हीरा असली है या नकली? ज्वेलर्स कुछ सेकंड में कैसे पहचान लेते हैं, जानिए पूरा तरीका

हीरा खरीदते समय उसकी चमक देखकर ही उसे असली मान लेना सही नहीं है. ज्वेलर्स शुरुआती जांच के लिए लूप, डायमंड टेस्टर और दूसरे उपकरणों की मदद लेते हैं, जबकि महंगे हीरे की पक्की पहचान के लिए प्रमाणित ग्रेडिंग रिपोर्ट जरूरी होती है.

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शुरुआती जांच में अनुभवी ज्वेलर्स काफी जल्दी अंदाजा लगा सकते हैं (Photo: Pexel) शुरुआती जांच में अनुभवी ज्वेलर्स काफी जल्दी अंदाजा लगा सकते हैं (Photo: Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

हीरे की चमक देखकर अक्सर लोगों को लगता है कि सामने रखा पत्थर असली है. लेकिन सिर्फ चमक देखकर यह तय करना आसान नहीं होता कि हीरा प्राकृतिक है, लैब में बनाया गया है या कोई नकली पत्थर. ज्वेलर्स और विशेषज्ञ इसके लिए कई तरह के टेस्ट और उपकरण इस्तेमाल करते हैं.

अगर आप कभी ज्वेलरी की दुकान पर हीरा खरीदने गए होंगे तो देखा होगा कि दुकानदार कुछ ही मिनटों में उसकी शुरुआती जांच कर लेता है. आखिर वह ऐसा कैसे करता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

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सबसे पहले देखते हैं कट और चमक

हीरे की शुरुआती जांच आंखों से ही शुरू होती है. विशेषज्ञ उसके कट, चमक, आकार और सतह को ध्यान से देखते हैं. असली हीरे में रोशनी के साथ एक खास तरह की चमक दिखाई देती है.

लेकिन केवल इस आधार पर हीरे को असली मान लेना सही नहीं है. क्यूबिक जिरकोनिया जैसे कुछ नकली पत्थर भी देखने में काफी चमकदार हो सकते हैं.

फिर आता है लूप का काम

ज्वेलर्स अक्सर एक खास आवर्धक कांच का इस्तेमाल करते हैं, जिसे लूप कहा जाता है. इससे हीरे को करीब से देखा जाता है.इससे पत्थर के अंदर मौजूद छोटे निशान, दरारें और दूसरी विशेषताओं को देखा जा सकता है. प्राकृतिक हीरों में अक्सर अंदर कुछ प्राकृतिक विशेषताएं मिल सकती हैं. हालांकि, केवल इन्हें देखकर भी अंतिम फैसला नहीं किया जाता.

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डायमंड टेस्टर कैसे काम करता है?

ज्वेलर्स के पास डायमंड टेस्टर भी होता है. यह उपकरण हीरे की कुछ भौतिक विशेषताओं को जांचता है.हीरा गर्मी को अलग तरीके से संचालित करता है. इसी वजह से थर्मल टेस्टर हीरे और कई दूसरे पत्थरों के बीच अंतर करने में मदद कर सकता है.

कुछ आधुनिक उपकरण बिजली की चालकता जैसी दूसरी विशेषताओं को भी जांचते हैं. इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि पत्थर हीरा हो सकता है या कोई दूसरा पदार्थ.

सांस वाला टेस्ट कितना सही है?

कई लोग कहते हैं कि हीरे पर सांस छोड़ने से असली और नकली का पता चल जाता है. दावा यह है कि असली हीरे पर भाप जल्दी गायब हो जाती है.लेकिन इसे भरोसेमंद अंतिम टेस्ट नहीं माना जाना चाहिए. अलग-अलग पत्थरों की सतह और तापमान के कारण ऐसा टेस्ट गलत नतीजा दे सकता है. इसलिए सिर्फ इस तरीके के आधार पर महंगा हीरा खरीदना ठीक नहीं है.

असली हीरा और लैब में बना हीरा अलग कैसे?

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. लैब में बनाया गया डायमंड नकली हीरा नहीं होता.लैब-ग्रोन डायमंड में प्राकृतिक हीरे जैसी ही रासायनिक संरचना और क्रिस्टल संरचना होती है. इसलिए सामान्य डायमंड टेस्टर से प्राकृतिक और लैब-ग्रोन डायमंड में फर्क करना हमेशा संभव नहीं होता.इसके लिए विशेषज्ञ उपकरण और जरूरत पड़ने पर जेमोलॉजिकल लैब की रिपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है.

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सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है?

महंगा हीरा खरीदते समय सिर्फ दुकानदार की बात पर भरोसा करने के बजाय उसकी ग्रेडिंग रिपोर्ट देखना बेहतर होता है.रिपोर्ट में आमतौर पर हीरे के 4सी के बारे में जानकारी दी जाती है:

कट - हीरे को किस तरह काटा गया है

कलर - हीरे का रंग कितना साफ है

क्लैरिटी - अंदर और बाहर कितने निशान हैं

कैरेट - हीरे का वजन

इन्हीं खूबियों के आधार पर हीरे की कीमत में बड़ा अंतर आ सकता है.

तो क्या ज्वेलर्स कुछ सेकंड में असली हीरा पहचान लेते हैं?

शुरुआती जांच में अनुभवी ज्वेलर्स काफी जल्दी अंदाजा लगा सकते हैं. वे पत्थर की चमक, कट, वजन और दूसरी विशेषताओं को देखकर और टेस्टिंग उपकरण की मदद से इसकी जांच करते हैं.

लेकिन कुछ सेकंड में 100 फीसदी पक्की पहचान हमेशा संभव नहीं होती, खासकर जब मामला प्राकृतिक हीरे और लैब-ग्रोन डायमंड के बीच अंतर करने का हो.

अगर हीरा महंगा है तो उसकी प्रमाणित ग्रेडिंग रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक है. यानी हीरा खरीदते समय सिर्फ उसकी चमक देखकर फैसला न लें, बल्कि उसकी पहचान, ग्रेडिंग और प्रमाणपत्र भी जरूर जांचें.

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