दुनिया के इन 5 इलाकों में 100 साल तक जीते हैं लोग, इन 5 Blue Zones का क्या है राज

दुनिया के पांच ब्लू जोन्स में रहने वाले लोगों की लंबी उम्र को लेकर काफी चर्चा होती है. जानिए इन जगहों के लोगों की डाइट, रोजमर्रा की आदतों और लाइफस्टाइल में ऐसा क्या खास है.

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इन इलाकों में रहने वाले लोगों की डाइट में सब्जियां, फल, बीन्स, दालें, चने, साबुत अनाज और नट्स जैसी चीजें काफी ज्यादा होती हैं. ( Photo: ITG) इन इलाकों में रहने वाले लोगों की डाइट में सब्जियां, फल, बीन्स, दालें, चने, साबुत अनाज और नट्स जैसी चीजें काफी ज्यादा होती हैं. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:27 AM IST

दुनिया में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां लोगों के 90 साल या उससे ज्यादा उम्र तक जीने के मामले आम हैं. इन इलाकों में 100 साल की उम्र पार करने वाले लोग भी बड़ी संख्या में मिलते हैं. खास बात यह है कि इनमें से कई लोग उम्र बढ़ने के बावजूद काफी एक्टिव और हेल्दी रहते हैं. इन्हीं जगहों को ‘ब्लू जोन’ (Blue Zones) कहा जाता है. लेकिन सवाल है कि आखिर इन जगहों के लोग बाकी दुनिया के लोगों से ज्यादा लंबी जिंदगी कैसे जी लेते हैं? क्या इसके पीछे कोई खास खाना है, कोई खास जगह या फिर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का तरीका? दरअसल, इसकी वजह कोई एक चीज नहीं बल्कि कई छोटी-छोटी आदतों का मेल माना जाता है. 

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क्या होता है ब्लू जोन?
‘ब्लू जोन’ उन इलाकों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जहां लोगों के बहुत लंबी उम्र तक जीने के मामले असामान्य रूप से ज्यादा पाए गए हैं. इस शब्द को रिसर्चर और लेखक डैन ब्यूटनर ने लोकप्रिय बनाया था. इन इलाकों की पहचान करते समय नक्शे पर नीले रंग के घेरे बनाए गए थे, इसलिए इन्हें ब्लू जोन कहा गया.  दुनिया में पारंपरिक तौर पर पांच ब्लू जोन बताए जाते हैं. इनमें इकारिया (ग्रीस), ओग्लियास्त्रा (सार्डिनिया, इटली), ओकिनावा (जापान), निकोया पेनिनसुला (कोस्टा रिका) और लोमा लिंडा (कैलिफोर्निया, अमेरिका) शामिल हैं. भारत इन पांच पारंपरिक ब्लू जोन में शामिल नहीं है. 

इन जगहों के खाने में क्या खास है?
इन इलाकों में रहने वाले लोगों की डाइट में सब्जियां, फल, बीन्स, दालें, चने, साबुत अनाज और नट्स जैसी चीजें काफी ज्यादा होती हैं. यानी उनके खाने में नेचर और पौधों से मिलने वाली चीजों की हिस्सेदारी ज्यादा रहती है. इसके मुकाबले मांस का सेवन आमतौर पर कम होता है. हालांकि कुछ ब्लू जोन खासकर इकारिया और सार्डिनिया में लोग मछली भी खाते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि कोई एक खास खाना खाने से उम्र लंबी हो जाएगी. असल बात लंबे समय तक संतुलित और साधारण खान-पान की आदत से जुड़ी है.

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पेट भरने से पहले खाना रोक देते हैं
ओकिनावा के लोगों की एक पुरानी आदत को ‘हारा हाची बू’कहा जाता है. इसका आसान मतलब है कि पेट को पूरी तरह भरने के बजाय करीब 80 फीसदी पेट भरने पर खाना रोक देना. यानी प्लेट में खाना खत्म करना या पेट को पूरी तरह भरना जरूरी नहीं माना जाता. ओकिनावा में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, हालांकि आज वहां की जीवनशैली में भी काफी बदलाव आया है. 

