कर्नाटक: लिंगायतों का BJP को समर्थन, वोक्कालिंगा वोट बैंक में भी सेंध

2019 लोकसभा चुनाव में लिगायत समुदाय मजबूती के साथ डटा रहा. लिंगायत समुदाय के 69% वोटरों ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया. वहीं कांग्रेस गठबंधन को लिंगायत समुदाय से 23%  वोटरों का ही भरोसा मिल सका. इसके अलावा वोक्कालिंगा वोटरों के 41% वोट बीजेपी को भी गए. इस तरह बीजेपी ने इस चुनाव में वोक्कालिंगा समुदाय के वोटों में भी खासी सेंध लगाई.

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कर्नाटक में बीजेपी को समर्थन (COURTESY- TWITTER) कर्नाटक में बीजेपी को समर्थन (COURTESY- TWITTER)

खुशदीप सहगल

  • नई दिल्ली,
  • 04 जून 2019,
  • अपडेटेड 2:42 PM IST

2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कर्नाटक में इतिहास रचा. पार्टी ने राज्य की कुल 28 लोकसभा सीटों में से 25 पर जीत हासिल की. बीजेपी को इस दक्षिणी राज्य में लोकसभा चुनाव में इतनी बड़ी कामयाबी पहले कभी नहीं मिली थी. 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को कर्नाटक से 17 सीटों पर ही जीत मिली थी.

बता दें कि कर्नाटक में जहां तक लोकसभा चुनाव का सवाल है, तो 2009 तक यहां कांग्रेस का दबदबा ही माना जाता रहा था. हालांकि जिस तरह बीजेपी ने यहां अपना आधार बढ़ाया है, दक्षिण में इस इकलौते राज्य में बीजेपी का किला लगातार मज़बूत होता जा रहा है.

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23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से चंद दिन पहले इंडिया टुडे – एक्सिस माई इंडिया के सर्वे ने अनुमान व्यक्त किया था कि बीजेपी कर्नाटक में 21 से 25 सीट जीत सकती है. सर्वे का अनुमान नतीजों में सटीक बैठा और बीजेपी को 25 सीट पर जीत हासिल हुई. कांग्रेस ने 2014 लोकसभा चुनाव में राज्य से 9 सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार उसे एक ही सीट से संतोष करना पड़ा.

एक्सिस माई इंडिया का डेटा दिखाता है कि 2019 लोकसभा चुनाव में कर्नाटक से बीजेपी को 51% और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को 42% वोट मिले. अन्य के खाते में 7% वोट गए.

लिंगायत समुदाय को कर्नाटक में बीजेपी का तभी से वोट बैंक माना जाता रहा है जब से कांग्रेस ने कर्नाटक के पूर्व सीएम वीरेंद्र पाटिल को सार्वजनिक तौर पर शर्मसार किया था. 1990 में राजीव गांधी ने बंगलौर एयरपोर्ट से ही वीरेंद्र पाटिल की कर्नाटक सीएम के पद से छुट्टी कर दी थी. लिंगायत समुदाय को ये नागवार गुजरा और इसका नतीजा कांग्रेस को 1994 विधानसभा चुनाव में राज्य से सत्ता गंवा कर भुगतना पड़ा.  

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2019 लोकसभा चुनाव में लिगायत समुदाय मजबूती के साथ डटा रहा. लिंगायत समुदाय के 69% वोटरों ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया. वहीं कांग्रेस गठबंधन को लिंगायत समुदाय से 23%  वोटरों का ही भरोसा मिल सका.  

कांग्रेस को उम्मीद थी कि जेडीएस के साथ उसका गठबंधन वोक्कालिंगा समुदाय बहुल क्षेत्रों में वोटों के ट्रांसफर में कारगर रहेगा. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को वोक्कालिंगा समुदाय के 48% वोट ही मिले. दूसरी तरफ वोक्कालिंगा वोटरों के 41% वोट बीजेपी को भी गए. इस तरह बीजेपी ने इस चुनाव में वोक्कालिंगा समुदाय के वोटों में भी खासी सेंध लगाई.

मुस्लिम वोटरों ने कर्नाटक में कांग्रेस गठबंधन को जमकर वोट दिए. मुस्लिम वोटरों में 86% ने कांग्रेस और इसके सहयोगी दलों पर भरोसा किया. हालांकि मुस्लिम समुदाय से 10% वोटरों ने बीजेपी को भी वोट दिया. जहां तक ओबीसी, सामान्य और अन्य का सवाल है तो 59% वोटरों ने बीजेपी पर भरोसा जताया.

