17 अगस्त 1978 को डबल ईगल II नाम का गुब्बारा मेन के प्रेस्क आइल से उड़ान भरकर 137 घंटे बाद पेरिस के पास एक जौ के खेत में उतरा. यह अटलांटिक महासागर को पार करने वाली पहली गुब्बारा उड़ान थी. हीलियम से भरे इस गुब्बारे को बेन अब्रुज़ो, मैक्सी एंडरसन और लैरी न्यूमैन ने संचालित किया और छह दिनों की इस रोमांचक यात्रा में इसने 3,233 मील की दूरी तय की.
पहली बार सन् 1780 के दशक की शुरुआत में फ्रांसीसी कागज निर्माता भाई जोसेफ और एटियेन मोंटगोल्फियर ने गर्म हवा के गुब्बारे में उड़ान भरी थी.यह पहली मानव उड़ान थी. इसके बाद ही गुब्बारों के सहारे मानव उड़ान को पंख लगे. जल्द ही गुब्बारों में हवा से हल्की गैसें, जैसे हीलियम या हाइड्रोजन, भरी जाने लगीं. गुब्बारा उड़ान की एक शुरुआती उपलब्धि सन् 1785 में मिली. जब फ्रांसीसी जीन-पियरे ब्लैंचर्ड और अमेरिकी जॉन जेफ्रीज़ ने इंग्लिश चैनल को हवाई मार्ग से पार करने वाले पहले व्यक्ति बने.
18वीं और 19वीं शताब्दी में, गुब्बारों का इस्तेमाल परिवहन या खेल की तुलना में सैन्य निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए अधिक किया जाता था. हवाई यात्रा के एक साधन के रूप में, गुब्बारे की जगह सन् 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्व-चालित डिराइजेबल ने ले ली.
हालांकि, 20वीं शताब्दी के आरंभ में, खेल के रूप में गुब्बारा उड़ाने में लोगों की रुचि बढ़ने लगी और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए प्रतिवर्ष एक अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफी की पेशकश की जाने लगी. इन शुरुआती प्रतियोगिताओं में बेल्जियम के गुब्बारा चालकों का दबदबा रहा. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, नई तकनीक ने गुब्बारा उड़ाने को अधिक सुरक्षित और किफायती बना दिया. 1960 के दशक तक यह खेल व्यापक रूप से लोकप्रिय हो गया.
अटलांटिक महासागर के पार की उड़ान, जो पहली बार 1919 में विमान और डिराइजेबल द्वारा पूरी की गई थी, कुलीन गुब्बारा चालकों के लिए एक अधूरी उपलब्धि बनी रही.
1859 से लेकर 1978 में डबल ईगल II की उड़ान तक, अटलांटिक महासागर को पार करने के 17 असफल गुब्बारे के प्रयास हुए. इनमें कम से कम सात गुब्बारा चालकों की मृत्यु हो गई. सितंबर 1977 में, बेन अब्रुज़ो और मैक्सी एंडरसन ने डबल ईगल I में अपना पहला प्रयास किया. 66 घंटों में 2,950 मील की यात्रा करने के बाद वे अपने मार्ग से भटक गए और आइसलैंड के पास आपातकालीन लैंडिंग करने के लिए मजबूर हो गए.
अब्रुज़ो को इस कठिन अनुभव के दौरान हुई फ्रॉस्टबाइट से उबरने में कई महीने लग गए. लेकिन 1978 तक वे और एंडरसन फिर से प्रयास करने के लिए तैयार थे. उन्होंने लैरी न्यूमैन को तीसरे पायलट के रूप में शामिल किया और 11 सितंबर 1978 को, डबल ईगल II ने प्रेस्क आइल, मेन से उड़ान भरी.
ग्यारह मंजिला, हीलियम से भरा गुब्बारा पहले चार दिनों में अच्छी गति से आगे बढ़ा और तीनों पायलट हॉट डॉग. डिब्बाबंद सार्डिन खाकर अपना गुजारा करते रहे. यात्रा की एकमात्र वास्तविक परेशानी 16 अगस्त को आई. जब वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण डबल ईगल II को 20,000 फीट की ऊंचाई से खतरनाक रूप से 4,000 फीट की ऊंचाई तक नीचे आना पड़ा.
उन्होंने बैलास्ट सामग्री को गिरा दिया और जल्द ही फिर से सुरक्षित ऊंचाई पर पहुंच गए. उसी रात, वे आयरलैंड के तट पर पहुंचे और 17 अगस्त को इंग्लैंड के ऊपर से उड़ान भरते हुए पेरिस के ले बॉर्गेट फील्ड की ओर बढ़े, जो वह स्थान है. जहां चार्ल्स लिंडबर्ग ने 1927 में अटलांटिक महासागर के पार अकेले विमान उड़ान भरने के बाद लैंडिंग की थी. दक्षिणी इंग्लैंड के ऊपर, उनकी पत्नियां एक निजी विमान में गुब्बारे के इतने करीब से गुजरीं कि वे अपने पतियों को फ्लाइंग किस दे सकें.
यात्रा के अंत में थोड़ा सा रास्ता भटकने के बाद, वे 17 अगस्त को सूर्यास्त से ठीक पहले पेरिस से लगभग 50 मील पश्चिम में स्थित मिसेरे गांव के पास उतरे. उनकी 137 घंटे की उड़ान ने सहनशक्ति और दूरी के नए रिकॉर्ड बनाए. अमेरिकी पायलटों का स्वागत परिवार के सदस्यों और उत्साहित फ्रांसीसी दर्शकों ने किया, जो कार से उनके गुब्बारे का पीछा कर रहे थे. उस रात, 31 साल लैरी न्यूमैन, जो तीनों पायलटों में सबसे कम उम्र के थे. उनको अपनी पत्नी के साथ उसी बिस्तर पर सोने की अनुमति दी गई. इस पर चार्ल्स लिंडबर्ग ने पांच दशक पहले अपनी ऐतिहासिक अटलांटिक पार उड़ान के बाद सोया था.
1981 में जापान के बेन अब्रुज़ो, लैरी न्यूमैन, रॉन क्लार्क और रॉकी आओकी ने जापान के नागाशिमी से कैलिफ़ोर्निया के मेंडोकिनो राष्ट्रीय वन तक पहली ट्रांसपैसिफिक उड़ान भरी. अमेरिकी जो किटिंगर ने 1984 में अकेले अटलांटिक महासागर पार करने वाली गुब्बारे की उड़ान भरी. 1995 में, अमेरिकी स्टीव फॉसेट ने अकेले ट्रांसपैसिफिक उड़ान पूरी की.
गुब्बारे की उड़ान के अंतिम लक्ष्यों में से एक को 1999 में हासिल किया गया. जब स्विट्जरलैंड के बर्ट्रेंड पिकार्ड और अंग्रेज ब्रायन जोन्स ने हाइब्रिड हीलियम और गर्म हवा के गुब्बारे में दुनिया का पहला नॉन-स्टॉप चक्कर पूरा किया. उन्होंने स्विस आल्प्स से उड़ान भरी, दुनिया का चक्कर लगाया और 20 दिनों में 29,000 मील से अधिक की दूरी तय करके मिस्र में उतरे.
फिर, 2002 में, अमेरिकी साहसी स्टीव फॉसेट गर्म हवा के गुब्बारे में अकेले पूरी दुनिया का चक्कर लगाने वाले इतिहास के पहले व्यक्ति बने.
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