भारत ब्रिक्स सम्मेलन 2026 की मेजबानी कर रहा है. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी आने वाले हैं. उनके आने से पहले तीन रूसी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट गुरुवार को ही नोएड इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं. उनकी सिक्योरिटी को लेकर एक एडवांस टीम पहले से दिल्ली पहुंचकर अपने राष्ट्रपति की सुरक्षा की हर एक तैयारी की अपने स्तर से जांच- परख कर रही है. ऐसे में जानते हैं कि पुतिन की एडवांस सिक्योरिटी टीम कैसी होती है और इनका क्या काम होता है.
पुतिन का सुरक्षा घेरा कई लेयर का होता है. पुतिन जहां भी जाते हैं. इनके सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर काफी बातें चर्चा शुरू हो जाती है. इनमें उच्च तकनीक के हथियारों से लैस बॉडीगार्ड, बुलेटप्रूफ ब्रीफकेस और भोजन चखने वाले लोगों की चर्चा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता. पुतिन का सिक्योरिटी सिस्टम जो आज हम देखते हैं वो एक दिन में तैयार नहीं हुआ है. दशकों तक रूस ने सुरक्षा प्रणाली को अपडेट किया है.
ऐसे शुरू हुआ नया सुरक्षा मॉडल
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन के रूस की सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के दौर में यानी 1998-1999 के दौरान राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव शुरू हुए. रूस की बेहद गोपनीय सुरक्षा एजेंसी और प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस यानी SBP/FSO ने सुरक्षा व्यवस्था को नए तरीके से तैयार करना शुरू किया. इस दौर में राष्ट्रपति की गतिविधियों, आने-जाने, संपर्क और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को बेहद गोपनीय रखने पर जोर बढ़ा.
पुतिन के सार्वजनिक कार्यक्रमों में अचानक होने वाली मुलाकातें और बिना प्लान के लोगों के बीच जाने का सिलसिला भी काफी सीमित हुआ. धीरे-धीरे ऐसी सुरक्षा व्यवस्था तैयार होने लगी, जिसमें राष्ट्रपति के आसपास होने वाली लगभग हर गतिविधि को पहले से नियंत्रित किया जा सके.
पुतिन जहां जाते हैं, सुरक्षा का पूरा सिस्टम साथ जाता है
पुतिन की सुरक्षा को समझें तो तस्वीर सिर्फ बंदूकधारी कमांडो या बख्तरबंद कार तक सीमित नहीं है. इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम करता है. एडवांस सिक्योरिटी टीम, सुरक्षा अधिकारी, मेडिकल विशेषज्ञ, खाना जांचने वाली टीम, शेफ, सुरक्षित वाहन, विमान और संचार व्यवस्था.
यानी पुतिन किसी दूसरे देश में जाते हैं तो वहां पहुंचकर सुरक्षा शुरू नहीं होती. उनकी यात्रा की तैयारी उससे काफी पहले शुरू हो जाती है. कार्यक्रम स्थल से लेकर होटल के कमरे तक और खाने की प्लेट से लेकर इस्तेमाल की गई चीजों तक, सुरक्षा टीम हर स्तर पर जोखिम कम करने की कोशिश करती है.
विदेशी जाने से पहले उनकी एडवांस सिक्योरिटी टीम उस देश में पहले पहुंच जाती है. वहां कमरे, रास्ते, खाने की जगह और दूसरी जरूरी चीजों की जांच की जाती थी. यानी पुतिन जहां पहुंचते हैं, वहां उनकी सुरक्षा टीम भी पहले से अपना पूरा इंतजाम और सिक्योरिटी नेटवर्क खड़ा कर देती है.
खाने की जांच के लिए होती है मोबाइल लैब
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में एक और खास चीज तैनात रहती है. ये है उनका अपना मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब. पुतिन की टीम में स्पेशल शेफ, फूड टेस्टिंग से जुड़े लोग और तकनीकी एक्सपर्ट होते हैं. इनका काम होता कि राष्ट्रपति को दिया जाने वाला खाना, पानी और ड्रिंक्स पूरी तरह से सुरक्षित हो.यही वजह है कि किसी भी देश में आयोजित डिनर या लंच में भी पुतिन तक वही खाना पहुंचता है जो उनकी टीम ने मंजूरी दी हो.