अगर विभिन्न आयवर्गों को देखा जाए तो 5000 रूपए से नीचे प्रति माह की क्रयशक्ति (परचेसिंग पावर) रखने वाले वर्ग में से 50%  वोटरों ने बीजेपी को वोट दिया. इस वर्ग से 43%  वोटरों ने कांग्रेस गठबंधन को वोट दिया यानि बीजेपी से 7% कम. जैसे जैसे ये क्रयशक्ति बढ़ती गई वैसे ही वैसे वर्गों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच अंतर बढ़ता गया. 21000 रुपए से अधिक की क्रयशक्ति, यहां तक कि 30,000 रुपए तक के वर्ग में बीजेपी का वोट शेयर 60% रहा. वहीं इस वर्ग से कांग्रेस गठबंधन को सिर्फ 33% वोट ही मिले.   

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अगर शिक्षा के स्तर की बात की जाए तो निरक्षर वर्ग ने कांग्रेस और इसके सहयोगियों पर अधिक भरोसा किया. इस वर्ग से कांग्रेस गठबंधन को 52% वोटरों ने वोट दिया, वहीं आठवीं तक पढ़े वर्ग से 48% वोट कांग्रेस गठबंधन को मिले. शिक्षा का स्तर जैसे जैसे वर्गों में बढ़ा वैसे वैसे बीजेपी को वोट शेयर भी बढ़ता गया. दसवीं तक पढ़े वर्ग में से 52%  ने बीजेपी को वोट दिया. प्रोफेशनल डिग्री के स्तर तक पहुंचते बीजेपी के लिए ये वोट शेयर बढ़कर 58% हो गया.

आयुवर्ग की बात की जाए 18-25 आयुवर्ग में 53% वोटरों ने बीजेपी को वोट दिया. 26-35 आयुवर्ग में 52% और 36-50 वर्ग में 50% वोटरों ने बीजेपी को वोट दिया. हालांकि 61 वर्ष और इससे ऊपर के आयुवर्ग के वोटरों में 49% ने कांग्रेस गठबंधन को वोट दिया.  

एक्सिस माई इंडिया ने कामकाज के हिसाब से वोटरों की पसंद के डेटा पर भई गौर किया. बीजेपी को प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले वर्ग से 59% वोटरों के वोट मिले. वहीं सरकारी कर्मचारियों में बीजेपी को 60% वोटरों का समर्थन मिला. जहां तक डाक्टर, वकील, इंजीनियर जैसे प्रोफेशनल वर्ग की बात की जाए तो इनके वोटरों से लगभग बराबर कांग्रेस गठबंधन और बीजेपी को वोट शेयर मिला. इस वर्ग से 49%  वोटरों ने कांग्रेस गठबंधन को वोट दिया. इससे सिर्फ 1 फीसदी कम यानि 48%  ने बीजेपी को वोट दिया.

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बहुचर्चित कर्ज माफी योजना भी कर्नाटक में सत्तारूढ जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के लिए लोकसभा चुनाव में कोई कमाल नहीं कर पाई. किसानों में भी 51% वोटरों ने बीजेपी को वोट दिया. कृषि मजदूरों में 49% ने बीजेपी पर भरोसा जताया. मोची वर्ग में 50%  और बेरोजगारों में 46% ने कांग्रेस गठबंधन के समर्थन में वोट दिया.

जहां तक छात्रों का सवाल है तो 59% ने बीजेपी के पक्ष में वोट दिया. उधर कांग्रेस गठबंधन को ग़ृहणियों में 46% के वोट मिले. गृहणियों में 45% ने बीजेपी को वोट दिया.

बीजेपी को कर्नाटक के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों से अधिकतर वोटरों का समर्थन मिला. बीजेपी को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में 51-51%  वोटरों के वोट मिले. दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन शहरी क्षेत्रों में 43% और ग्रामीण क्षेत्रों में 42% वोटरों का ही समर्थन हासिल कर सका. ग्रामीण क्षेत्रों से कांग्रेस को किसानों के हक़ में लगातार मुहिम चलाने की वजह से अच्छा समर्थन मिलने की उम्मीद थी जो पूरी नहीं हो सकी.  

अगर लिंग के आधार पर वोट शेयर की बात की जाए तो महिला और पुरुष दोनों में अधिकतर वोटरों ने बीजेपी को वोट दिया. पुरुषों में 54% ने बीजेपी और 40% ने कांग्रेस गठबंधन को वोट दिया. वहीं महिलाओं में 48% ने बीजेपी और 44% ने कांग्रेस गठबंधन का साथ दिय.

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