानी में बहने वाली बारूदी सुरंगों यानी ड्रिफ्टिंग माइंस पर काम किया.
इनसे ब्रिटिश जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा. उनकी बनाई बारूदी सुरंगों ने ब्रिटिश फ्रिगेट को नष्ट कर दिया और दूसरे ब्रिटिश जहाजों के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी. युद्ध खत्म होने के बाद बुशनेल ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम जारी रखा और बाद में वेस्ट प्वाइंट में तैनात अमेरिकी सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के कमांडर बने.
एक असफल हमला, जिसने बदल दिया समुद्री युद्ध
7 सितंबर 1776 को टर्टल का मिशन भले ही सफल नहीं हुआ था, लेकिन इतिहास में इसकी अहमियत कम नहीं हुई. यह पहली बार था जब किसी युद्ध में पनडुब्बी को दुश्मन के जहाज के खिलाफ इस्तेमाल किया गया. उस वक्त शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि लकड़ी से बनी सिर्फ 8 फीट की यह छोटी-सी मशीन आने वाले समय के समुद्री युद्ध की तस्वीर बदलने वाली तकनीक की शुरुआत बनेगी.
आज समुद्र के भीतर लंबी दूरी तक जाने वाली विशाल परमाणु पनडुब्बियों की कल्पना करना आसान है. लेकिन इस तकनीक की शुरुआती कहानी एक छोटी-सी लकड़ी की 'टर्टल' से शुरू हुई थी, जिसे एक व्यक्ति अपने हाथों से चलाकर दुश्मन के जहाज के नीचे ले गया था.
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