दादा-परदादा की जमीन के कागज नहीं मिल रहे? ऐसे पता चलेगा कहां-कितनी है जमीन

दादा-परदादा की पुरानी जमीन के कागज खो गये हैं तो अपने राज्य के आधिकारिक भूलेख पोर्टल से घर बैठे जमीन का रिकॉर्ड कैसे चेक करें, जानिए आसान तरीका.

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आप घर बैठे अपने राज्य के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर जमीन की जानकारी चेक कर सकते हैं. ( Photo: ITG) आप घर बैठे अपने राज्य के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर जमीन की जानकारी चेक कर सकते हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:37 PM IST

कई परिवारों में जमीन-जायदाद से जुड़े कागज कई साल पुराने होते हैं. कभी दादा के नाम जमीन रही, कभी परदादा के नाम. समय के साथ कागज खराब हो गए या कहीं रखे-रखे खो गए तो परेशानी बढ़ जाती है. ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि जमीन का रिकॉर्ड दोबारा कहां से मिलेगा? अच्छी बात यह है कि अब कई राज्यों में जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकता है. इसके लिए हर बार तहसील या सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. आप घर बैठे अपने राज्य के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर जमीन की जानकारी चेक कर सकते हैं.

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हालांकि, एक जरूरी बात समझ लें. हर राज्य की वेबसाइट और ऑनलाइन रिकॉर्ड देखने का तरीका अलग हो सकता है. इसलिए किसी अनजान वेबसाइट के बजाय अपने राज्य के आधिकारिक भूलेख या राजस्व विभाग की वेबसाइट का इस्तेमाल करना बेहतर है.

सबसे पहले राज्य की आधिकारिक भूलेख वेबसाइट खोलें
मोबाइल या कंप्यूटर में क्रोम खोलें. गूगल पर अपने राज्य का नाम लिखकर उसके साथ भूलेख, लैंड रिकॉर्ड्स या रेवेन्यू डिपार्टमेंट सर्च करें. उदाहरण के लिए, अगर जमीन बिहार में है तो बिहार का आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड पोर्टल देखें. इसी तरह उत्तर प्रदेश की जमीन के लिए यूपी के आधिकारिक भूलेख पोर्टल पर जाना होगा. वेबसाइट खुलने के बाद वहां आपको जमीन का रिकॉर्ड देखने से जुड़ा विकल्प मिलेगा.

जिला, तहसील और गांव की जानकारी भरें
अब आपको जमीन की लोकेशन से जुड़ी जानकारी चुननी होगी. सबसे पहले जिला चुनें. इसके बाद तहसील या अंचल और फिर गांव का नाम चुनना होगा. यहां एक बात का खास ध्यान रखें. जिला, तहसील और गांव बिल्कुल सही चुनें. अगर इनमें गलती हुई तो आपके सामने किसी दूसरी जगह की जमीन का रिकॉर्ड आ सकता है.

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दादा या परदादा के नाम से खोजें
अब जमीन का रिकॉर्ड खोजने के लिए अलग-अलग विकल्प मिल सकते हैं. कई पोर्टल पर खातेदार के नाम, खसरा नंबर, खाता नंबर या खतौनी नंबर से रिकॉर्ड खोजने की सुविधा होती है. अगर आपके पास खसरा या खाता नंबर नहीं है तो खातेदार के नाम से रिकॉर्ड खोजना आसान हो सकता है.

जिस दादा या परदादा के नाम जमीन रही होगी, उनका नाम डालकर सर्च करें. नाम की स्पेलिंग या पुराने रिकॉर्ड में दर्ज नाम अलग होने पर रिकॉर्ड नहीं भी मिल सकता है. ऐसी स्थिति में नाम के दूसरे तरीके से खोजने की कोशिश करें.

रिकॉर्ड सामने आए तो जानकारी ध्यान से मिलाएं
नाम से सर्च करने पर एक जैसे या मिलते-जुलते नाम वाले कई रिकॉर्ड सामने आ सकते हैं. इसलिए सिर्फ नाम देखकर किसी रिकॉर्ड को अपनी जमीन न मान लें. रिकॉर्ड में दिए गए खाता नंबर, खसरा नंबर, जमीन का रकबा, गांव और खातेदार का नाम ध्यान से मिलाएं. सही रिकॉर्ड मिलने पर पोर्टल पर उपलब्ध विकल्प के जरिए खतौनी, जमाबंदी या जमीन के रिकॉर्ड की नकल देखी जा सकती है. कुछ राज्यों में इसे डाउनलोड या प्रिंट करने की सुविधा भी मिलती है.

क्या ऑनलाइन रिकॉर्ड ही असली जमीन का कागज है?
यह बात समझना बहुत जरूरी है. ऑनलाइन भूलेख में दिखाई देने वाला रिकॉर्ड जमीन से जुड़ी सरकारी जानकारी का महत्वपूर्ण रिकॉर्ड हो सकता है, लेकिन इसे हर मामले में रजिस्ट्री या मालिकाना हक का अंतिम दस्तावेज नहीं माना जा सकता. अगर जमीन बेचने, विरासत, बंटवारे, कोर्ट केस या मालिकाना हक से जुड़ा कोई विवाद है तो पुराने रजिस्ट्री दस्तावेज, दाखिल-खारिज, जमाबंदी और दूसरे संबंधित रिकॉर्ड भी जरूरी हो सकते हैं. ऐसे मामलों में संबंधित राजस्व विभाग या रजिस्ट्रार कार्यालय से रिकॉर्ड की प्रमाणित कॉपी लेने की जरूरत पड़ सकती है.

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अगर नाम से रिकॉर्ड नहीं मिले तो क्या करें?
अगर दादा या परदादा के नाम से रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है. पुराने रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग अलग हो सकती है. इसके अलावा जमीन का खसरा नंबर, खाता नंबर, खतौनी नंबर या दूसरे उपलब्ध विवरण से भी खोज की जा सकती है. बहुत पुराने रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध न होने की स्थिति भी संभव है. तब संबंधित तहसील, अंचल या राजस्व कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से पुराने दस्तावेज की जानकारी लेनी पड़ सकती है. इसलिए घर बैठे ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक करना पहला आसान कदम है, लेकिन हर 100-150 साल पुराने दस्तावेज का रिकॉर्ड ऑनलाइन मिल ही जाएगा, ऐसा जरूरी नहीं है.

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