2011-2014 के दौर में पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में जैविक सुरक्षा यानी बायोलॉजिकल सिक्योरिटी को लेकर भी ज्यादा सतर्कता की रिपोर्टें सामने आईं. कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, पुतिन के इस्तेमाल में आने वाली चीजों को लेकर भी खास सावधानी बरती जाने लगी. गिलास, टिश्यू, तौलिया और दूसरी इस्तेमाल की गई चीजों को लेकर सुरक्षा टीम सतर्क रहती थी.
मकसद सिर्फ किसी खतरे से बचना नहीं था. रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि उनकी टीम इस बात को लेकर सावधान रहती थी कि राष्ट्रपति के इस्तेमाल की कोई जैविक सामग्री दूसरे लोगों के हाथ न लगे. यानी सुरक्षा का दायरा अब सिर्फ पुतिन के शरीर की सुरक्षा से आगे बढ़कर उनके पीछे छूटने वाली चीजों तक पहुंच चुका था.
होटल भी किया जाता है सिक्योर
विदेश में पुतिन के ठहरने के लिए होटल का जो कमरा तय होता है.एडवांस टीम वहां पहले पहुंच जाती है. फिर होटल और कार्यक्रम स्थल की जांच करती है.कमरे में इस्तेमाल होने वाली हर चीज की गहराई से जांच की जाती है और वहां आने- जाने वाले हर एक स्टाफ पर नजर रखी जाती है.
2018 से 2021 के बीच पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था के कई हिस्से सार्वजनिक चर्चा में आए. उनके विदेशी दौरों में खास सुरक्षा वाहन दिखाई देने लगे. रूस के राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल होने वाले विमानों में मेडिकल सुविधाओं और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था की खबरें भी सामने आईं.
राष्ट्रपति के काफिले में इस्तेमाल होने वाली कारों को भी बेहद सुरक्षित बनाया गया. इनमें मजबूत बॉडी, विशेष सुरक्षा फीचर्स और आपात स्थिति में काम आने वाली सुविधाओं की चर्चा होती रही है. BRICS और G20 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भी पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी. यहां तक कि उनका खाना जांचने वाली मोबाइल टीम भी उनके दौरे का हिस्सा बनती रही.
पुतिन का विमान भी होता है खास
पुतिन जब भी कहीं जाते हैं तो सबसे ज्यादा ध्यान उनके विमान और काफिले पर जाता है. विदेश यात्रा के दौरान बड़े रूसी विमान पहले से पहुंच जाते हैं. इनमें राष्ट्रपति के सफर से जुड़ी जरूरी चीजों के अलावा सुरक्षा और मेडिकल जरूरतों का सामान भी शामिल होते हैं. विमान में मेडिकल सुविधाओं से लैस मिनी-क्लिनिक जैसी व्यवस्था होती है. इसका मतलब यह है कि राष्ट्रपति को किसी विदेशी देश में भी जरूरी मेडिकल सुविधा के लिए पूरी तरह स्थानीय व्यवस्था पर निर्भर न रहना पड़े.
यूक्रेन युद्ध के बाद सुरक्षा और कड़ी
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की सुरक्षा को लेकर प्राइवेसी और बढ़ गई. विदेश यात्राएं सीमित हुईं और जहां भी पुतिन जाते, वहां सुरक्षा के कई स्तर बनाए जाने की रिपोर्टें सामने आईं.
उनके कार्यक्रम वाले इलाकों में आम लोगों की आवाजाही और गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है. बैठक वाले स्थानों को पहले से सुरक्षित किया जाता है और राष्ट्रपति के आसपास पहुंचने वाले लोगों की जांच की जाती है. इसी दौर में पुतिन के बॉडी डबल्स यानी हमशक्ल इस्तेमाल किए जाने के दावे भी चर्चा में आए. हालांकि रूस की ओर से ऐसे दावों को लगातार खारिज किया गया है.
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इसीलिए जब पुतिन किसी देश की यात्रा पर पहुंचते हैं और उससे पहले ही बड़े-बड़े रूसी विमान दिखाई देने लगते हैं, तो उसके पीछे सिर्फ वीआईपी यात्रा की तैयारी नहीं होती. उसके पीछे राष्ट्रपति के साथ चलने वाला एक पूरा चलता-फिरता सिक्योरिटी सिस्टम होता है.
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