जमीन या प्लॉट खरीदने के बाद हर किसी के लिए यह जानना जरूरी होता है कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन उसके नाम दर्ज हुई है या नहीं. कई लोग रजिस्ट्री होने के बाद मान लेते हैं कि जमीन पूरी तरह उनके नाम हो गई, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. रजिस्ट्री के बाद जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में नाम ट्रांसफर कराने यानी म्यूटेशन भी होना चाहिए. अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए बार-बार सरकारी ऑफिस जाने की जरूरत नहीं पड़ती. आप अपने मोबाइल फोन से घर बैठे कुछ ही मिनट में जमीन का रिकॉर्ड चेक कर सकते हैं.
रजिस्ट्री के बाद नाम चढ़ना क्यों जरूरी है?
जमीन खरीदने के बाद सिर्फ रजिस्ट्री का दस्तावेज होना ही काफी नहीं होता. राजस्व रिकॉर्ड में भी नए मालिक का नाम दर्ज होना जरूरी है. इसी प्रक्रिया को आमतौर पर नामांतरण या म्यूटेशन कहा जाता है. अगर आपने जमीन खरीदी है और रिकॉर्ड में अभी भी पुराने मालिक का नाम दिखाई दे रहा है, तो आपको नाम ट्रांसफर की स्थिति जरूर चेक करनी चाहिए.
मोबाइल से ऐसे चेक करें जमीन का रिकॉर्ड
सबसे पहले अपने मोबाइल में अपने राज्य की आधिकारिक भूमि रिकॉर्ड या भूलेख वेबसाइट खोलें. अलग-अलग राज्यों में वेबसाइट का नाम और उसका तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. वेबसाइट पर आपको भूलेख, जमाबंदी, खसरा-खतौनी या भूमि रिकॉर्ड जैसे विकल्प दिखाई दे सकते हैं. इस विकल्प पर क्लिक करने के बाद आपको अपने जिले, तहसील और गांव की जानकारी चुननी पड़ सकती है. इसके बाद जमीन का रिकॉर्ड खोजने के लिए खसरा नंबर, खाता नंबर या मालिक के नाम जैसे विकल्प मिल सकते हैं.
खसरा या खाता नंबर से मिलेगी पूरी जानकारी
अगर आपके पास जमीन का खसरा नंबर या खाता नंबर है, तो रिकॉर्ड खोजना काफी आसान हो जाता है. संबंधित जानकारी भरने के बाद स्क्रीन पर जमीन का रिकॉर्ड खुल सकता है. इसमें जमीन के मालिक का नाम और जमीन से जुड़ी दूसरी जानकारी दिखाई दे सकती है. अगर रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज है, तो इसका मतलब है कि उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड में जमीन आपके नाम दर्ज हो चुकी है.
पुराने मालिक का नाम दिखे तो क्या करें?
अगर आपने जमीन की रजिस्ट्री करा ली है, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में अभी भी पुराने मालिक का नाम दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब हो सकता है कि नाम ट्रांसफर की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. कई मामलों में रिकॉर्ड अपडेट होने में समय भी लग सकता है. ऐसी स्थिति में नाम ट्रांसफर आवेदन की स्थिति चेक करें. जरूरत पड़ने पर संबंधित तहसील या राजस्व विभाग के कार्यालय से भी जानकारी ली जा सकती है.
रजिस्ट्री और नाम ट्रांसफर में क्या अंतर है?
रजिस्ट्री और नाम ट्रांसफर यानी नामांतरण दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. रजिस्ट्री जमीन की खरीद-बिक्री का कानूनी दस्तावेज होती है. इसके जरिए यह दर्ज होता है कि जमीन का सौदा किससे और किसके बीच हुआ है. वहीं नामांतरण या म्यूटेशन की प्रक्रिया में राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है. यानी रजिस्ट्री होने के बाद सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में पुराने मालिक की जगह नए मालिक का नाम अपडेट किया जाता है.
इसलिए जमीन खरीदने के बाद सिर्फ रजिस्ट्री कराकर निश्चिंत नहीं होना चाहिए. नामांतरण हुआ है या नहीं, यह भी जरूर चेक करें. कई बार रजिस्ट्री हो जाने के बाद भी जमीन के रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम दिखाई देता है. ऐसे में नामांतरण की स्थिति की जानकारी लेना जरूरी है.
रिकॉर्ड चेक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
जमीन का रिकॉर्ड हमेशा अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर ही चेक करें. किसी अनजान वेबसाइट पर अपने दस्तावेज, आधार नंबर या दूसरी निजी जानकारी साझा न करें. अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम, खसरा नंबर या जमीन की जानकारी गलत दिखाई दे रही है, तो उसे नजरअंदाज न करें. ऐसी गलती को ठीक कराने के लिए संबंधित राजस्व विभाग से संपर्क किया जा सकता है. इस तरह आप घर बैठे अपने मोबाइल फोन से यह पता कर सकते हैं कि जमीन के सरकारी रिकॉर्ड में आपका नाम दर्ज है या नहीं.
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