कश्मीर की खूबसूरती की बात हो और चिनार के पेड़ों का जिक्र न हो, ऐसा कम ही होता है. खासकर अक्टूबर और नवंबर के दौरान यहां के चिनार के पेड़ देखने लायक होते हैं. गर्मियों में हरे-भरे नजर आने वाले इन पेड़ों के पत्ते शरद ऋतु आते ही पीले, नारंगी और गहरे लाल रंग में बदलने लगते हैं. दूर से देखने पर ऐसा लगता है, जैसे पेड़ों पर लाल रंग की चादर बिछ गई हो. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर चिनार के पत्तों का रंग अचानक क्यों बदलने लगता है? क्या ठंड पड़ने से पत्ते लाल हो जाते हैं या इसके पीछे कोई साइंटिफिक कारण है? दरअसल, इसके पीछे पेड़ों के अंदर होने वाली एक खास प्राकृतिक प्रक्रिया काम करती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कश्मीर के चिनार के पत्ते लाल क्यों हो जाते हैं और इस पेड़ की खासियत क्या है.
गर्मियों में हरे और सर्दियों से पहले लाल क्यों हो जाते हैं पत्ते?
चिनार के पत्तों का रंग बदलने की सबसे बड़ी वजह उनमें मौजूद रंग बनाने वाले तत्व हैं. गर्मियों में पत्तों में क्लोरोफिल नाम का हरा रंगद्रव्य काफी मात्रा में होता है. यही तत्व पौधों को सूरज की रोशनी की मदद से अपना भोजन बनाने में मदद करता है. इस प्रोसेस को फोटोसिन्थेसिस कहते हैं. गर्मियों में धूप और अनुकूल मौसम मिलने के कारण क्लोरोफिल एक्टिव रहता है, इसलिए चिनार के पत्ते गहरे हरे दिखाई देते हैं. लेकिन जैसे-जैसे शरद ऋतु आती है, दिन छोटे होने लगते हैं और तापमान गिरने लगता है. पेड़ धीरे-धीरे सर्दियों के लिए तैयार होने लगता है. इस दौरान पत्तों में क्लोरोफिल की मात्रा कम होने लगती है. जब हरे रंग का असर घटता है, तो पत्तों में पहले से मौजूद पीले और नारंगी रंग देने वाले तत्व दिखाई देने लगते हैं. इसी वजह से चिनार के पत्तों का रंग हरे से पीला और नारंगी होने लगता है
पत्तों को लाल रंग कौन देता है?
चिनार के पत्तों में लाल रंग दिखाई देने के पीछे भी पिगमेंट की भूमिका हो सकती है. आम तौर पर पेड़ों की पत्तियों में पीला और नारंगी रंग कैरोटीन और जैंथोफिल जैसे तत्वों से आता है. ये तत्व पत्तों में पहले से मौजूद होते हैं, लेकिन गर्मियों में क्लोरोफिल का हरा रंग उन पर हावी रहता है. वहीं, कई पेड़ों की पत्तियों में लाल और बैंगनी रंग एंथोसायनिन नाम के पिगमेंट से बनता है. इसकी मात्रा पर तापमान, सूरज की रोशनी और पत्तों में मौजूद शुगर जैसे कारकों का असर पड़ सकता है. हालांकि, कश्मीर के चिनार के पत्तों में दिखाई देने वाले हर तरह के गहरे लाल रंग के पीछे कौन-से तत्व काम करते हैं, इसे लेकर पूरी तरह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है.
कश्मीर में ही क्यों खास दिखते हैं चिनार के पेड़?
चिनार का पेड़ ठंडे मौसम और पर्याप्त पानी वाले इलाकों में अच्छी तरह बढ़ता है. कश्मीर की जलवायु में गर्मियों और सर्दियों के बीच तापमान का अंतर और शरद ऋतु में मौसम का बदलना इसके पत्तों का रंग बदलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है. भारत के कई दूसरे हिस्सों में पेड़ों के पत्ते मौसम बदलने पर इस तरह लाल और नारंगी नहीं होते. कुछ पेड़ सालभर हरे रहते हैं, जबकि कुछ पेड़ों में सूखे मौसम में पत्ते झड़ने लगते हैं. इसलिए कश्मीर में चिनार के पेड़ों का हरे से सुनहरे और लाल रंग में बदलना वहां की प्राकृतिक खूबसूरती को एक अलग पहचान देता है
चिनार का पेड़ कश्मीर की पहचान कैसे बना?
चिनार केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि कश्मीर की संस्कृति और इतिहास का भी अहम हिस्सा है. इसे जम्मू-कश्मीर का राजकीय पेड़ माना जाता है. इसकी विशाल शाखाएं और घनी छाया इसे खास बनाती हैं. मुगल शासकों ने भी कश्मीर में चिनार के पेड़ लगाने को बढ़ावा दिया था. श्रीनगर के नसीम बाग जैसे ऐतिहासिक बागों में आज भी पुराने चिनार के पेड़ देखने को मिलते हैं. चिनार के पत्तों के शेप का इस्तेमाल कश्मीरी कढ़ाई, कालीन, शॉल और पारंपरिक हस्तशिल्प के डिजाइन में भी किया जाता है. यही वजह है कि इस पेड़ का महत्व केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है.
पुराने चिनार के पेड़ों को बचाने के लिए क्या हो रहा है?
समय के साथ कश्मीर के कई पुराने चिनार के पेड़ों को नुकसान पहुंचा है. शहरीकरण, सड़क निर्माण, पेड़ों की कटाई और बीमारियां इनके लिए चुनौती बन रही हैं. ऐसे में इन पेड़ों को बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 'ट्री आधार' (Tree Aadhaar) पहल शुरू की है. इस पहल के तहत चिनार के पेड़ों की पहचान दर्ज की जा रही है और उनकी लोकेशन, उम्र, आकार और सेहत से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है.
aajtak.in