दिवाली को लेकर रंग- रोगन का काम शुरू है. ऐसे में घर पेंट करने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. पुरानी दीवार पर पहले पीओपी किया जाए या पुट्टी लगाया जाए. चलिए जानते हैं यहां ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब
पीओपी यानी प्लास्टर ऑफ पेरिस और वॉल पुट्टी दोनों ही दीवारों को पेंट के लिए तैयार करने के काम आते हैं, लेकिन दोनों का आधार, उद्देश्य और मजबूती बिल्कुल अलग होती है.
आसान शब्दों में समझें तो पीओपी का मुख्य काम टेढ़ी-मेढ़ी दीवारों को सीधा यानी लेवल करना और सजावटी डिजाइन बनाना है. जबकि पुट्टी का काम पेंट के लिए दीवार को कांच जैसी चिकनी और मजबूत सतह देना है.
पीओपी जिप्सम बेस्ड होता है. इसका इस्तेमाल केवल घर के अंदर और सीलिंग पर किया जाता है. पीओपी की लेयर 3 से 10 एमएम तक मोटी लगाई जाती है. यह पानी और नमी के संपर्क में आने पर गल जाता है या झड़ने लगता है.
वहीं दूसरी तरफ पुट्टी व्हाइट सीमेंट से बना होता है. इसका इस्तेमाल घर के अंदरूनी दीवारों के अलावा बाहरी दीवार पर भी किया जा सकता है. पुट्टी की कोटिंग 1 से 2 एमएम पतली लेयर होनी चाहिए. इसका काम छोटी दरारों को भरना और पेंट के लिए चिकनी सतह तैयार करना है. यह नमी को झेलने वाला वाटर रेसिस्टेंट होता है, जो दीवारों को मजबूती प्रदान करता है.
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पेंट से पहले इन दोनों के इस्तेमाल का सही तरीका जानना जरूरी है. दीवारों पर पहले लेवलिंग के लिए पीओपी, फिर फाइनल फिनिश के लिए पुट्टी लगाना चाहिए. सबसे पहले दीवार से पुरानी पपड़ी, धूल, और ग्रीस को सैंडपेपर से रगड़कर पूरी तरह साफ किया जाता है. अगर दीवार बहुत ज्यादा टेढ़ी-मेढ़ी है या उसमें बड़े गड्ढे हैं, तो पीओपी की लेयर चढ़ाई जाती है. पीओपी सूखने के बाद वॉल पुट्टी के 2 कोट लगाए जाते हैं, तब जाकर प्राइमर और पेंट किया जाता है.
पुरानी दीवारों पर हमेशा पुट्टी कमाल करता है
पुरानी दीवार पर वॉल पुट्टी का इस्तेमाल करना सबसे सही और सुरक्षित विकल्प होता है. पुरानी दीवारों में अक्सर नमी और बारीक दरारें होने की संभावना होती है. ऐसे में पुट्टी इन समस्याओं को आसानी से झेल जाता है. वहीं अगर पीओपी कर दिया तो नमी मिलते सीलन आने लग जाती है.
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