रेलवे का 5 मिनट वाला नियम क्या है? हर किसी को जानना है जरूरी

अगर आपको अचानक ट्रेन से सफर करना पड़ जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है. भारतीय रेलवे के सेकंड रिजर्वेशन चार्ट नियम के तहत ट्रेन रवाना होने से पहले तक सीट उपलब्ध होने पर टिकट बुक या कैंसिल की जा सकती है. जानिए यह सुविधा कैसे काम करती है और यात्रियों को इससे क्या फायदा मिलता है.

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अगर चार्ट बनने से पहले सीट उपलब्ध है तो टिकट तुरंत कंफर्म मिल सकती है. ( Photo: ITG) अगर चार्ट बनने से पहले सीट उपलब्ध है तो टिकट तुरंत कंफर्म मिल सकती है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:25 AM IST

अगर कभी ऐसा हो कि आपको अचानक कहीं जाना पड़ जाए और ट्रेन छूटने में सिर्फ कुछ मिनट ही बचे हों, तो घबराने की जरूरत नहीं है. भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए ऐसा नियम बनाया था, जिसके तहत ट्रेन रवाना होने से कुछ मिनट पहले तक भी टिकट बुक या कैंसिल की जा सकती थी. यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद थी, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है या जिनका प्लान आखिरी समय में बदल जाता है.

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आखिर क्या था यह नियम?
पहले रेलवे का रिजर्वेशन चार्ट ट्रेन चलने से काफी पहले बन जाता था. चार्ट बनने के बाद ऑनलाइन टिकट बुक करना संभव नहीं होता था. लेकिन बाद में रेलवे ने सेकंड रिजर्वेशन चार्ट शुरू किया. इस व्यवस्था में पहला चार्ट ट्रेन रवाना होने से लगभग 4 घंटे पहले तैयार होता था, जबकि दूसरा चार्ट ट्रेन के चलने से 30 मिनट से लेकर 5 मिनट पहले तक तैयार किया जाता था. जब तक दूसरा चार्ट तैयार नहीं हो जाता, तब तक यात्री टिकट बुक या कैंसिल कर सकते थे.

इससे यात्रियों को क्या फायदा हुआ?
मान लीजिए किसी यात्री ने अपनी टिकट कैंसिल कर दी. पहले ऐसी सीटें खाली रह जाती थीं, लेकिन अब दूसरे चार्ट की वजह से वही सीट किसी दूसरे जरूरतमंद यात्री को मिल सकती थी. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिला जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है. अगर किसी सीट पर आखिरी समय में कैंसिलेशन होता है, तो दूसरे चार्ट से पहले तक वह सीट दूसरे यात्री को मिल सकती थी.

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टिकट कैसे बुक की जा सकती थी?
यात्री दो तरीकों से टिकट बुक कर सकते थे. पहला आईआरसीटीसी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए और रेलवे के PRS (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम ) काउंटर से. अगर दूसरे चार्ट बनने से पहले सीट उपलब्ध होती, तो टिकट तुरंत कन्फर्म मिल सकती थी. अगर किसी कारण से यात्रा का प्लान बदल जाए, तो दूसरा चार्ट बनने से पहले टिकट कैंसिल करने की सुविधा भी उपलब्ध थी. इससे सीट किसी दूसरे यात्री को मिल जाती थी और ट्रेन में खाली सीटों की संख्या कम होती थी.

यह पूरी तरह सीट की उपलब्धता पर निर्भर करता था. अगर किसी यात्री ने टिकट कैंसिल की हो या कोई सीट खाली हो, तभी आपको कन्फर्म टिकट मिल सकती थी. अगर सभी सीटें पहले से भरी हों, तो टिकट मिलना संभव नहीं होता.

रेलवे ने यह सुविधा क्यों शुरू की?
इस नियम का मकसद था कि ट्रेन में खाली सीटें कम रहें और ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को यात्रा करने का मौका मिले. पहले कई बार लोग आखिरी समय में टिकट कैंसिल कर देते थे, लेकिन चार्ट बन जाने के कारण वह सीट किसी दूसरे यात्री को नहीं मिल पाती थी. दूसरे चार्ट की व्यवस्था से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया गया.

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यात्रियों के लिए क्या सीख है?
अगर आपको अचानक ट्रेन से यात्रा करनी पड़ जाए, तो ट्रेन छूटने से पहले एक बार आईआरसीटीसी ऐप या वेबसाइट पर जरूर सीट चेक करें. कई बार आखिरी समय में किसी यात्री के टिकट कैंसिल करने पर सीट खाली हो जाती है और आपको कन्फर्म टिकट मिल सकती है.

हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि रेलवे समय-समय पर टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के नियमों में बदलाव करता रहता है. इसलिए यात्रा से पहले आईआरसीटीसी या भारतीय रेलवे के नए नियम जरूर देख लें. हाल के वर्षों में टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े कुछ नियम बदले भी गए हैं. कुल मिलाकर, आखिरी समय तक टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन की यह व्यवस्था यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित हुई. इससे अचानक यात्रा करने वाले लोगों को राहत मिली और रेलवे की खाली सीटों का बेहतर उपयोग भी संभव हो सका.

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