एक्सपायर हो चुकी दवाइयां फार्मेसी से वापस लेकर क्या करती हैं कंपनियां?

मेडिकल स्टोर से एक्सपायर दवाइयां वापस लेकर कंपनियां क्या करती हैं? क्या इनसे फिर बनती है नई दवा, जानें पूरा प्रोसेस

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आखिर क्या होता है एक्सपायर दवाइयों का (सांकेतिक तस्वीर-Pexel) आखिर क्या होता है एक्सपायर दवाइयों का (सांकेतिक तस्वीर-Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:41 AM IST

घर में पड़ी एक्सपायर दवाइयों को तो लोग अक्सर कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर या फार्मेसी पर मौजूद उन दवाइयों का क्या होता है, जिनकी एक्सपायरी डेट निकल जाती है? क्या कंपनियां उन्हें वापस लेकर दोबारा इस्तेमाल करती हैं? क्या एक्सपायर टैबलेट या सिरप से नई दवाइयां बनाई जाती हैं? या फिर ये दवाइयां किसी और तरीके से ठिकाने लगाई जाती हैं?

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इस सवाल का जवाब सिर्फ दिलचस्प ही नहीं, बल्कि जरूरी भी है. क्योंकि एक्सपायर दवाइयों को गलत तरीके से फेंकना पर्यावरण और लोगों की सेहत, दोनों के लिए खतरा बन सकता है. भारत की दवा नियामक संस्था CDSCO ने भी एक्सपायर और इस्तेमाल न हुई दवाइयों के सुरक्षित निपटान के लिए गाइडेंस जारी की है. यह गाइडेंस 27 मई 2025 को सार्वजनिक नोटिस के तौर पर जारी की गई थी.

फार्मेसी से शुरू होता है एक्सपायर दवाइयों का सफर

जब किसी मेडिकल स्टोर में रखी दवा की एक्सपायरी डेट निकल जाती है, तो उसे बिक्री के लिए नहीं रखा जाना चाहिए. ऐसी दवाइयों को अलग रखा जाता है. CDSCO की गाइडेंस के मुताबिक, रिटेलर को एक्सपायर या इस्तेमाल न हुई दवाओं का रिकॉर्ड रखना होता है. रिटेलर के लिए यह भी कहा गया है कि वह एक्सपायरी के 30 दिनों के भीतर संबंधित स्टॉक को उस सप्लायर या निर्माता को वापस करे, जिससे उसने दवा खरीदी थी.

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यानी आम तौर पर एक्सपायर दवा का रास्ता कुछ ऐसा हो सकता है: यानी फार्मेसी या मेडिकल स्टोर  से डिस्ट्रीब्यूटर/सप्लायर और फिर कंपनी या निर्माता के पास. हालांकि सप्लाई चेन की व्यवस्था कंपनी और कारोबारी समझौते के हिसाब से अलग हो सकती है.

वापस आने के बाद कंपनियां क्या करती हैं?

कंपनी या निर्माता के पास पहुंचने के बाद एक्सपायर दवाइयों को सामान्य बिक्री वाले स्टॉक से अलग रखा जाना चाहिए. इनका रिकॉर्ड भी रखा जाता है. इसकी वजह ये है कि एक्सपायर दवा गलती से फिर से बाजार में न पहुंच जाए.

CDSCO की गाइडेंस में चेतावनी दी गई है कि एक्सपायर दवाइयों का गलत निपटान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है. अगर ऐसी दवाइयां गलत हाथों में पहुंच जाएं या दोबारा बाजार में भेज दी जाएं, तो उसका गलत इस्तेमाल हो सकता है.

क्या एक्सपायर दवाओं को पिघलाकर नई दवा बनाई जाती है?

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. एक्सपायर दवा का स्टॉक निपटान के लिए अलग किया जाता है. इसके बाद दवाओं की प्रकृति और लागू नियमों के अनुसार उनका सुरक्षित निपटान किया जाता है. CDSCO की गाइडेंस में निपटान के अलग-अलग तरीके बताए गए हैं, जिनमें नियंत्रित परिस्थितियों में नष्ट करना, कुछ मामलों में सुरक्षित लैंडफिल, इनकैप्सुलेशन या इनर्टाइजेशन जैसे तरीके शामिल हो सकते हैं.

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हर दवा को सीधे कूड़े में नहीं फेंका जा सकता

यही सबसे अहम बात है. एक्सपायर दवा को खुले कूड़े में फेंक देना हमेशा सुरक्षित तरीका नहीं है. इससे दवाइयों के रसायन मिट्टी और पानी तक पहुंच सकते हैं. निर्माण स्तर पर भी दवा कंपनियों को बेकार और अस्वीकृत दवाइयों को सुरक्षित तरीके से रखने और नष्ट करने की व्यवस्था करनी होती है. सरकार ने पहले भी कहा है कि दवा निर्माण इकाइयों से निकलने वाले ठोस, तरल और अन्य अपशिष्ट का निपटान पर्यावरण संबंधी नियमों के अनुसार होना चाहिए और कचरे के निपटान का रिकॉर्ड रखना जरूरी है.

तो क्या कंपनी खुद सारी दवाइयां नष्ट करती है?

जरूरी नहीं कि हर स्थिति में कंपनी खुद ही दवाइयों को नष्ट करे. निपटान का तरीका दवा के प्रकार और संबंधित नियमों पर निर्भर करता है. गाइडेंस का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एक्सपायर या बेकार दवाइयां सुरक्षित तरीके से सप्लाई चेन से बाहर हों और उनका निपटान कानून व पर्यावरण संबंधी नियमों के मुताबिक किया जाए. एक्सपायर दवाइयों को सामान्य कचरे की तरह नहीं देखा जाता. इनके लिए अलग रिकॉर्ड, अलग स्टोरेज और सुरक्षित निपटान की जरूरत होती है.

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आखिर में क्या होता है?

आसान में समझें तो मेडिकल स्टोर से वापस आई एक्सपायर दवा का सफर आम तौर पर बिक्री से हटने के साथ शुरू होता है. उसे रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है, सप्लायर या निर्माता तक वापस भेजा जाता है और फिर लागू नियमों के अनुसार सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाता है.

यानी एक्सपायर दवाइयां वापस लेकर कंपनियां उन्हें फिर से नई दवा बनाकर बेचने के लिए इस्तेमाल नहीं करतीं. उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि ये दवाइयां दोबारा बाजार में न पहुंचें और सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दी जाएं.

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