घर में रहना पसंद है? साइकोलॉजी बताती है इसके पीछे छिपी है खास वजह

रिसर्च के मुताबिक, घर में रहना पसंद करने की वजह सिर्फ इंट्रोवर्ट होना नहीं है. 2024 में प्रकाशित एक स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों को अपने घर में मेंटल पीस, इमोशनस सपोर्ट, परिवार का साथ और प्राइवेट स्पेस मिलता है, उनका अपने घर से गहरा लगाव बन जाता है.

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रिसर्चर का कहना है कि जो लोग घर में रहना पसंद करते हैं, जरूरी नहीं कि वे शर्मीले हों या समाज से दूर रहना चाहते हों. ( Photo: AI) रिसर्चर का कहना है कि जो लोग घर में रहना पसंद करते हैं, जरूरी नहीं कि वे शर्मीले हों या समाज से दूर रहना चाहते हों. ( Photo: AI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:00 PM IST

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर वीकेंड बाहर घूमने का मन करता है. दोस्तों के साथ समय बिताना, नई जगहें देखना और हर दिन कुछ नया करना उन्हें पसंद होता है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके लिए सबसे अच्छी जगह उनका अपना घर होता है. ऑफिस या कॉलेज से लौटते ही जैसे ही वे अपने घर का दरवाजा खोलते हैं, उन्हें सुकून मिलने लगता है. अपने कमरे में बैठकर किताब पढ़ना, परिवार के साथ बातें करना, चाय पीना या बस शांति से कुछ देर अकेले बैठना उन्हें सबसे ज्यादा खुशी देता है. अक्सर ऐसे लोगों को देखकर कहा जाता है कि वे इंट्रोवर्ट हैं या लोगों से मिलना-जुलना पसंद नहीं करते. लेकिन अब एक नई साइकोलॉजी स्टडी ने बताया है कि घर में रहना पसंद करने का कारण सिर्फ व्यक्ति का स्वभाव नहीं होता, बल्कि घर से जुड़ी भावनाएं भी होती हैं.

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साल 2024 में Journal of Environmental Psychology में प्रकाशित एक रिसर्च में पाया गया कि लोगों का अपने घर से लगाव इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि उन्हें वहां कैसा महसूस होता है. अगर घर उन्हें सुकून, सुरक्षा और मानसिक शांति देता है, तो वे स्वाभाविक रूप से घर में रहना पसंद करने लगते हैं. इस रिसर्च में 650 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया. रिसर्चर ने उनसे पूछा कि उनके लिए घर का क्या मतलब है और वहां उन्हें कैसा महसूस होता है. हैरान करने वाली बात यह रही कि लगभग 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनका घर वह जगह है, जहां वे दिनभर की थकान, तनाव और मानसिक दबाव से बाहर निकल पाते हैं उनके लिए घर ऐसी जगह है जहां वे खुद को फिर से तरोताजा महसूस करते हैं.

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ऐसे मिलती है असली खुशी
यानी घर केवल रहने की जगह नहीं है, बल्कि वह जगह है जहां इंसान अपने टूटे हुए मन को संभालता है, खुद को शांत करता है और फिर से एनर्जी जुटाता है. रिसर्च में यह भी सामने आया कि घर का बड़ा होना या महंगा होना सबसे जरूरी बात नहीं है. सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि उस घर में रहने वाला व्यक्ति वहां कैसा महसूस करता है. अगर घर में प्यार, अपनापन, सम्मान और समझ हो, तो छोटा-सा घर भी किसी महल से कम नहीं लगता. वहीं अगर बड़ा और खूबसूरत घर भी तनाव, झगड़ों और अकेलेपन से भरा हो, तो वहां रहने का मन नहीं करता. यही वजह है कि कई लोग अपने साधारण से घर में भी बेहद खुश रहते हैं, क्योंकि वहां उन्हें इमोशनल सेक्युरिटी मिलती है.

रिसर्च के अनुसार, जिन लोगों को घर में परिवार का साथ, अच्छे रिश्ते और अपनी पर्सनल स्पेस मिलती है, उनका अपने घर से लगाव और भी ज्यादा मजबूत होता है. हर इंसान चाहता है कि उसके पास ऐसा एक कोना हो, जहां वह बिना किसी परेशानी के कुछ समय अकेले बिता सके. जब घर यह आजादी देता है, तो इंसान वहां खुद को ज्यादा सहज महसूस करता है. साथ ही परिवार के साथ अच्छे रिश्ते, हंसी-मजाक और अपनापन भी घर को खास बना देते हैं. ऐसे माहौल में रहने वाले लोग बाहर की बजाय घर लौटने का इंतजार करते हैं.

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जब घर में तनाव बढ़ता है, तो लगाव कम होने लगता है
रिसर्च में यह भी पाया गया कि अगर घर में लगातार झगड़े हों, प्राइवेट जगह की कमी हो, सफाई ठीक न हो या व्यक्ति को अपनी बात खुलकर कहने की आजादी न मिले, तो उसका घर से इमोशनल जुड़ाव धीरे-धीरे कम होने लगता है. ऐसे लोग अक्सर घर में रहने से बचते हैं और बाहर ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं, क्योंकि घर उन्हें शांति नहीं, बल्कि तनाव देता है.

रिसर्चर का कहना है कि जो लोग घर में रहना पसंद करते हैं, जरूरी नहीं कि वे शर्मीले हों या समाज से दूर रहना चाहते हों. कई बार इसका कारण यह होता है कि उनका घर उन्हें वह सब देता है जिसकी हर इंसान को जरूरत होती है-सुकून, प्यार, सुरक्षा, अपनापन और मानसिक आराम. जब इंसान को लगता है कि घर लौटते ही उसकी सारी परेशानियां कुछ देर के लिए दूर हो जाती हैं, तब घर सिर्फ रहने की जगह नहीं रहता, बल्कि उसकी सबसे सुरक्षित और पसंदीदा जगह बन जाता है.

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