अगर आपने अमेरिका की फिल्मों या वहां की तस्वीरों में घर देखे होंगे तो एक बात जरूर नोटिस की होगी. वहां बहुत से घर भारत के घरों से बिल्कुल अलग नजर आते हैं. भारत में आमतौर पर घर बनाने के लिए ईंट, सीमेंट, बालू और सरिया का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि अमेरिका में बड़ी संख्या में घर लकड़ी के फ्रेम पर बनाए जाते हैं. अमेरिकी घरों में लकड़ी का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, बल्कि इसकी एक लंबी परंपरा रही है.
अमेरिका में लकड़ी इतनी ज्यादा इस्तेमाल क्यों होती है?
इसकी सबसे बड़ी वजह लकड़ी वहां आसानी से मिल जाती है. अमेरिका में लंबे समय से जंगलों की संख्या काफी रही है. शुरुआती दौर में वहां रहने वाले लोगों के लिए लकड़ी आसानी से मिलने वाली निर्माण सामग्री थी. इसे काटना, एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और घर बनाने में इस्तेमाल करना भी ज्यादा आसान था. धीरे-धीरे लकड़ी से घर बनाने की परंपरा मजबूत होती चली गई और इसके साथ पूरा निर्माण उद्योग भी इसी तरीके के हिसाब से विकसित हो गया.
लकड़ी के घर बनाना होता है आसान और तेज
लकड़ी से घर बनाने का एक बड़ा फायदा यह है कि इसका फ्रेम काफी तेजी से तैयार किया जा सकता है. पहले लकड़ी का फ्रेम बनाया जाता है. इसके बाद दीवारों, छत और दूसरी परतों को इसी फ्रेम के ऊपर तैयार किया जाता है. लकड़ी के हिस्से हल्के होते हैं और उन्हें काटकर जरूरत के हिसाब से जोड़ा जा सकता है. इसके मुकाबले ईंट और सीमेंट से घर बनाने में ज्यादा समय और मजदूरी लग सकती है. सीमेंट के इस्तेमाल में ढलाई, सूखने और दूसरी प्रक्रियाओं के लिए भी समय चाहिए होता है. अमेरिका में लकड़ी के घरों के लिए लंबे समय से तय मानकों और निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल होता है, जिससे काम और भी आसान हो जाता है.
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लकड़ी के घरों के लोकप्रिय होने के पीछे आर्थिक कारण भी महत्वपूर्ण हैं. अमेरिका में लकड़ी और उससे जुड़े निर्माण उत्पादों की बड़ी आपूर्ति है. इसकी वजह से सामान्य घरों के लिए लकड़ी का ढांचा बनाना कई मामलों में ईंट या भारी कंक्रीट निर्माण की तुलना में कम खर्चीला पड़ सकता है. सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि मजदूरी का खर्च भी मायने रखता है. लकड़ी के फ्रेम को कम समय में तैयार किया जा सकता है. इससे निर्माण का समय कम होता है और मजदूरी और दूसरी लागतों को नियंत्रित करना आसान हो जाता है.
क्या लकड़ी के घर भूकंप में ज्यादा सुरक्षित होते हैं?
यह कहना सही नहीं होगा कि हर लकड़ी का घर भूकंप या तूफान में सुरक्षित ही रहेगा. लेकिन लकड़ी के फ्रेम की एक खासियत यह है कि वे ईंट या बिना मजबूत किए गए चिनाई वाले फ्रेम की तुलना में हल्के और लचीले होते हैं. भूकंप के दौरान यह लचीलापन कुछ परिस्थितियों में फायदा दे सकता है. अमेरिका के कई हिस्से भूकंप, तेज हवाओं, तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आते हैं. इसलिए घरों का डिजाइन स्थानीय मौसम और जोखिम को ध्यान में रखकर किया जाता है. मजबूत लकड़ी के फ्रेम, सही जोड़ और भवन निर्माण नियमों का पालन घर को अधिक मजबूती देने में मदद करते हैं.
घर के अंदर तापमान बनाए रखने में भी मदद
लकड़ी गर्मी को मेटल की तरह तेजी से आगे नहीं पहुंचाती. इसके अलावा लकड़ी के फ्रेम वाली दीवारों के बीच इन्सुलेशन की परत लगाई जाती है. इससे घर के अंदर का तापमान कंट्रोल रखने में मदद मिलती है. यही वजह है कि अमेरिकी घरों में सिर्फ लकड़ी का ढांचा ही नहीं होता. दीवारों के अंदर इन्सुलेशन और दूसरी निर्माण सामग्री भी लगाई जाती है. बाहर से देखने पर घर लकड़ी का लगता है, लेकिन उसके अंदर कई अलग-अलग परतें होती हैं.
जरूरत के हिसाब से बदलाव भी आसान
लकड़ी के फ्रेम वाले घरों में बदलाव करना भी काफी आसान हो सकता है. कमरे का आकार बदलना हो, नई दीवार बनानी हो या घर के किसी हिस्से में बदलाव करना हो तो लकड़ी के ढांचे के साथ काम करना कई मामलों में आसान रहता है. इसके अलावा अमेरिका में नए घरों का निर्माण बड़े पैमाने पर एक जैसे मानकों और आकार की लकड़ी से किया जाता है. इससे निर्माण प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित हो गई है.
क्या अमेरिका में हर घर लकड़ी का ही होता है?
ऐसा बिल्कुल नहीं है. अमेरिका में ईंट, कंक्रीट, स्टील और दूसरी निर्माण सामग्री से भी घर बनाए जाते हैं. खासकर बड़े व्यावसायिक भवनों, ऊंची इमारतों और कुछ विशेष इलाकों में कंक्रीट और स्टील का इस्तेमाल काफी होता है. लेकिन सामान्य एक या दो मंजिला घरों में लकड़ी का फ्रेम बहुत आम है. यानी अमेरिका में लकड़ी के घर सिर्फ दिखने में अलग नहीं हैं. इसके पीछे वहां की प्राकृतिक परिस्थितियां, पुरानी निर्माण परंपरा, लकड़ी की उपलब्धता, कम समय में निर्माण और लागत जैसे कई कारण हैं. यही वजह है कि भारत में जहां ईंट-सीमेंट के पक्के घर आम हैं, वहीं अमेरिका में लकड़ी के ढांचे वाले घर लंबे समय से लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.
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