बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित और किफायती घर बनाने के लिए इंजीनियरिंग तकनीकों और सही सामग्रियों का सही कॉम्बिनेशन सबसे जरूरी है. भारी और महंगी चीजों के इस्तेमाल के बजाय स्मार्ट और हल्की तकनीकों का इस्तेमाल करके लागत कम की जा सकती है.
भूकंप से सुरक्षा के लिए कन्फाइंड मेसनरी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें पहले ईंटों की दीवारें बनाई जाती हैं. फिर कोनों पर पतले कंक्रीट के पिलर, जिसे टाई कॉलम और बीम ढाले जाते हैं. यह पारंपरिक फ्रेम स्ट्रक्चर से काफी सस्ता होता है और भूकंप में दीवारों को गिरने नहीं देता.
कुछ एक्सपर्ट के मुताबिक, भूकंपरोधी घर बनाने के लिए दूसरा उपाय है छतों को हल्का बनाना. भारी कंक्रीट यानी आरसीसी की छत के बजाय पफ पैनल या हल्की शीट का इस्तेमाल छत बनाने में करना चाहिए. पफ पैनल (PUF Panel) एक प्रकार का इंसुलेटेड सैंडविच पैनल है. इसका इस्तेमाल आधुनिक निर्माण और छतों में टेम्प्रेचर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है.
छत जितनी हल्की होगी, भूकंप में घर के ढहने का खतरा उतना ही कम होगा और लागत भी आधी हो जाएगी. दीवार बनाते समय खिड़की-दरवाजों के ऊपर लिंटल और जमीन के स्तर पर प्लिंथ जरूर बनाए. इससे चारों तरफ कंक्रीट का एक मजबूत बैंड या रिंग बन जाता है. यह पूरे घर को एक साथ बांधकर रखता है.
वहीं बाढ़ से सुरक्षा के लिए घर बनाते वक्त लोग हमेशा प्लिंथ की ऊंचाई थोड़ी ज्यादा रखते हैं. घर के फर्श का स्तर यानी प्लिंथ लेवल इलाके में पिछले 30 सालों में आई सबसे ऊंची बाढ़ के स्तर से कम से कम 2 से 3 फीट ऊपर होती है. बाढ़ प्रभावित इलाके में कई घरों के ग्राउंड फ्लोर को केवल पिलर पर खड़ा कर दिया जाता है. ताकि पानी नीचे से निकल जाए.बाढ़ के पानी के दबाव को झेलने के लिए घर की नींव और प्लिंथ बीम को मजबूत कंक्रीट और सही स्टील से बनाए जाने चाहिए.
ऐसे कम हो जाएगी लागत
घर निर्माण का लागत कम करने के लिए इंटरलॉकिंग ब्रिक्स का इस्तेमाल खूब हो रहा है.इन ईंटों को जोड़ने के लिए सीमेंट-रेत के मसाले की जरूरत नहीं होती. ये ब्लॉक खिलौनों की तरह आपस में फंस जाते हैं. इससे सीमेंट और मजदूरी का खर्च 30% से 40% तक कम हो जाता है और यह भूकंप के झटके भी सोख सकती हैं.
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फ्लाई एश ईंटें का इस्तेमाल भी इन दिनों खूब हो रहा है. यह लाल ईंटों की तुलना में मिट्टी की जगह कोयले की राख से बनती हैं. यह सस्ती, हल्की और पानी को कम सोखती हैं, जिससे सीलन नहीं आती. सबसे बड़ी बात कि घर बनाने से पहले जमीन की मिट्टी की जांच जरूर होनी चाहिए. यदि मिट्टी रेतीली या धंसने वाली है, तो नींव को थोड़ा गहरा और चौड़ा बनाना पड़ता है. वहीं सही नक्शा भी मजबूत घर के लिए काफी जरूरी है. घर का आकार वर्गाकार या आयताकार रखने से मजबूती मिलती है.
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