पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापड़ा इलाके से एक गंभीर मामला सामने आया है. दरअसल, यहां यहां तृणमूल कांग्रेस TMC के कार्यकर्ता और पूर्व पार्षद के पति बिरजू केओट की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है.
परिजनों ने पुलिस पर बेरहमी से पीटने और प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है. इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक बवाल मच गया है. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सीधे तौर पर पुलिस और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े किए हैं.
मृतक बिरजू केओट की पत्नी और कांचरापड़ा नगरपालिका के वार्ड नंबर 23 की पूर्व पार्षद जेनी शर्मा केओट ने बताया कि उन्होंने कल रात 9:00 बजे अपने पति से मुलाकात की थी, तब वे बिल्कुल ठीक थे. लेकिन उसके बाद जांच अधिकारी ने उन्हें बेरहमी से पीटा और टॉर्चर किया. इससे पुलिस लॉकअप के अंदर उनकी तबीयत बिगड़ गई. बाद में उन्हें कल्याणी के जेएनएम JNM अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बिरजू की तबीयत बिगड़ने या अस्पताल ले जाने की कोई सूचना तक नहीं दी. पत्नी का यह भी दावा है कि बिरजू के शरीर पर चोट और खून के गहरे निशान थे. उन्हें रस्सी से बांधकर पीटा गया था. वे अब इस मौत के लिए न्याय की मांग कर रही हैं.
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एक्सटॉर्शन-भ्रष्टाचार के मामले में हुए थे गिरफ्तार
इससे पहले शुक्रवार सुबह हल्लीसहर पुलिस ने कथित तौर पर एक्सटॉर्शन और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में संलिप्तता के आरोप में बिरजू को गिरफ्तार किया था. मेडिकल जांच के बाद उन्हें बैरकपुर सब-डिवीजन कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था. हिरासत के दौरान ही देर रात उनकी तबीयत बिगड़ गई थी.
पुलिस हिरासत में बिरजू की मौत के बाद राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है. टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं.
अभिषेक बनर्जी ने अपने पोस्ट में लिखा, 'बिरजू केओट. उनका नाम एफआईआर में नहीं था, फिर भी उन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने पकड़ा. हिरासत में उनकी मौत हो गई. उनका परिवार पुलिस द्वारा की गई भारी मारपीट का आरोप लगा रहा है. इसे दोबारा पढ़ें. जब राज्य किसी ऐसे व्यक्ति को हिरासत में ले सकता है जिसका नाम एफआईआर में भी नहीं है और वह जिंदा बाहर नहीं आता तो यह सवाल सिर्फ कानून और व्यवस्था का नहीं रह जाता, बल्कि यह सीधे तौर पर रुल ऑफ लॉ पर सवाल है.
उन्होंने आगे कहा कि जब पुलिस ही डर का सोर्स बन जाए, तो नागरिकों की रक्षा कौन करेगा?
बिजपुर विधानसभा क्षेत्र से स्थानीय भाजपा विधायक सुदीप्त दास ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मृत व्यक्ति स्थानीय टीएमसी नेता कमल अधिकारी का करीबी सहयोगी था. उन्होंने कहा कि पुलिस जांच के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल पाएगा. अगर परिवार को किसी भी प्रकार की सहायता चाहिए, तो वे हरसंभव मदद करेंगे.
वहीं, टीएमसी नेता अमित गुप्ता ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए पुलिस हिरासत में हुई मौत पर सवाल उठाया है और कड़ी जांच की मांग की है. फिलहाल इस मामले पर पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है.
कोलकाता से दीपक देबनाथ का इनपुट...
अनुपम मिश्रा