छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. मामला जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर-7 स्थित परशुराम चौक का है. महिला पिछले करीब 10 साल से अपने तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रही है. बताया जा रहा है कि महिला ने फांसी लगाने की कोशिश की थी. इसी दौरान रस्सी कमजोर होने के कारण टूट गई और महिला जमीन पर गिर गई. उस वक्त महिला के बच्चे स्कूल गए हुए थे. स्कूल से लौटने के बाद बच्चों ने अपनी मां को गंभीर हालत में देखा और इसकी जानकारी मकान मालिक को दी. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची.
पुलिस ने कथित तौर पर मृत समझ लिया और कमरे में ताला लगाकर चली गई. करीब दो घंटे बाद जब पुलिस टीम वहां पहुंची और कमरे का ताला खोला, तो महिला जिंदा मिली.
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने महिला की स्थिति की ठीक से जांच किए बिना ही उसे मृत घोषित कर दिया गया. इसके बाद कमरे में ताला लगाकर पुलिसकर्मी यह कहते हुए चले गए कि बाद में पंचनामा करने के लिए आएंगे.
करीब दो घंटे बाद पुलिस की टीम एक महिला कांस्टेबल के साथ जांच करने के लिए मौके पर पहुंची और कमरे का ताला खोला गया तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए.
महिला की सांसें चल रही थीं और वह जिंदा थी. इसके बाद आनन-फानन में महिला को निजी अस्पताल ले जाया गया. वहां उसकी डॉक्टरों ने महिला की हालत को देखते हुए महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया.
फिलहाल महिला की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. हालांकि, इस घटना के बाद लोग पुलिस की चूक पर सवाल उठा रहे हैं. अगर समय पर महिला को अस्पताल पहुंचाया जाता तो उसकी स्थिति और बेहतर हो सकती थी.
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में पुलिस के खिलाफ भारी नाराजगी है. इस मामले को लेकर SDOP भूषण इक्का का बयान भी सामने आया है. पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है.
सूरज सिन्हा