बड़े शहरों में आजकल ऑनलाइन कैब और बाइक, ट्रांसपोर्टेशन और लोकल कम्युनिकेशन का एक आसान ऑप्शन बन गया है. रैपिडो, उबर जैसे ऐप से हम कभी भी और कहीं भी कैब या राइड बुक कर सकते हैं. बस कुछ ही मिनट में हमारा राइडर या ड्राइवर लोकेशन पर पहुंच जाता है. इससे जितनी हमारी जिंदगी आसान हुई है. उतनी ही हजारों ऐसे ड्राइवर और राइडर्स को भी रोजगार का एक आसान विकल्प मिला है.
अच्छी जिंदगी और रोजगार के लिए दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम आने वाले हजारों लोगों को यहां अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती है. ऐसे में इनमें से कई लोग गिग वर्कर्स यानी बाइक राइडर्स, ऑनलाइन डिलिवरी एजेंट्स और कैब ड्राइवर्स बनने का ऑप्शन चुन लेते हैं. इस काम में कमाई भी है और यह काफी फ्लेक्सिबल जॉब होता है. यानी आप इस काम को अपने समय के हिसाब से कर सकते हैं.
हर दिन रैपिडो राइड बुककर ऑफिस से आते जाते इन राइडर्स से बातचीत हो जाती है. ऐसे में इनके बारे जानने का मौका मिल जाता है. इनमें से कुछ राइडर्स ने खुलकर अपने काम और कमाई के बारे में बताया. इस बातचीत से पता चला कि उनका काम आसान तो नहीं है, लेकिन जहां नौकरी की गारंटी नहीं है. ऐसे माहौल में बाइक चलाकर पैसा कमाना बुरा ऑप्शन भी नहीं है.
कमाई का बुरा ऑप्शन नहीं है राइडर बनना
रजनीश नाम के एक राइडर की बाइक पर बैठते ही वह अपने ऐप के नेटवर्क से जुड़ी परेशानी बताने लगा. इसी बीच मैंने पूछ लिया कि क्या आप फुल टाइम यही काम करते हैं. उसका जवाब था - हां. फिर उसने बताया कि यहां डेटा इंट्री की नौकरी के लिए नोएडा आया था. 15000 रुपये महीने पर बात हुई थी. यहां आने के बाद अंतिम समय में नौकरी नहीं मिली. दूसरी नौकरी के लिए काफी कोशिश की. पैसे खत्म हो रहे थे. फिर किसी ने पार्ट टाइम राइडर का काम करने की सलाह दी.
रजनीश ने बताया वह सुबह 4 घंटे और शाम में 4 घंटे रैपिडो चलाता है. वह यहां बिहार से आया था. इसलिए उसके पास बाइक नहीं थी. वह किराए पर इलेक्ट्रिक बाइक लेकर रैपिडो राइडर का काम करता है. 2 किलोमीटर के दायरे में जो भी किराया आता है. उसका 8 से 10 प्रतिशत कंपनी रख लेती है. बाकी मेरा होता है. इस तरह हर दिन 8 घंटे में 1000 से 1200 रुपये की कमाई हो जाती है. अगर हर दिन 300 रुपये बाइक का किराया ना दूं तो कमाई 1300 से 1500 हो सकती है.
इसी तरह एक दिन सुबह- सुबह राकेश नाम के राइडर से बातचीत शुरू हुई. बाइक पर चलते- चलते उसने पूछा - सर, आपकी कंपनी में कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं मिल सकता. मैं पढ़ाई करता हूं और अपने खर्चे के लिए बाइक राइड करता हूं. लेकिन, इस काम से इतना थक जाता हूं कि रूम पर जाकर पढ़ाई नहीं हो पाती.
पार्ट टाइम बाइक चलाने से भी निकल जाता है खर्चा
फिर मैंने उससे उसके काम, कमाई, पढ़ाई और आराम के हिसाब किताब के बारे में पूछा. उसने कहा - सर मैं सुबह 6 से 8 बजे तक बाइक चलाता हूं और फिर देर रात को 3 घंटे राइडिंग का काम करता हूं. इसी बीच मैं अपनी पढ़ाई करता हूं और आराम भी करता हूं. उसने बताया - सुबह ज्यादा कोई काम नहीं होता इसलिए 2 घंटे राइडिंग कर लेता हूं. एक घंटे में 3-4 राइड मिल जाती है. बाइक अपनी है,फिर भी तेल का पैसा लगता है. सुबह के दो घंटे में तेल और कंपनी का परसेंटेज का खर्च निकालकर भी 300 रुपये आराम से आ जाते हैं.
राकेश के मुताबिक, वहीं रात 10 - 11 बजे से राइडिंग करने में कमाई थोड़ी ज्यादा होती है. क्योंकि, रात में किराया ज्यादा मिलता है और परसेंटेज कम हो जाता है. इस तरह रात में 3 घंटे बाइक चलाकर भी 600 रुपये आराम से पॉकेट में आ जाते हैं. दिन हो या रात एक घंटे में अगर छोटी- छोटी 4 राइड भी मिल जाए तो सब कुछ काटकर 150 रुपये पॉकेट में आ ही जाते हैं.
बाइक चलाकर दूसरों को उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाने वाले इन राइडर्स का काम थोड़ा कठिन तो जरूर है. लेकिन, जहां अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल हो रहा है. वैसे हालात में ऐसे काम कमाई का अच्छा जरिया हैं. इस काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आप अपनी मर्जी के मालिक होते हैं. कब काम करना है और कब काम नहीं करना है. कितनी देर काम करना है और कितनी देर ऑफ लाइन रहना है. सारे फैसले आप लेते हैं.
सिद्धार्थ भदौरिया