मोदी के मिशन पर पासवान को अंदेशा-बैन हुई प्लास्टिक तो जाएंगी नौकरियां!

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि प्लास्टिक बोतल की इंडस्ट्री से काफी लोगों को रोजगार मिलता है. ऐसे में बगैर इसका विकल्प ढूंढे प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा.

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केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान. (फाइल फोटो-पीटीआई) केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान. (फाइल फोटो-पीटीआई)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:03 PM IST

  • प्लास्टिक की बोतलों का विकल्प ढूंढ रही सरकार
  • सरकार चाहती है कि रोजगार पर न पड़े बैन का असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब से सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम छेड़ने की अपील की है तब से इससे जुड़ी इंडस्ट्री में हलचल मच गई है. प्लास्टिक की बोतलों पर भी बैन लगने की आशंकाओं के बीच अब केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि जब तक इनका कोई उपयुक्त विकल्प नहीं ढूंढ लिया जाता तब तक प्रतिबंध नहीं लगेगा.

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इकोनॉमिक टाइम्स से राम विलास पासवान ने कहा कि इस इंडस्ट्री से भारी संख्या में रोजगार जुड़ा है. बैन तभी प्रभावी होगा, जब हमारे पास उचित विकल्प होगा और नौकरियों का नुकसान रोकने का भी उपाय होगा.

उन्होंने कहा," पानी की पैकेजिंग के लिए उपयुक्त विकल्प ढूंढा जा रहा है. इंडस्ट्री से सुझाव मांगे जा रहे हैं. हमने कुछ विकल्पों पर विचार विमर्श करना शुरू किया है. हम पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक की पैकेजिंग के लिए भी प्रोत्साहित कर सकते हैं."

हालांकि, पासवान ने कहा कि कम्पोस्टेबल प्लास्टिक विकल्प जरूर है, मगर यह महंगा प्लास्टिक है. लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से इसकी कीमत कम हो सकती है. उन्होंने बताया कि कम्पोस्टेबल प्लास्टिक की बोतलों की  कीमत सामान्य प्लास्टिक के बोतल से डबल हो जाती है. उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो(BIS) की ओर से पहले  से ही कंपोस्टेबल प्लास्टिक के लिए मानक तय कर दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि कानून PET बोतलों का फिर से उपयोग की अनुमति नहीं देता. अगर रीसाइकिल्ड पेट बोतलों के इस्तेमाल को अनुमति मिलती है तो फिर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और बीआईएस को नए नियम बनाने होंगे.

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PET पैकेजिंग एसोसिएशन ने क्या कहा

PET पैकेजिंग एसोसिएशन फॉर क्लीन एंवायरमेंट ने बुधवार को अखबारों में विज्ञापन देकर इस मामले में अपना पक्ष रखा है. एसोसिएशन ने कहा है कि भारत में बनाए 90 प्रतिशत PET बॉटल को रीसाइकल किया जाता है. देश में 70 लाख से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय PET उद्योग में आर्थिक रूप से जुडे़ हुए हैं. संगठन ने कहा कि पेट सुरक्षित है. PET में कोई थेलेट्स आदि भारी धातु नहीं है. पेट हल्का है. उत्सर्जन कम करता है और ईंधन बचाता है. इसमें वैश्विक तापमान बढ़ाने की क्षमता कम है. अतः पर्यावरण के लिए अनुकूल है. पेट कार्बन फुलप्रिंट कम करता है. पर्यावरण के लिए अनुकूल है. अन्य विकल्पों की तुलना में 50 प्रतिशत किफायती है. विश्व स्तर पर सबसे ज्यादा भारत PET रीसाइक्लिंग करने वाले देशों मे एक है.

क्या है PET बोतल

ऐसे बोतल, जिनमें पानी आदि पेय पदार्थों की पैकेजिंग होती है, उन्हें पेट बोतल कहते हैं. बोतलबंद पेय पदार्थों का देश में लगातार प्रयोग बढ़ने से इंडस्ट्री का आकार भी बढ़ रहा है. एक सर्वे के मुताबिक देश में करीब 70 प्रतिशत PET बोतलों की रिसाइकिलिंग हो जाती है. 2017 में ही इस उद्योग का आकार 3,500 करोड़ रुपये सालाना का हो गया था.

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