जब हिप-हॉप म्यूजिक का जन्म हुआ, हाउस पार्टी में पहली बार प्ले हुआ था

आज के दिन ही हिप - हॉप म्यूजिक रेवोल्यूशन का जन्म हुआ था. जब एक ही रिकॉर्ड को बजाते हुए उसे उसके कुछ हिस्से को बार- बार रिपीट करना शुरू किया गया. इस तरह पहली बार हिप- हॉप म्यूजिक स्टाइल अस्तित्व में आया.

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आज के दिन ही हिप- हॉप स्टाइल म्यूजिक अस्तित्व में आया था (Photo - Pexels) आज के दिन ही हिप- हॉप स्टाइल म्यूजिक अस्तित्व में आया था (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:50 AM IST

11 अगस्त 1973 को, न्यूयॉर्क शहर के वेस्ट ब्रोंक्स स्थित एक अपार्टमेंट में कुछ टीनएजर्स ने एक हाउस पार्टी रखी थी. यह एक बैक-टू-स्कूल पार्टी था. इसी में हिप-हॉप का जन्म हुआ. म्यूजिक की किसी भी स्टाइल की तरह, हिप-हॉप की जड़ें अन्य शैलियों से जुड़ी है. हालांकि, इसे कई अलग-अलग कलाकारों ने आकार दिया है. फिर भी  इस बात का पुख्ता सबूत है कि इसका जन्म ठीक इसी पार्टी में हुआ था. उस ऐतिहासिक पार्टी का आयोजन क्लाइव कैंपबेल ने किया था. जिन्हें इतिहास में डीजे कूल हर्क के नाम से जाना जाता है, जो हिप-हॉप के जनक माने जाते हैं.

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डीजे कूल हर्क का जन्म किंग्स्टन, जमैका में हुआ था. 10 वर्ष की उम्र तक वहीं पले-बढ़े. डीजे कूल हर्क ने 1970 के दशक की शुरुआत में ब्रोंक्स में अपने पिता के बैंड परफर्मेंस  के बीच पार्टियों में रिकॉर्ड बजाना शुरू किया. हर्क अक्सर जमैका के सेलेक्टर्स यानी डीजे स्टाइल की नकल करते हुए अपने बजाए गए, रिकॉर्ड पर टोस्टिंग यानी बातचीत करते थे. उनका यह काम रैपिंग से संबंधित नहीं था.  हिप-हॉप में कूल हर्क का योगदान उससे कहीं ज्यादा था. 

डीजे कूल हर्क का सिग्नेचर इन्वेंशन इस बात से उपजा कि लोग उनके बजाए जा रहे किसी भी गाने के अलग-अलग हिस्सों पर कैसी प्रतिक्रिया देते थे. उन्होंने कहा था कि मैंने देखा कि लोग गाने के कुछ खास हिस्सों का इंतजार करते थे. शायद अपने पसंदीदा डांस स्टेप्स करने के लिए. ये पल अक्सर ड्रम ब्रेक के दौरान आते थे. रिकॉर्ड के वो पल, जब वोकल और इंस्ट्रूमेंट कुछ देर के लिए पूरी तरह बंद हो जाते थे और सिर्फ रिदम बजती थी.

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कूल हर्क ने एक आम डीजे सेटअप में मौजूद दो टर्नटेबल्स का इस्तेमाल दो गानों के बीच सहज बदलाव के लिए नहीं, बल्कि एक ही गाने की दो कॉपी के बीच बार-बार स्विच करने के लिए किया. इससे वह छोटा ड्रम ब्रेक लंबा हो जाता था, जिसे सुनने के लिए लोग सबसे ज़्यादा बेताब रहते थे. उन्होंने अपनी इस तरकीब को 'मेरी-गो-राउंड' नाम दिया. आज इसे ब्रेक बीट के नाम से जाना जाता है.

1973 की गर्मियों तक, डीजे कूल हर्क लगभग एक साल से अपनी ब्रेक-बीट स्टाइल की प्रैक्टिस और उसमें सुधार कर रहे थे. हालांकि, 11 अगस्त को उनकी बहन की पार्टी ने उन्हें अब तक की सबसे बड़ी भीड़ और अब तक के सबसे शक्तिशाली साउंड सिस्टम के सामने पेश किया. उस पार्टी की सफलता ने एक जमीनी स्तर की संगीत क्रांति की शुरुआत की. वह भी "हिप-हॉप" शब्द के प्रचलन में आने से पूरे छह साल पहले.

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