1968 में एनडी तिवारी की उज्ज्वला से पहली मुलाकात, 46 साल बाद हुई शादी

कभी देश के कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाने वाले नारायण दत्त तिवारी की राजनीति से इतर निजी जिंदगी बेहद रंगीन रही, लेकिन उन्हे कई विवादों का सामना करना पड़ा. तिवारी की पत्नी उज्ज्वला से पहली मुलाकात उनके पिता के घर हुई थी.

Advertisement
एनडी तिवारी और उज्ज्वला (इंडिया टुडे आर्काइव) एनडी तिवारी और उज्ज्वला (इंडिया टुडे आर्काइव)

सुरेंद्र कुमार वर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 5:50 PM IST

90 के दशक तक उत्तर प्रदेश की सियासत में बड़ा कद रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी का निधन उनके अपने ही जन्मदिन के दिन हो गया, लेकिन राजनीति से परे उनका निजी जीवन बेहद विवादों में रहा खासकर जीवन के 80 वसंत देखने के बाद. लंबी चली कानूनी लड़ाई के बाद उन्होंने 88 साल की उम्र में दूसरी शादी की.

Advertisement

जवानी के दिनों में अपनी रंगीनमिजाजी के लिए मशहूर एनडी तिवारी को अपने जीवन के 80वें दशक के अंतिम दौर में उस समय सबसे मुश्किल दौर का सामना करना पड़ा जब रोहित शेखर नाम के युवा ने तिवारी के खिलाफ पितृत्व का केस कर दिया और उन्हें अपना जैविक पिता माना. कोर्ट ने इसके लिए तिवारी का डीएनए सैंपल टेस्ट लेने का आदेश दिया जिसके लिए काफी नानुकूर करने के बाद उन्हें यह सैंपल देना पड़ा. तिवारी की उज्ज्वला शर्मा से पहली मुलाकात आज से करीब 50 साल पहले हुई थी.

1968 में हुई थी पहली मुलाकात

रोहित शेखर की मां उज्‍ज्‍वला शर्मा की तिवारी से पहली मुलाकात 1968 में अपने पर हुई थी तब वह उम्र के तीसरे दशक में थीं. उस वक्त तिवारी युवा कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उज्‍ज्‍वला के पिता प्रो. शेर सिंह अविभाजित पंजाब में प्रताप सिंह कैरों के मुख्यमंत्रित्व काल में उप-मंत्री रहे थे. 1967-80 में वे शिक्षा और रक्षा उत्पादन मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री बने.

Advertisement

उज्‍ज्‍वला और उनके पति बीएल शर्मा ने जब अलग होने का फैसला किया तो उनके गर्भ में बड़ा बेटा सिद्धार्थ आ चुका था. जैसा कि वे कहती हैं, 'मेरे और शर्मा जी (पति बीएल शर्मा) के बीच बहुत सामंजस्य नहीं था इसलिए हमने अलग होने का फैसला किया.' जब वे तिवारी से मिलीं तब दिल्ली विवि में संस्कृत पढ़ाती थीं. यह नाजुक युवा लड़की तिवारी की निगाह में आ गई.

अपनी निगाह को दृढ़ता से फर्श के कालीन पर जमाए हुए उज्‍ज्‍वला याद करती हैं, 'धीरे-धीरे हमारा परिचय बढ़ा और उनके प्रणय निवेदन शुरू हो गए.'' उन्होंने कहा, ''तुम एकाकी जीवन जी रही हो.'' वे सादगीपूर्ण गरिमा के साथ बताती हैं, 'अंततः 1977 में मैं उनके साथ अंतरंग संबंध बनाने को तैयार हुई, जिसके लिए वे पिछले 6-7 साल से कोशिश कर रहे थे.'

2008 में सामने आया मामला

मामले की शुरुआत 2008 में हुई जब एनडी तिवारी के खिलाफ रोहित पहली बार अदालत की शरण में गए जहां उन्होंने दावा किया कि वो पूर्व कांग्रेस नेता और अपनी मां उज्जवला शर्मा के पुत्र हैं. तिवारी ने इस केस को खारिज करने की गुहार कोर्ट में लगाई लेकिन मार्च, 2010 में उसे खारिज कर दिया गया.

हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर, 2010 को इस दावे की सच्चाई का पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया. हालांकि इसके लिए वो आसानी से राजी नहीं हुए. सुप्रीम कोर्ट में भी उन्होंने इसकी गुहार लगाई जहां से उन्हें निराशा हाथ लगी.

Advertisement

एनडी तिवारी को कोर्ट की सख्ती के बाद 29 मई 2011 को डीएनए जांच के लिए अपना खून देना पड़ा. इस डीएनए जांच की रिपोर्ट 27 जुलाई 2012 को दिल्ली हाईकोर्ट में खोली गई. लेकिन तिवारी की ओर से कोर्ट में यह अपील भी दायर की गई कि रिपोर्ट को सार्वजनिक न की जाए, लेकिन कोर्ट ने उनकी यह अपील नहीं मानी और रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि तिवारी रोहित के जैविक पिता हैं और उज्जवला जैविक माता.

खास बात यह है कि जब तिवारी डीएनए टेस्ट देने से कतरा गए तो रोहित के कानूनी पिता बीएल शर्मा अपना डीएनए सैंपल 2010 में अदालत में देने को तैयार हो गए. जबकि शर्मा से उज्‍द्गवला पहले ही तलाक ले चुकी थीं. टेस्ट के नतीजे से प्रमाणित हो गया कि वे रोहित के पिता नहीं हैं.

2104 में रोहित को माना बेटा

कोर्ट की ओर से रोहित को एनडी तिवारी का जैविक पिता माने जाने के बाद उन्होंने इस मामले में मीडिया से उनकी निजता को बनाए रखने की गुजारिश की.

6 साल चले पितृत्व केस हारने के बाद 3 मार्च, 2014 को नारायण दत्त तिवारी ने रोहित शेखर को अपना बेटा स्वीकार कर लिया. तब उन्होंने कहा, ‘मैंने स्वीकार कर लिया है कि रोहित शेखर मेरा बेटा है. डीएनए रिपोर्ट ने भी यह साबित किया है कि वो मेरा जैविक बेटा है.’ इस पर उनके बेटे रोहित ने भी प्रतिक्रिया दी, ‘मैं अचंभित हूं कि एनडी तिवारी ने अंततः मुझे अपना बेटा स्वीकार लिया है.’

Advertisement

88 साल की उम्र में की शादी

लेकिन यह भी दीगर है कि उन्होंने रोहित को अपना बेटा तब माना जब हाईकोर्ट की ओर से मध्यस्थता की गुजारिश खारिज कर दी गई. साथ ही रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा ने भी इस मामले में मध्यस्थता की गुजारिश को यह कहते हुए नकार दिया था कि यह उनकी प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला नहीं बल्कि केवल इतना है कि रोहित उनका बेटा है. उज्ज्वला शर्मा ने कहा, ‘डीएनए रिपार्ट ने यह साबित कर दिया था कि वो ही रोहित के पिता हैं. वो तभी इस पर बीच का रास्ता निकाल सकते थे लेकिन वो कोर्ट चले गए.’

डीएनए रिपोर्ट आने के 2 साल के अंदर 14 मई, 2014 को एनडी तिवारी ने लखनऊ में रोहित की मां उज्ज्वला के साथ शादी कर ली. विवाह के समय उनकी उम्र 88 साल थी.

सेक्स सीडी में फंसे

इससे पहले 2009 में टीवी पर की एक कथित सेक्स सीडी सामने आई, जिसने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया. हर तरफ उसकी चर्चा होने लगी. उस सीडी में तिवारी तीन महिलाओं संग आपत्तिजनक स्थिति में दिख रहे थे. उस वीडियो क्लिप को तेलुगू चैनल ने प्रसारित किया था. इस सीडी के सियासत ने ऐसा रंग दिखाया कि उन्हें आंध्र प्रदेश राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर वापस लौटना पड़ा.

Advertisement

तिवारी 3 बार उत्तर प्रदेश (1976–77, 1984–85, 1988–89) और एक बार उत्तराखंड (2002–2007) के मुख्यमंत्री रहे हैं. इसके अलावा वह प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान विदेश मंत्री भी रहे. साथ ही वह 2007 से 2009 के बीच आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे. वह दो प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले देश के एकमात्र नेता रहे.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »