दिल्ली के बाद लखनऊ की हवा भी जहरीली, कूड़ा जलाने पर दर्ज होगा मुकदमा

लखनऊ में रविवार की रात नौ बजे पीएम 2.5 की मात्रा 315.76 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी, लेकिन सोमवार को यह 715.60 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई. यह स्थिति कोहरा पड़ने के कारण हुई है.

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लखनऊ में लोग स्मॉग से परेशान हैं लखनऊ में लोग स्मॉग से परेशान हैं

रणविजय सिंह

  • लखनऊ,
  • 14 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:14 PM IST

दिल्ली के बाद अब यूपी की राजधानी लखनऊ में लोग स्मॉग से परेशान हैं. प्रदूषण ने सोमवार को सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 मानक से लगभग 12 गुना अधिक पहुंच गया. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मॉनीटरिंग में रात नौ बजे तक पीएम 2.5 की मात्र 715.60 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड की गई, जो अब तक सबसे ज्यादा है.

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कोहरे से हालात बिगड़े

लखनऊ में रविवार की रात नौ बजे पीएम 2.5 की मात्रा 315.76 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी, लेकिन सोमवार को यह 715.60 माइक्रोग्राम तक पहुंच गई. यह स्थिति कोहरा पड़ने के कारण हुई है. तापमान में गिरावट, वातावरण में नमी व हवा की रफ्तार शून्य होने से स्थिति और खराब हो गई है. प्रदूषित कणों ने कोहरे से मिलकर हवा जहरीली बना दी है. यह बुजुर्गों, बच्चों व सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है.

चार दिन पहले भी खराब हुई थी हवा

चार दिन पहले भी  बहुत की खतरनाक स्थिति में पहुंच गई थी. हवा न चलने व वातावरण में नमी के कारण एक्यूआई 468 माइक्रोग्राम तक रिकॉर्ड किया गया था. इससे लोगों के आंखों में जलन की समस्या शुरू हो गई थी. लेकिन दो दिन बाद हवा चलनी शुरू हुई तो धुंध भी छट गई और लोगों को राहत मिल गई. लेकिन सोमवार को सुबह कोहरा पड़ने से प्रदूषण की स्थिति को बहुत की खतरनाक बना दिया। दिन में एक बजे के आसपास पीएम 2.5 की मात्र 715.60 माइक्रोग्राम तक रिकार्ड किया गया था.

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पानी का होगा छिड़काव

लखनऊ में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सड़कों पर छिड़काव कराया जाएगा. इसका प्रस्ताव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से निर्माण व विकास कार्य कर रही संस्थाओं को दिया जाएगा. इसे लेकर मंगलवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक भी बुलाई गई है. उनके सामने भी इस प्रस्ताव को रखा जाएगा. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण कम करने का यह सबसे कारगर उपाय है. सड़कों पर दिन में दो बार छिड़काव हो जाए तो धूल उड़ने नहीं पाएगी और आद्रता बढ़ने पर हवा में घूम रहे कण नीचे जमीन पर आने लगेंगे.

लखनऊ नगर निगम ने जारी की गाइडलाइन   

- कूड़ा जलाने पर लगाई रोक

- कूड़ा जलाने पर जुर्माना और मुकदमें की कार्यवाही  

- नालों में कूड़ा डालने वाले सफाइ कर्मियों पर कार्रवाही के आदेश

- निर्माण एजेंसियों को निर्माण अवशेष ढंकने की नसीहत

- दो बार पानी के छिड़काव की सलाह

बता दें, 7 नवंबर को नासा ऑब्जर्वेटरी ने कुछ तस्वीरें जारी की थीं, जिसमें दिल्ली समेत उत्तर भारत और पाकिस्तान में स्मॉग का कहर साफ दिखाई दे रहा है. नासा के मॉडरेट रेजोल्युशन इमेजिंग स्पेक्ट्रोरेडिओ मीटर (MODIS) ने एक्वा सैटेलाइट के जरिए यह तस्वीर खींची है. इस तस्वीर में उत्तर भारत और पाकिस्तान के ऊपर भारी धुंध नजर आ रही है. वहीं, दूसरी तस्वीर एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ यानि की हवा में मौजूद प्रदूषित कण दिखा रही है. जिसके अनुसार दिल्ली, कानपुर, लखनऊ समेत पंजाब और हरियाणा के कई शहरों में भारी स्मॉग मौजूद है.

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दिल्ली की हवा भी जहरीली

बता दें, दिल्ली एनसीआर में भी प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ गया है. दिल्ली में हालात कितने खराब हैं इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि पर्यावरण एजेंसियों ने यहां की हवा को खतरनाक बताया है. उनका कहना है कि इस हवा से शरीर को काफी नुकसान हो सकता है.

2016 में भी छाया था स्मॉग

इससे पहले नवंबर 2016 में भी दिल्ली समेत यूपी के अधिकांश क्षेत्रों में स्मॉग का कहर देखा गया था। उस वक्त भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ में छाई धुंध को गंभीर समस्या बताया था. उस वक्त इस मामले पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब भी किया था. कोर्ट ने सरकार को इस समस्या से निजाद पाने के लिए सारे जरूरी कदम उठाने को कहा था.

कैसे बनता है स्मॉग

सर्दियों के मौसम में कोहरा गिरता है. हवा में मौजूद धूल इस कोहरे से चिपक जाती है, जिससे स्मॉग बनता है. जैसे-जैसे हवा में धूल के कण बढ़ते जाते हैं, उससे स्मॉग की परत और मोटी होती जाती है. इसे ही पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है.

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