नेपाल के कुछ पहाड़ी इलाकों में एक ऐसी पारंपरिक शराब बनाई जाती है, जिसके बारे में जानकर ज्यादातर लोग हैरान रह जाते हैं. कहा जाता है कि इस शराब को तैयार करने में सियार के मांस का इस्तेमाल किया जाता है. यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और स्थानीय समुदाय इसे सिर्फ नशे के लिए नहीं, बल्कि पारंपरिक औषधि के रूप में भी देखता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले चावल से पारंपरिक शराब तैयार की जाती है. इसके बाद उसमें सियार का मांस मिलाकर उसे लंबे समय तक बंद बर्तन में रखा जाता है. कुछ जगहों पर इसे कई महीनों तक ऐसे ही रखा जाता है ताकि मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो जाए. बाद में इसे छानकर पिया जाता है.
यह तरीका हर जगह एक जैसा नहीं होता. अलग-अलग इलाकों और समुदायों में इसे बनाने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. लेकिन चावल और सियार के मांस का इस्तेमाल इस परंपरा की सबसे खास बात मानी जाती है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह शराब शरीर को ताकत देती है और कई तरह की शारीरिक परेशानियों में राहत पहुंचा सकती है. खासतौर पर इसे घुटनों, कमर और जोड़ों के दर्द के लिए फायदेमंद माना जाता है. कुछ लोगों का यह भी विश्वास है कि इसे पीने से शरीर में गर्मी बनी रहती है और ठंडे पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को आराम मिलता है. हालांकि ये सभी बातें स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं.
पीढ़ियों से चली आ रही है परंपरा
नेपाल के कुछ समुदायों में यह परंपरा नई नहीं है. बुजुर्गों से युवाओं तक इसका तरीका और मान्यता पीढ़ी दर पीढ़ी पहुंची है. कई परिवार खास मौकों पर या जरूरत पड़ने पर ही इस शराब को तैयार करते हैं. स्थानीय लोग इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानते हैं. उनके लिए यह सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि उनकी पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों से जुड़ा हुआ विषय है. नेपाल में रहने वाले अधिकांश लोग इस तरह की शराब का इस्तेमाल नहीं करते. यह परंपरा केवल कुछ खास पहाड़ी इलाकों और सीमित समुदायों तक ही सीमित है. इसलिए इसे पूरे नेपाल की संस्कृति मानना सही नहीं होगा.
क्या सच में दर्द ठीक हो जाता है?
इस सवाल का स्पष्ट जवाब फिलहाल विज्ञान के पास नहीं है. डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी पारंपरिक नुस्खे या पेय को दवा मानने से पहले उसके वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी हैं. अब तक ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि सियार के मांस से बनी शराब वास्तव में घुटनों, कमर या जोड़ों के दर्द को ठीक कर देती है. इसलिए केवल लोक मान्यताओं के आधार पर इसे इलाज नहीं माना जा सकता.
डॉक्टर क्या सलाह देते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से कमर, घुटने या जोड़ों में दर्द है, तो उसे डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. बिना वैज्ञानिक प्रमाण वाले किसी भी पारंपरिक पेय या नुस्खे पर पूरी तरह भरोसा करना सही नहीं है. अगर कोई व्यक्ति ऐसी शराब का सेवन करता भी है, तो उसे यह समझना चाहिए कि यह प्रमाणित दवा नहीं है. इसके अलावा शराब का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है.
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