रात में पंखा चलाया तो हो सकती है मौत! इस देश की मान्यता कर देगी हैरान

दक्षिण कोरिया में लंबे समय तक एक अजीब मान्यता प्रचलित रही कि बंद कमरे में रातभर पंखा चलाकर सोने से इंसान की मौत हो सकती है. इस धारणा को ‘Fan Death’ कहा जाता है. जानिए आखिर इस अजीब डर की शुरुआत कैसे हुई और क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक सच्चाई है.

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दक्षिण कोरिया के कई घरों में दशकों तक इतना गहरा रहा कि लोग सोने से पहले पंखा बंद कर देते थे. ( Photo: ITG) दक्षिण कोरिया के कई घरों में दशकों तक इतना गहरा रहा कि लोग सोने से पहले पंखा बंद कर देते थे. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST

गर्मी की रात हो और कमरे में पंखा न चले, ऐसा सोचकर ही बेचैनी होने लगती है. भारत में तो ज्यादातर लोग बिना पंखे के सोने की कल्पना भी नहीं कर सकते. लेकिन दुनिया में एक ऐसा देश भी है, जहां लंबे समय तक रात में पंखा चलाकर सोने को लेकर लोगों के मन में डर बैठा रहा है. यह देश है दक्षिण कोरिया. यहां एक पुरानी मान्यता को 'Fan Death' यानी पंखे से मौत के नाम से जाना जाता है. इस धारणा के मुताबिक, बंद कमरे में रातभर पंखा चलाकर सोने से व्यक्ति की मौत तक हो सकती है. सुनने में यह बात भले ही अजीब लगे, लेकिन यह डर दक्षिण कोरिया के कई घरों में दशकों तक इतना गहरा रहा कि लोग सोने से पहले पंखा बंद कर देते थे. 

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आखिर पंखे से मौत कैसे हो सकती है?
अब सवाल उठता है कि आखिर लोगों को ऐसा क्यों लगता था कि पंखा चलाने से मौत हो सकती है? इस मान्यता को लेकर अलग-अलग तरह की बातें कही जाती रही हैं. एक धारणा यह थी कि अगर कोई व्यक्ति बंद कमरे में पंखा चलाकर सोता है तो पंखा कमरे का तापमान इतना कम कर सकता है कि शरीर हाइपोथर्मिया की स्थिति में पहुंच जाए. कुछ लोगों का यह भी मानना था कि बंद कमरे में लगातार पंखा चलने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है और व्यक्ति का दम घुट सकता है. हालांकि, ये बातें वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हैं. यानी सिर्फ पंखा चलाकर सोने से किसी स्वस्थ व्यक्ति की मौत हो जाती है, ऐसा मानने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

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दक्षिण कोरिया में पंखों में लगाए जाते थे टाइमर
इस मान्यता की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दक्षिण कोरिया में बिकने वाले बहुत से पंखों में टाइमर की सुविधा दी जाती रही है. लोग रात में सोने से पहले पंखे का टाइमर लगा देते थे, जिससे कुछ समय बाद पंखा अपने आप बंद हो जाए. यानी जिस चीज को दुनिया के ज्यादातर लोग गर्मी से राहत पाने का साधन समझते हैं, वही चीज दक्षिण कोरिया की इस पुरानी मान्यता में डर का कारण बन गई थी.

दक्षिण कोरिया आज दुनिया के सबसे आधुनिक और तकनीकी रूप से विकसित देशों में गिना जाता है. ऐसे में सवाल स्वाभाविक है कि वहां के लोगों में इस तरह की मान्यता इतनी लंबे समय तक कैसे बनी रही? इस मान्यता की जड़ें कई दशक पुरानी बताई जाती हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में 'Fan Death' से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट्स 1970 के दशक में सामने आई थीं. उस समय देश ऊर्जा संकट और बढ़ती बिजली की कीमतों जैसी समस्याओं से जूझ रहा था. धीरे-धीरे यह बात लोगों के बीच फैलने लगी कि रात में पंखा चलाकर सोना जानलेवा हो सकता है..

कुछ लोगों ने तो यह तक मानना शुरू कर दिया कि पंखा कमरे की हवा में ऐसा बदलाव कर देता है जिससे इंसान की सांस रुक सकती है. कुछ धारणाओं में यह भी कहा गया कि लगातार ठंडी हवा लगने से शरीर का तापमान खतरनाक रूप से कम हो सकता है. इसी दौरान मीडिया में पंखे से जुड़ी मौतों की खबरें सामने आने लगीं. माना जाता है कि ऐसी खबरों और सरकारी स्तर पर बिजली बचाने के प्रयासों ने इस डर को और मजबूत करने में भूमिका निभाई.

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क्या सरकार ने जानबूझकर लोगों में डर फैलाया?
यह दावा सीधे तौर पर साबित नहीं है कि सरकार ने 'Fan Death' की कहानी बनाई थी. लेकिन रिपोर्ट में यह जरूर बताया गया है कि 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के दौरान सरकारी प्रचार और मीडिया रिपोर्टिंग ने इस डर को बढ़ाने में भूमिका निभाई हो सकती है. उस दौर में बिजली बचाना बड़ी जरूरत थी. ऐसे में रातभर पंखा चलाने की आदत को कम करने के लिए इससे जुड़े डर और खबरें लोगों की सोच को प्रभावित कर सकती थीं.

यही वजह है कि समय के साथ फैन डेथ की धारणा लोगों के बीच इतनी मशहूर हो गई कि यह दक्षिण कोरिया की सबसे चर्चित आधुनिक लोक मान्यताओं में शामिल हो गई.

आज के युवा इस मान्यता पर सवाल उठाते हैं
समय बदलने के साथ दक्षिण कोरिया में इस धारणा को मानने वाले लोगों की संख्या में भी बदलाव आया है. बेहतर वैज्ञानिक जानकारी और इंटरनेट के दौर में युवा पीढ़ी इस तरह के डर पर सवाल उठाने लगी है. लोग अब यह समझने लगे हैं कि पंखा अपने आप किसी इंसान की जान नहीं लेता. यानी जिस बात को कभी कई परिवार गंभीरता से लेते थे, आज उसी पर नई पीढ़ी सवाल कर रही है. 

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