जब थॉमस एडिसन ने पहले मूवी कैमरे का पेटेंट कराया, इसका नाम था काइनेटोग्राफ

आज का दिन सिनेमा के इतिहास में खास है. इसी दिन थॉमस एडिसन ने काइनेटोग्राफ के पेटेंट के जरिए चलती तस्वीरों की तकनीक को एक नई पहचान दी थी.

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काइनेटोग्राफ के पेटेंट के साथ ही शुरू हो गई थी मोशन पिक्चर्स की कहानी (Photo - Pexels) काइनेटोग्राफ के पेटेंट के साथ ही शुरू हो गई थी मोशन पिक्चर्स की कहानी (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:06 AM IST

31 अगस्त 1897 को आज से 129 साल पहले अमेरिकी आविष्कारक थॉमस एडिसन ने अपने मूवी कैमरे काइनेटोग्राफ का पेटेंट हासिल किया था. यह वह दौर था, जब तस्वीरों को चलती हुई तस्वीरों यानी फिल्म के रूप में देखने का प्रयोग अभी शुरुआती दौर में था. एडिसन के इस आविष्कार ने आगे चलकर सिनेमा की दुनिया को आकार देने में अहम भूमिका निभाई.

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एडिसन ने 1890 के दशक की शुरुआत में चलती तस्वीरें रिकॉर्ड करने वाले कैमरे और उन्हें देखने वाली मशीन पर काम शुरू किया था. उन्होंने कई बार इसके प्रदर्शन भी किए. काइनेटोग्राफ के पीछे फोटोग्राफी के उन सिद्धांतों का इस्तेमाल हुआ, जिन्हें फ्रांस के शुरुआती फोटोग्राफरों जोसेफ निसेफोर निएप्स और लुई डागेयर ने विकसित किया था.

एडिसन की कोशिश थी कि तस्वीरों को इस तरह रिकॉर्ड किया जाए कि उन्हें बाद में लगातार चलाकर देखा जा सके. यही विचार आगे चलकर फिल्मों की बुनियाद बना. फरवरी 1893 में एडिसन ने एक छोटा-सा फिल्म स्टूडियो बनवाया. इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि इसे घुमाकर सूरज की रोशनी की सही दिशा में रखा जा सके.

उस समय फिल्म बनाने के लिए प्राकृतिक रोशनी बेहद जरूरी थी, इसलिए स्टूडियो को सूरज की रोशनी के हिसाब से घुमाया जा सकता था.  मई 1893 में एडिसन ने अपनी फिल्मों का पहला प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में उनके तीन कर्मचारी लोहार बनने की एक्टिंग करते हुए नजर आए थे.

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यानी आज जिस फिल्म इंडस्ट्री में बड़े-बड़े सेट, कैमरे और लाइटिंग दिखाई देती है, उसके शुरुआती प्रयोग काफी साधारण तरीके से हुए थे.  एडिसन के प्रयोगों ने दूसरे आविष्कारकों को भी प्रेरित किया. फ्रांस के लुई और ऑगस्ट लुमिएर ने बाद में एक ऐसी मशीन विकसित की, जो फिल्म रिकॉर्ड करने के साथ उसे बड़े पर्दे पर दर्शकों के सामने दिखा सकती थी. इस मशीन का नाम सिनेमाटोग्राफ रखा गया.

यहीं से फिल्मों को अकेले किसी मशीन के जरिए देखने के बजाय बड़े समूह के सामने प्रदर्शित करने का रास्ता खुला. सिनेमा के इतिहास में यह एक बड़ा बदलाव था.

एडिसन ने पेटेंट को लेकर किया मुकदमा
काइनेटोग्राफ के पेटेंट को लेकर एडिसन की कंपनी और दूसरी फिल्म कंपनियों के बीच विवाद भी हुआ.
1898 में एडिसन ने अमेरिकन म्यूटोस्कोप एंड बायोग्राफ पिक्चर्स पर मुकदमा किया. उनका आरोप था कि कंपनी ने काइनेटोग्राफ से जुड़े उनके पेटेंट का उल्लंघन किया है.

काइनेटोग्राफ के विकास में एडिसन के सहायक डब्ल्यू.एल.के. डिक्सन की भी अहम भूमिका थी. डिक्सन 1895 में एडिसन की कंपनी छोड़ चुके थे और बाद में बायोग्राफ की स्थापना में मदद की. लेकिन यह कानूनी लड़ाई एडिसन के पक्ष में पूरी तरह नहीं गई.1902 में अमेरिका की कोर्ट ऑफ अपील्स ने फैसला सुनाया कि एडिसन ने काइनेटोग्राफ का पेटेंट जरूर कराया था, लेकिन उनके अधिकार पूरे मूवी कैमरे के कॉन्सेप्ट पर नहीं थे.

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अदालत के मुताबिक, उनका पेटेंट मुख्य रूप से उस स्प्रोकेट सिस्टम से जुड़ा था, जो छेद वाली फिल्म को कैमरे के अंदर आगे बढ़ाता था. यानी एडिसन को फिल्म कैमरे के पूरे विचार पर एकाधिकार नहीं मिला.

1909 में एडिसन और बायोग्राफ समेत कई फिल्म निर्माताओं ने मिलकर मोशन पिक्चर्स पेटेंट कंपनी बनाई. इसका मकसद फिल्म तकनीक से जुड़े पेटेंट की सुरक्षा करना और दूसरे खिलाड़ियों के लिए फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश मुश्किल बनाना था.

हालांकि, यह व्यवस्था ज्यादा समय तक नहीं चल सकी. 1917 में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने इस ट्रस्ट को भंग कर दिया. उसी साल एडिसन की कंपनी ने भी फिल्म इंडस्ट्री से अपना कारोबार समेट लिया. आज फिल्में कैमरा, डिजिटल तकनीक, स्पेशल इफेक्ट्स और बड़े पर्दे के जरिए दुनिया भर में देखी जाती हैं. लेकिन 31 अगस्त 1897 को पेटेंट हासिल करने वाला काइनेटोग्राफ उस दौर की एक अहम तकनीकी कोशिश थी.

एडिसन का यह कैमरा अकेले सिनेमा का आविष्कार नहीं था, लेकिन चलती तस्वीरों को रिकॉर्ड करने और उन्हें फिल्म के रूप में विकसित करने की शुरुआती दौड़ में इसका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा.

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