किसानों का कब-कब नहीं लगता टोल? जान लीजिए नियम, फिर कोई नहीं रोकेगा

अगर आप खेती के काम के लिए ट्रैक्टर या कंबाइन हार्वेस्टर से राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. जानिए किन कृषि वाहनों को टोल टैक्स से छूट मिलती है, क्या कहते हैं NHAI के नियम, सर्विस रोड होने पर क्या व्यवस्था है और अगर गलत तरीके से टोल वसूला जाए तो किसान क्या कर सकते हैं.

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 आखिर किन किसानों और किन वाहनों को टोल से छूट मिलती है. ( Photo: ITG) आखिर किन किसानों और किन वाहनों को टोल से छूट मिलती है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

अगर आप किसान हैं और खेती के काम के लिए ट्रैक्टर या कंबाइन हार्वेस्टर लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग (नेशनल हाईवे) से गुजरते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. अक्सर टोल प्लाजा पर किसानों और कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर विवाद हो जाता है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर टोल देना होगा या नहीं. कई किसानों को भी सही नियम की जानकारी नहीं होती, जिसकी वजह से उन्हें बेवजह परेशानी का सामना करना पड़ता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर किन किसानों और किन वाहनों को टोल से छूट मिलती है.

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हाल ही में लोकसभा में सांसद गुरजीत सिंह औजला ने सरकार से सवाल पूछा कि क्या देशभर में सभी कृषि वाहनों को टोल टैक्स से छूट दी गई है? अगर ऐसा है तो कई टोल प्लाजा पर किसानों से अब भी टोल क्यों वसूला जा रहा है? इसके जवाब में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नियमों की पूरी जानकारी दी और बताया कि किन वाहनों को टोल से छूट मिलती है.

2017 में सरकार ने बदला था नियम
सरकार ने बताया कि 14 मार्च 2017 को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था. इस नोटिफिकेशन के जरिए राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क में संशोधन किया गया. पहले नियमों में सिर्फ ट्रैक्टर को टोल से छूट मिली हुई थी, लेकिन 2017 के संशोधन के बाद कंबाइन हार्वेस्टर को भी इस सूची में शामिल कर दिया गया. इसका मतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर ट्रैक्टर और कंबाइन हार्वेस्टर से यूजर फीस यानी टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा.

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2008 के नियम क्या कहते हैं?
यह छूट सिर्फ 2017 के नोटिफिकेशन से ही नहीं जुड़ी है, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में भी इसका उल्लेख है. इन नियमों के मुताबिक दोपहिया वाहन, तीन पहिया वाहन, ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और पशुओं द्वारा खींचे जाने वाले वाहनों से राष्ट्रीय राजमार्ग, पुल, बाईपास या सुरंग का इस्तेमाल करने पर टोल नहीं लिया जाता. हालांकि, इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी है.

सर्विस रोड है तो मुख्य हाईवे पर नहीं चल सकेंगे
सरकार के नियमों के अनुसार अगर किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ सर्विस रोड या वैकल्पिक सड़क मौजूद है, तो तीन पहिया वाहन, ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और पशु-चालित वाहनों को उसी रास्ते से गुजरना होगा. अगर उनके लिए अलग सर्विस रोड उपलब्ध है, तो उन्हें मुख्य हाईवे पर चलने की अनुमति नहीं होती.

वहीं दोपहिया वाहनों के मामले में नियम थोड़ा अलग है. अगर सर्विस रोड होने के बावजूद कोई बाइक या स्कूटर चालक मुख्य हाईवे का इस्तेमाल करता है, तो उससे कार पर लगने वाले टोल का 50 प्रतिशत शुल्क लिया जा सकता है.

क्या हर किसान का हर वाहन टोल फ्री है?
इसका जवाब नहीं है. कई लोग यह मान लेते हैं कि किसान होने का मतलब है कि उनके सभी वाहन टोल फ्री हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. टोल में छूट किसान को नहीं, बल्कि कुछ खास कृषि वाहनों को दी गई है. अगर किसान अपनी कार, पिकअप, एसयूवी, ट्रक या किसी अन्य व्यावसायिक वाहन से सफर कर रहा है, तो उस पर सामान्य टोल नियम लागू होंगे. यानी सिर्फ किसान होने से हर वाहन टोल फ्री नहीं हो जाता.

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फिर कई जगह किसानों से टोल क्यों लिया जाता है?
सरकार ने संसद में बताया कि सरकारी फंड से बने सभी टोल प्लाजा और 14 मार्च 2017 के बाद शुरू हुए कई BOT (Build-Operate-Transfer) प्रोजेक्ट में यह नियम लागू किया जा चुका है. हालांकि कुछ पुराने BOT प्रोजेक्ट अभी भी अपने पुराने अनुबंध (Concession Agreement) के अनुसार चलते हैं. ऐसे मामलों में टोल वसूली के नियम अलग हो सकते हैं. यही वजह है कि कई बार अलग-अलग टोल प्लाजा पर अलग स्थिति देखने को मिलती है.