इनके लिए एक्सरसाइज का मतलब सिर्फ जिम नहीं
ब्लू जोन के लोगों की जिंदगी में शारीरिक मेहनत किसी अलग एक्सरसाइज की तरह नहीं, बल्कि रोजमर्रा के कामों का हिस्सा होती है. वे पैदल चलते हैं, बागवानी करते हैं, खेती करते हैं, घर के काम करते हैं और दिनभर किसी न किसी तरह शरीर को चलाते रहते हैं. यानी घंटों जिम में पसीना बहाने के बजाय उनका शरीर सामान्य कामों के दौरान ही एक्टिव रहता है. सार्डिनिया जैसे इलाकों में पहाड़ी रास्तों पर चलना और खेती करना भी रोज की जिंदगी का हिस्सा रहा है. इस तरह की लगातार हल्की शारीरिक मेहनत उम्र बढ़ने के साथ शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है.

सिर्फ खाना नहीं, परिवार और दोस्त भी जरूरी
लंबी जिंदगी का कनेक्शन सिर्फ डाइट और एक्सरसाइज से नहीं है. इन इलाकों में परिवार और समाज से जुड़े रहना भी जिंदगी का अहम हिस्सा है. कई जगहों पर बुजुर्ग लोग अपने परिवार और समुदाय के साथ जुड़े रहते हैं. कई पीढ़ियां एक-दूसरे के करीब रहती हैं. इससे उन्हें अकेलापन कम महसूस होता है और जरूरत पड़ने पर भावनात्मक और व्यावहारिक मदद भी मिलती है. 

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जिंदगी में कोई मकसद होना भी मायने रखता है
ब्लू जोन में रहने वाले लोगों में एक और बात अक्सर देखने को मिलती है. उनके पास सुबह उठने की कोई वजह या जिंदगी में कोई उद्देश्य होता है. यह उद्देश्य परिवार की जिम्मेदारी हो सकता है, खेती-बागवानी हो सकती है, समुदाय के लिए काम करना हो सकता है या कोई ऐसी चीज जिसे वे रोज करना पसंद करते हैं. रिसर्च में भी जिंदगी में उद्देश्य होने को बेहतर मानसिक स्थिति और लंबी उम्र से जोड़ा गया है.

नींद और आराम को भी देते हैं महत्व
इन इलाकों में पर्याप्त आराम और नींद भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. इकारिया और सार्डिनिया जैसे इलाकों में दोपहर में आराम करने की परंपरा भी देखने को मिलती है. यानी लंबी उम्र का राज सिर्फ लगातार काम करते रहना नहीं है. शरीर को आराम देना भी उतना ही जरूरी माना जाता है. 

क्या सिर्फ जीन्स की वजह से लोग ज्यादा जीते हैं?
किसी व्यक्ति की उम्र पर उसके जीन्स का असर जरूर होता है, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक सिर्फ जेनेटिक्स ही पूरी कहानी नहीं बताते. रिसर्च में जीवनशैली और आसपास के वातावरण की भी बड़ी भूमिका मानी गई है. यही वजह है कि ब्लू जोन पर होने वाली रिसर्च किसी एक ‘जादुई’ खाने या एक खास आदत को लंबी उम्र का राज नहीं बताती.

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बल्कि खान-पान, रोज की फिजिकल एक्टिविटी, अच्छी नींद, परिवार से जुड़ाव और जिंदगी में उद्देश्य जैसी कई चीजों का साथ मिलकर असर पड़ता है. यानी ब्लू जोन की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबी जिंदगी के लिए कोई एक शॉर्टकट नहीं है. रोज की छोटी-छोटी अच्छी आदतें लंबे समय में बड़ा फर्क पैदा कर सकती हैं.

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