पाकिस्तान से आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकता: अरुण जेटली

अरुण जेटली ने कहा कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में यह प्रस्ताव रखा गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को नोबेल का शांति पुरस्कार दिया जाए. उन्होंने कहा कि इस पर कुछ ज्यादा नहीं कहना चाहूंगा क्योंकि सब जानते हैं कि आतंक को कौन पनाह दे रहा है. ज्यादा वक्त तक सच को नकारा नहीं जा सकता. इसके परिणाम आने वाले वक्त में दिखाई देंगे.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के 18वें संस्करण में वित्तमंत्री अरुण जेटली.  इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के 18वें संस्करण में वित्तमंत्री अरुण जेटली.

आदित्य बिड़वई

  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 8:53 PM IST

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के 18वें संस्करण में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शिरकत की. उन्होंने पाकिस्तान के रवैये पर तीखा वार किया. उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकियों को अपने देश में पनाह देता रहेगा तब तक भारत अपना रवैया सख्त रखेगा.

जेटली ने आगे कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. क्योंकि हमने ऐसा पहली बार नहीं देखा है. मुंबई हमला हो या फिर पुलवामा, पाकिस्तान विश्वासघात करता रहा है.

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पाकिस्तान हर सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखता रहा है कि वो आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करेगा. हम उसकी बातों पर विश्वास करते हैं, लेकिन इसके बाद संसद पर हमला, पुलवामा हो जाता है तब लगता है कि हमने कुछ नहीं सीखा.

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इमरान को लेकर क्या बोले जेटली...

अरुण जेटली ने कहा कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में यह प्रस्ताव रखा गया है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को नोबेल का शांति पुरस्कार दिया जाए. उन्होंने कहा कि इस पर कुछ ज्यादा नहीं कहना चाहूंगा क्योंकि सब जानते हैं कि आतंक को कौन पनाह दे रहा है. ज्यादा वक्त तक सच को नकारा नहीं जा सकता. इसके परिणाम आने वाले वक्त में दिखाई देंगे.

किसी भी देश पर हमला होता है तो पाकिस्तान के पड़ चिन्ह मिलते हैं....

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जेटली ने कहा कि पूरी दुनिया में कही भी आतंकवादी घटना होती है तो इसका तार कहीं ना कहीं से पाकिस्तान से जुड़ जाता है. चाहे अमेरिका, पेरिस हो या फिर पुलवामा. हर आतंकी घटना में पाकिस्तान का हाथ दिखाई देता है. पाकिस्तान के मंत्री तक इस बात को क़ुबूल कर चुके हैं कि उनके यहां आतंकी संगठन सक्रिय हैं. इसलिए आतंक के खिलाफ एक आवाज उठनी जरूरी है. अभिनंदन के वापस आने के बाद भारत का सख्त रवैया बदलेगा नहीं. हम आतंक के खिलाफ लड़ेंगे.

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