जब भी कोई बिल्डिंग बनती है या घर भी बनाते हैं तो इमारत में मजबूती के लिए पिलर का सहारा लिया जाता है. ये माना जाता है कि पिलर के सहारे इमारत की मजबूती को कई गुना बढ़ाया जा सकता है. लेकिन, सिर्फ पिलर बनाना ही काफी नहीं होता है, जिस तरीके से पिलर बनाए जाते हैं, वो भी काफी अहम होते हैं. ऐसे में कारीगर अलग-अलग तरीके से पिलर बनाते हैं. इन तरीकों में एक प्लास्टिक बोतल का फॉर्मूला भी होता है, जिसके जरिए मजबूत पिलर बनाया जाता है. ऐसे में प्लास्टिक की बोतल के फॉर्मूले के साथ ही जानते हैं कि कारीगर किन-किन तरीकों से मजबूत पिलर बनाने का काम करते हैं...
धीरे-धीरे बनाया जाता है पिलर
पिलर की खास बात ये है कि इसे धीरे धीरे बनाया जाता है. जैसे अगर 20 फीट का पिलर बनाना है तो उसे कई टुकड़ों में बनाया जाता है. पिलर के फ्रेम में एक साथ सीमेंट का मसाला नहीं डाला जाता है. इसके लिए कुछ फीट के लिए फ्रेम तैयार किया जाता है और फिर उसमें सीमेंट का मसाला बनाकर डाला जाता है. फिर नीचे का हिस्सा तैयार हो जाता है तो कुछ फीट का फ्रेम फिर से तैयार किया जाता है और ऊपर का पिलर बनाया जाता है. लेकिन, कोशिश की जाती है कि एक मंजिल के पिलर को एक बार मसाला भरकर तैयार किया जाए. अगर ज्यादा फेज में किया जाएगा तो इससे कोल्ड जॉइंट बनने का खतरा रहता है. इसके लिए पहले फेस में बनने के बाद दूसरे फेज के लिए सरियों को बाहर छोड़ दिया जाता है.
क्यों लगाते हैं प्लास्टिक की बोतल
जब पिलर के फ्रेम में सीमेंट का मसाला भरा जाता है तो कारीगर उसके बीच में एक प्लास्टिक की बोतल रख देते हैं और उसके आस-पास के हिस्से में सीमेंट डाल देते हैं. इसके बाद मसाला सूखने के बाद उस बोतल को निकाल लिया जाता है और फिर जो जगह खाली रह जाती है, उसमें बाद में मसाला भरा जाता है. इससे नए मसाले से पूराने मसाले की पकड़ ज्यादा मजबूत हो जाती है और ये लॉकिंग सिस्टम की तरह काम करता है और पिलर ज्यादा मजबूत हो जाता है. कई कारीगर खाली जगह में थोड़ा अलग मसाला भी डाल देते हैं, जिससे ज्यादा मजबूत पकड़ बन जाती है. इसके अलावा पिलर में हल्के स्पेस या तार आदि के लिए जगह के लिए पाइप आदि डालकर जगह छोड़ी जाती है.
पिलर में रॉड
कई कारीगर पिलर को मजबूत बनाने के लिए मसाले के साथ ही फ्रेम में लोहे की रॉड डाल देते हैं. इससे ये काफी ज्यादा मजबूत हो जाता है. इसके अलावा सरियों के साथ स्टिपर्स लगाए जाते हैं, जिससे सरिया, सीमेंट मसाले के पकड़ा काफी ज्यादा मजबूत हो जाती है. फिर वाइब्रेटर के जरिए मसाले को अच्छे से दबाया जाता है ताकि बीच में खाली जगह ना रहे. इससे हवा निकल जाती है और कंक्रीट हर जगह अच्छी तरह भर जाता है. पिलर ज्यादा घना और मजबूत बनता है.
पानी की क्योरिंग
पिलर बनने के बाद सबसे ज्यादा जरूरी है पानी. सीमेंट में जितना पानी जाता है, उतना ही वो मजबूत होता है. पिलर के मसाले में सीमेंट ज्यादा होती है और ऐसे में पानी ज्यादा डालने से मजबूती ज्यादा रहती है. इसके लिए बोरी या सीधे पानी डालकर लंबे वक्त तक सीमेंट में पानी डालना जरूरी है.
aajtak.in