केदारनाथ धाम की बदली तस्वीर, 29 अप्रैल को खुलेंगे कपाट

प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ का स्वरूप पूर्णतः बदल गया है. इन दिनों केदारनाथ में जोर शोर से कार्य चल रहे हैं. केदारनाथ मंदिर से आधा किमी दूर तक पैदल मार्ग को पूर्ण रूप से 50 फिट चौड़ा किया गया है.

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केदारनाथ धाम केदारनाथ धाम

वरुण शैलेश

  • देहरादून,
  • 31 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 6:00 PM IST

उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदा के बाद से सरकारों ने केदारनाथ धाम में व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने को लेकर अपना ध्यान शुरू से ही केंद्रित रखा है. तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा हों या फिर हरीश रावत, हर कोई बस यही चाहता था कि केदारनाथ को लेकर तीर्थ यात्रियों के मन में एक अच्छी तस्वीर उभरकर सामने आए. तीर्थयात्रियों के लिए केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल से खुलेंगे.

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समय बदलने के साथ दिल्ली में और उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने भी केदारनाथ को प्राथमिकता देते हुए यहां काम करना शुरू कर दिया. खुद मोदी ने सर्वप्रथम केदारनाथ के विकास के लिए कदम आगे बढ़ाया. यही वजह है कि इस काम को पूरा करने में जहां PMO जुटा हुआ है वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड सरकार ने भी दिन-रात एक करके केदारपुरी को नया स्वरूप देना शुरू कर दिया है.

केदारनाथ के होंगे अब सीधे दर्शन

के तहत केदारनाथ का स्वरूप पूर्णतः बदल गया है. इन दिनों केदारनाथ में जोर शोर से कार्य चल रहे हैं. केदारनाथ मंदिर से आधा किमी दूर तक पैदल मार्ग को पूर्ण रूप से 50 फिट चौड़ा किया गया है. पैदल मार्ग के दायरे में आने वाले सभी भवनों और दुकानों को तोड़ा गया है. अब आधा किमी दूर से ही बाबा का मंदिर दिखाई दे रहा है. इस पैदल मार्ग पर स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पत्थरों को लगाया जा रहा है. इसके अलावा केदारनाथ मंदिर के आगे एवं पीछे के पसिर को भी काफी चौड़ा किया गया है. चौड़ाई बढ़ने से मंदिर बदले स्वरूप में नजर आ रहा है.

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चौड़े परिसर में रुक सकते हैं अब हज़ारों यात्री

मंदिर के परिसर की चौड़ाई बढ़ने से हजारों यात्री मंदिर परिसर में ही ठहर सकते हैं. केदारनाथ पैदल मार्ग का चौड़ीकरण प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है.प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद ही पैदल मार्ग का चौड़ीकरण हुआ है. पैदल मार्ग का चौड़ीकरण का मुख्य उददेश्य तीर्थ यात्रियों को दूर से ही मंदिर के दर्शन कराना है, जिससे तीर्थ यात्री दूर से ही मंदिर को देखें और उन्हें थकान का अहसास न हो.

वैसे तो प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार नज़र बनाए हुए हैं. मगर PMO से भी सीधी नज़र रखी जा रही है ताकि काम में किसी भी प्रकार की कमी को देखकर तुरंत निर्देश दिए जा सकें.

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