कैसे वापस होती है FIR? पुलिस ऑफिसर्स ने बताया- क्या फिर खत्म हो जाएगी प्रोटेस्टर्स की मुश्किल

FIR Withdrawal Process: जेनजी प्रोटेस्ट के खत्म होने के बाद भी एफआईआर वापस लेने का मामला अभी भी चर्चा में है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर एफआईआर को वापस लेना का प्रोसेस है क्या?

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एफआईआर वापस लेने के लिए भी एक प्रोसेस फॉलो करना होता है. (Photo: PTI) एफआईआर वापस लेने के लिए भी एक प्रोसेस फॉलो करना होता है. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:28 PM IST

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब चर्चा एफआईआर वापस लेने की है. अब कई सरकारों ने प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स पर दर्ज की गई एफआईआर को वापस लेने का फैसला किया है. लेकिन, इसी बीच सवाल ये है कि क्या पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज एफआईआर को आसानी से वापस लिया जा सकता है. अगर एफआईआर वापस ली जा सकती है तो उसका प्रोसेस क्या है और एफआईआर वापस लेने के बाद क्या आरोपी पूरी तरह फ्री हो जाते हैं? तो कुछ पुलिस अधिकारियों से ही जानते हैं कि आखिर इसका प्रोसेस है क्या...

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इस बारे में जानकारों का कहना है कि सरकार की घोषणा के बाद भी एफआईआर खुद से खत्म नहीं हो जाती है. हर एक मामले में पुलिस को पूरी कार्रवाई करनी होगी, जिसके बाद एक एफआईआर को निरस्त किया जा  सकता है. जिन मामलों में पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले, गंभीर चोट, दंगा और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान जैसी गंभीर धाराएं लगी हैं, उनमें अदालत की मंजूरी के बिना कार्रवाई संभव नहीं होगी. कोर्ट के जरिए पूरी तरह से एफआईआर को वापस लिया जा सकेगा. 

इस बारे में दिल्ली पुलिस के ऑफिसर ने बताया कि कोर्ट का आदेश ना आने तक और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होने तक एफआईआर का अस्तित्व बना रहता है. आमतौर पर दो तरीके से एफआईआर खत्म हो सकती है. या तो शासन यानी सरकार इसका फैसला ले और लिखित में बताए कि वो केस नहीं चाहती है, उसके बाद एफआईआर को वापस लिया जा सकता है. लेकिन, इस स्थिति में भी सरकारी वकील ये बात कोर्ट में रखेंगे, जहां से एफआईआर  कैंसिल हो जाएगी. इसके अलावा कोर्ट के आदेश पर एफआईआर  को रद्द किया जा सकता है. 

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साथ ही उन्होंने बताया कि अगर शासन भी एफआईआर खत्म करने के लिए राजी हो जाता है तो भी उसका पूरा प्रोसेस फॉलो करना होता है. इस केस में भी पुलिस को एक रिपोर्ट तैयार करनी होती है, जिसमें एफआईआर दर्ज होने से लेकर अंत तक पूरी रिपोर्ट बनानी होती है. हर एक एफआईआर पर रिपोर्ट बनती है और उसे कोर्ट में पेश किया जाता है, फिर एफआईआर निरस्त होती है. 

इस लेकर मध्य प्रदेश पुलिस के सीनियर ऑफिसर ने बताया कि जब भी एफआईआर निरस्त होने की बात होती है, तो पहले सरकार के कहने पर अभियोजन विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी. उसके बाद कोर्ट के जरिए एफआईआर को रद्द किया जाएगा. लेकिन, एक बार एफआईआर निरस्त हो जाती है तो आरोपी पर उसे लेकर कोई भी जांच या कार्रवाई पुलिस की ओर से नहीं की जाती है. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, एक बार एफआईआर दर्ज हो जाने के बाद, यह सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं रह जाता. यह स्टेट का मामला बन जाता है और केस का अंत अपराध की प्रकृति और कार्रवाई के चरण पर निर्भर करता है. 

- इसके अलावा पुलिस भी एफआईआर बंद करने के लिए सिफारिश कर सकती है. इस स्थिति में पुलिस अपनी जांच में बताती है कि कोई अपराध नहीं हुआ है या आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, तो वे मजिस्ट्रेट के समक्ष समापन रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं. इसके बाद कोर्ट को यह तय करना होता है कि वह रिपोर्ट स्वीकार करे या नहीं. 

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- वहीं कुछ अपराधों को समझौता योग्य अपराधों की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि पक्षकार विवाद का निपटारा कर सकते हैं. ऐसे मामलों में, कोर्ट आपराधिक कार्रवाई को समाप्त करते हुए मामले को समझौते के माध्यम से निपटाने की अनुमति दे सकता है. 

- कोर्ट के पास एफआईआर को रद्द करने का अधिकार है. ऐसा तब हो सकता है जब पक्षकारों ने विवाद का निपटारा कर लिया हो या जब कोर्ट को लगे कि आपराधिक कार्रवाई जारी रखना कानूनी रूप से उचित नहीं है. 
 

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