गलत तरीके से टोल कट जाए तो क्या करें?
आज लगभग सभी टोल प्लाजा पर फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से टोल वसूला जाता है. अगर किसी ट्रैक्टर या कंबाइन हार्वेस्टर से गलती से टोल कट जाता है, तो उसकी जांच कराई जा सकती है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (IHMCL) ने इसके लिए टोल मैनेजमेंट एंड कंट्रोल सेंटर (TMCC) बनाया है. यहां सभी टोल प्लाजा पर होने वाले लेन-देन की निगरानी की जाती है.

अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि किसी वाहन से नियमों के खिलाफ टोल वसूला गया है, तो अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित टोल एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है.

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टोल कर्मचारी पैसे मांगे तो क्या करें?
अगर आप ट्रैक्टर या कंबाइन हार्वेस्टर लेकर जा रहे हैं और टोल कर्मचारी टोल टैक्स मांगता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले उससे लागू नियम की जानकारी मांगें. यदि आपका वाहन नियमों के तहत छूट की श्रेणी में आता है, तो उसे इसकी जानकारी दें. अगर फिर भी विवाद होता है, तो NHAI या संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. डीजल, खाद, बीज, मजदूरी और परिवहन पर किसानों का पहले से ही काफी खर्च होता है. ऐसे में अगर नियमों के बावजूद उनसे टोल वसूला जाए, तो उनकी लागत और बढ़ जाती है. इसलिए हर किसान को यह पता होना चाहिए कि किन वाहनों को टोल से छूट मिली हुई है और किन पर सामान्य नियम लागू होते हैं.

NHAI के नियम क्या कहते हैं?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया था कि 15 दिसंबर 2019 से देशभर में टोल प्लाजा पर 100% इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) यानी फास्टैग व्यवस्था लागू की गई है. इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश के लगभग 60 सबसे व्यस्त टोल प्लाजा की पहचान की है, ताकि वहां टोल वसूली की बेहतर निगरानी की जा सके. उस समय तक देशभर में 82.55 लाख फास्टैग जारी किए जा चुके थे.

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मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 के नियम 3(4) के अनुसार दोपहिया, तीन पहिया, ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और पशुओं द्वारा खींचे जाने वाले वाहनों से राष्ट्रीय राजमार्ग, पुल, बाईपास या सुरंग का इस्तेमाल करने पर टोल टैक्स नहीं लिया जाता.

हालांकि, इसके साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी है. अगर किसी राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ सर्विस रोड या अल्टर्नेंट रोट उपलब्ध है, तो तीन पहिया वाहन, ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और पशु-चालित वाहनों को मुख्य हाईवे की बजाय उसी सर्विस रोड का इस्तेमाल करना होगा. वहीं, दोपहिया वाहनों के लिए अलग नियम है. अगर सर्विस रोड उपलब्ध होने के बावजूद कोई बाइक या स्कूटर चालक मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरता है, तो उससे कार पर लगने वाले टोल का 50% शुल्क लिया जा सकता है. यानी, सरकार ने कुछ खास वाहनों को टोल से छूट जरूर दी है, लेकिन यह छूट नियमों और तय शर्तों के साथ लागू होती है.

याद रखने वाली बातें
1. ट्रैक्टर और कंबाइन हार्वेस्टर को राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर टोल से छूट मिली हुई है.
2. यह छूट राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 और 14 मार्च 2017 के संशोधित गजट नोटिफिकेशन के तहत लागू है.
3. दोपहिया, तीन पहिया और पशु-चालित वाहनों को भी नियमों के तहत टोल से छूट दी गई है.
4. अगर सर्विस रोड उपलब्ध है, तो ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और अन्य छूट वाले वाहनों को उसी रास्ते का इस्तेमाल करना होगा.
5. हर किसान का हर वाहन टोल फ्री नहीं है। कार, पिकअप, ट्रक और अन्य निजी या व्यावसायिक वाहनों पर सामान्य टोल नियम लागू रहेंगे.
6. अगर नियमों के बावजूद गलत तरीके से टोल वसूला जाता है, तो NHAI के पास शिकायत की जा सकती है.

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इसलिए अगली बार जब आप खेती के काम से ट्रैक्टर या कंबाइन हार्वेस्टर लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरें, तो अपने अधिकार और नियम जरूर जान लें. सही जानकारी होने पर न केवल आपका पैसा बचेगा, बल्कि टोल प्लाजा पर होने वाली अनावश्यक बहस और परेशानी से भी बचा जा सकेगा.

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