क्या आप जानते हैं जिस लाठी से पुलिस लाठीचार्ज करती है, वो लाठी पुलिस के हाथ में आने से पहले भी चेक होती है. इतना ही नहीं, लाठी की टेस्टिंग इंसान पर ही होती है और ठीक वैसे ही होती है, जैसे पुलिस वाले लाठीचार्ज के दौरान करते हैं. जी हां, पुलिस जब लाठी खरीदती है तो सबसे पहले उसका टेस्ट किया जाता है और उसके बाद ये अप्रूव होता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर पुलिस की लाठी को कैसे चेक किया जाता है और इसकी टेस्टिंग के क्या नियम है...
बता दें कि अब पुलिस की ओर से बांस वाली लाठी की जगह पॉलीकार्बोनेट डंडे का इस्तेमाल किया जाता है. पुलिस जब इसके लिए टेंडर जारी करती है तो उसमें टेस्टिंग के लिए भी कहा जाता है. यानी टेस्ट में पास होने के बाद ही पुलिस लाठी का इस्तेमाल करती है.
कैसे होता है टेस्ट?
पुलिस वाली लाठी की दो तरह से टेस्टिंग की जाती है, जिसमें एक टेस्ट इंसानों पर होता है जबकि एक टेस्ट लाठी को सड़क पर मारकर किया जाता है. एक टेस्ट में मानव शरीर पर असर की जांच के लिए टेस्ट होता है, जिसमें सामान्य कपड़े (गर्मी वाले कपड़े) पहने लोगों पर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में एक हाथ से लाठी के वार किए जाते हैं. हालांकि सिर, गर्दन, चेहरा और ग्रोइन जैसे संवेदनशील हिस्सों को इससे बाहर रखा गया है. टेस्ट का मकसद चोट के असर और दर्द के स्तर को जांचना बताया गया है.
इस दौरान एक हाथ से लाठी से वार किया जाता है और इस दौरान शरीर के कई हिस्सों पर मारा जाता है. इसके बाद व्यक्ति से चोट के बारे में दर्द का अनुभव बताने को कहा जाता है. दस्तावेज में उद्देश्य यह बताया गया है कि चोट का असर व्यक्ति की अनुभूति में न बहुत कम और न बहुत ज्यादा दर्द हो. सरकारी कागजों के अनुसार, ये टेस्ट इंसानों पर इसलिए किया जाता है, क्योंकि लाठी का इस्तेमाल बाद में भी इंसानों पर ही होना होता है.
25 बार मारकर होता है एक टेस्ट
इंसानों के शरीर पर मारने के अलावा एक टेस्ट सड़क पर भी किया जाता है. दरअसल, मैदान में लाठी का निशाना चूकने पर वह सड़क या दीवार जैसी किसी कठोर चीज से टकरा सकती है. इसलिए लाठी को पूरी ताकत से कठोर सड़क पर 25 बार मारकर चेक किया जाता है. 25 बार मारने के बाद देखा जाता है कि कहीं ये टूट तो नहीं गई है, उसके बाद उसे अप्रूव किया जाता है.
इसके अलावा एक सर्टिफिकेशन टेस्ट होता है, जिसमें मैटेरियल की गुणवत्ता आदि की जांच की जाती है. ऐसे में एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब के टेस्ट या सर्टिफिकेट की जांच की जा सकती है. यह जांच प्रोडक्ट की डिलीवरी के समय की जा सकती है.
लाठी के वजन, लंबाई का रखा जाता है खास ध्यान
जब पुलिस इसका टेंडर जारी करती है तो इसकी हाइट, मैटेरियल आदि की लिस्ट भी जारी करती है. पुलिस की डिमांड के हिसाब से ये अल्ट्रा स्ट्रॉन्ग, स्क्रैच प्रूफ, जंग ना लगने वाली, फायर प्रूफ, ट्रांसपेरेंट और हाई इम्पैक्ट वाली होनी चाहिए. साथ ही पुलिस चाहती है कि इसकी लॉन्ग शेल्फ लाइफ भी होनी चाहिए. यानी ये 'प्लास्टिक की लाठी' कहने का मतलब कोई सामान्य प्लास्टिक का डंडा नहीं है.
ये करीब 1 मीटर लंबी होती है और इसका वजन 350 ग्राम तक होता है. इसका डाइमीटर 2.5 cm होता है और वॉल थिकनेस 4 एमएम होती है. साथ ही जहां से इस लकड़ी को पकड़ा जाता है, वो हिस्सा 5 इंच का होता है.
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