बैंकों की तिजोरियां या सेफ डिपॉजिट लॉकर ऐसी सुरक्षित जगह होती है जहां ग्राहक अपनी कीमती चीजों को सुरक्षित रखते हैं. यह बैंकिंग स्ट्रक्चर का एक अनिवार्य हिस्सा होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि बैंक के लॉकर आखिर किस हद तक सुरक्षित हैं?
अगर चोरी या डकैती जैसी स्थिति में अपराधी इस लॉकर को ही उठाकर लेते चले जाएं, तो क्या होगा? चलिए जानते हैं कि ये लॉकर आखिर किस चीज के बने होते हैं और इन्हें खोल पाना या तोड़ना आसान क्यों नहीं होता है.
क्यों नामुमकिन है लॉकर का ताला खोलना
बैंकों के लॉकर सबसे पहले तो मजबूत स्ट्रॉन्ग रूम में हाई सिक्योरिटी एरिया में होते हैं. वहां से इन्हें निकाल पाना ही मुश्किल होता है. अगर इन लॉकरों में से किसी एक को भी चोर उठाकर ले जाते हैं तो इन्हें खोलना नामुमकिन हैं. क्योंकि, ये लॉकर डुअल कंट्रोल सिस्टम से लॉक रहते हैं. यानी इन लॉकरों को खोलने के लिए एक साथ दो अलग- अलग चाबियों की जरूरत होती है.
एक मास्टर की होता है जो बैंक के अधिकारी के पास रहता है. वहीं दूसरी चाबी ग्राहक के पास होती है. इसे कस्टमर की कहते हैं. जब दोनों चाबियां एक साथ नहीं लगाई जाए, तब तक इसे खोलना नामुमकिन है. इसके अलावा इनमें टाइम लॉक और बॉयोमेट्रिक भी लगा होता है.
किस चीज का बना होता है लॉकर
ताला नहीं खुलने पर लॉकर को काटने की कोशिश भी बेकार साबित हो सकती है. क्योंकि, यह इस तरह के मटेरियल से बना होता है कि इस पर गैस कटर, ड्रिल मशीन या और भी कोई भारी औजार का कोई असर नहीं होता. क्योंकि, यह काफी सख्त और मजबूत स्टील से बनी होती है. इसे आरएसएस मटेरियल यानी रिइंफोर्स्ड स्टेनलेस स्टील कहते हैं.
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इसके अलावा इसमें टफ एल्युमिनियम और हार्डेन स्टील भी मिलाया जाता है. इस तरह से बने धातु सख्त से सख्त स्टील और लोहे से कई गुना ज्यादा मजबूत होता है. इन पर किसी भी गैस कटर या ड्रिल मशीन का कोई असर नहीं होता है.
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