कनाडा की 76 साल की साहित्यकार... ऐनी कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल

कनाडा की 76 साल की साहित्यकार ऐनी कार्सन को साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया. वह अपनी अनोखी लेखनशैली के लिए जानी जाती हैं. उनकी रचना में कहानी, कविता और लेख तीनों का अनोखा मेल दिखाई देता है.

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कनाडा की साहित्यकार एना कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार (Photo - Reuters) कनाडा की साहित्यकार एना कार्सन को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार (Photo - Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:34 PM IST

कनाडा की कवयित्री, निबंधकार और अनुवादक ऐनी कार्सन को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. 76 साल की कार्सन अपनी ऐसी रचनाओं के लिए जानी जाती हैं, जिनमें प्राचीन यूनान और रोम की कहानियां आधुनिक दुनिया से जुड़ती दिखाई देती हैं. उनकी खासियत यह है कि उनकी रचनाओं में कविता, निबंध और कहानी जैसी अलग-अलग विधाएं एक साथ मिलती हैं.

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स्वीडिश अकादमी ने कार्सन के लेखन की इसी अनोखी शैली को सम्मान दिया है. वह प्राचीन साहित्य और आधुनिक विचारों को अपने अलग अंदाज में जोड़ती हैं. उनकी कई रचनाएं ऐसी हैं, जिनमें कविता और गद्य के बीच की सीमाएं साफ नजर नहीं आतीं.

नोबेल का फोन आया तो आइसलैंड में थीं
इस साल साहित्य का नोबेल मिलने की खबर खुद ऐनी कार्सन के लिए भी किसी सरप्राइज से कम नहीं थी. जब स्वीडिश अकादमी ने उन्हें फोन किया, तब वह आइसलैंड में थीं और हवा की आवाज सुन रही थीं.

स्वीडिश अकादमी की स्थायी सचिव इनग्रिड कार्लबर्ग के मुताबिक, कार्सन इस खबर से बेहद हैरान थीं. पुरस्कार की घोषणा स्टॉकहोम में की गई. कार्सन का जन्म कनाडा के टोरंटो में हुआ था. वह कई उत्तर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में क्लासिक्स यानी प्राचीन यूनानी-रोमन साहित्य पढ़ा चुकी हैं. वह अपने पति रॉबर्ट करी के साथ आइसलैंड में रहती हैं और दोनों को 2022 में वहां की नागरिकता मिली थी.

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प्राचीन यूनान से लेकर मर्लिन मुनरो तक
ऐनी कार्सन की किताबों का दायरा काफी बड़ा है. उनकी चर्चित किताबों में 'इरोज द बिटरस्वीट' शामिल है, जिसमें उन्होंने प्राचीन यूनानी साहित्य में प्रेम, इच्छा और उससे जुड़े सुख-दुख को समझने की कोशिश की.

उनकी एक अन्य चर्चित रचना 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड 'है. वहीं 'मैन इन द ऑफ आवर्स' कविता और गद्य का संग्रह है, जिसे 2001 में कनाडा का ग्रिफिन प्राइज फॉर पोएट्री मिला था.

कार्सन ने नॉरमा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय में हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो की तुलना प्राचीन यूनानी कहानी की हेलेन ऑफ ट्रॉय से की है. यानी उनके लेखन में हजारों साल पुरानी कहानियां और आधुनिक दुनिया के किरदार एक साथ नजर आते हैं.

प्राचीन साहित्य का अनुवाद भी किया
ऐन कार्सन सिर्फ अपनी कविताओं और निबंधों के लिए ही मशहूर नहीं हैं. उन्होंने प्राचीन यूनानी साहित्य की कई महत्वपूर्ण रचनाओं का अनुवाद भी किया है.

इनमें यूनानी कवयित्री सैफो की कविताओं के टुकड़ों पर आधारित इफ नॉट, विंटर और सोफोक्लीज के नाटक इलेक्ट्रा और एंटीगनी शामिल हैं. उन्होंने यूरिपिडीज की बक्खाई का भी अनुवाद किया. स्वीडिश अकादमी के मुताबिक, कार्सन के ये अनुवाद सिर्फ अनुवाद भर नहीं हैं, बल्कि इन्हें अपने आप में स्वतंत्र साहित्यिक रचनाओं के तौर पर भी देखा जा सकता है.

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नोबेल साहित्य समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने कार्सन के लेखन को शब्दों के प्रति एक विद्वान की गहरी रुचि और कवि की नए अर्थ तलाशने की इच्छा के मेल के तौर पर बताया.

भाई की मौत पर लिखी किताब भी काफी खास
कार्सन ने अपनी निजी जिंदगी को भी लेखन का हिस्सा बनाया है. 2010 में प्रकाशित उनकी किताब नॉक्स उनके भाई माइकल को समर्पित थी. माइकल लंबे समय तक कार्सन की जिंदगी से दूर रहे थे और बाद में उनकी मौत हो गई. कार्सन ने इस अनुभव को एक बेहद अलग तरीके से किताब में पेश किया.

इसमें तस्वीरें, चिट्ठियां और लिखे हुए दस्तावेज एक साथ शामिल हैं. इसके साथ उन्होंने रोमन कवि कैटुलस की अपने भाई के लिए लिखी शोक कविता का अनुवाद भी किया.

2024 की किताब में अपनी जिंदगी की झलक
कार्सन की हालिया चर्चित रचनाओं में 2024 में आई रॉन्ग नॉरमा भी शामिल है. इसमें अलग-अलग तरह की रचनाएं हैं और उनके साथ कार्सन के हाथ से बनाए गए चित्र भी हैं. इस किताब में द पेरिस रिव्यू और द न्यू यॉर्कर जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित सामग्री भी शामिल है.

इसी साल उन्होंने लंदन रिव्यू ऑफ बुक्स में अपनी सेहत से जुड़ा एक निजी अनुभव भी साझा किया था. उन्होंने बताया था कि उन्हें पार्किंसन बीमारी का पता चला है. इस बीमारी के कारण उनकी लिखावट में भी बदलाव आया और उनके लिए हाथ से लिखना मुश्किल होता गया.

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साहित्य का नोबेल क्यों है खास?
साहित्य का नोबेल अक्सर ऐसे लेखकों को दुनिया के सामने लाता है, जिनके नाम आम पाठकों के लिए उतने परिचित नहीं होते. लेकिन ऐन कार्सन पहले से ही साहित्य की दुनिया में काफी चर्चित नाम हैं.

उनके लेखन की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह अलग-अलग समय, विचार और साहित्यिक शैलियों को एक साथ जोड़ती हैं. प्राचीन यूनानी कवियों से लेकर आधुनिक लेखकों तक का प्रभाव उनकी रचनाओं में दिखाई देता है. 

इस साल के साहित्य नोबेल के साथ कार्सन को 1 करोड़ 20 लाख स्वीडिश क्रोनर की पुरस्कार राशि भी मिलेगी, जो करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर है.अब 2026 के नोबेल पुरस्कारों में अगली बड़ी घोषणा शांति पुरस्कार की होगी, जिसका ऐलान शुक्रवार को किया जाएगा. आर्थिक विज्ञान के नोबेल की घोषणा सोमवार को होगी.

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