संगरूर जिले के बेनड़ा गांव में प्राथमिक स्कूल की बदहाल स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों में काफी आक्रोश है. साल 1971 में बने स्कूल भवन को पिछले साल भारी बारिश के बाद जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया था. इसके बाद पुराने स्कूल भवन को गिरा दिया गया लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि उसके बाद से नया भवन बना ही नहीं. फिलहाल बच्चे गांव की धर्मशाला में पढ़ने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि धर्मशाला में बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. ग्रामीणों की ओर से समय-समय पर इसके खिलाफ आवाज़ उठाई गई लेकिन अब तक नया स्कूल भवन बन नहीं पाया है. बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि गर्मी में पंखे की कमी के कारण छात्र परेशान हैं. अभिभावकों का कहना है कि वे निजी स्कूल का खर्च वहन नहीं कर सकते इसलिए बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे हैं. लेकिन सरकारी स्कूल की हालत अच्छी नहीं है.
उनका कहना है कि पुराने भवन की जर्जर अवस्था को देखते हुए उसे गिराया गया था और फिर स्कूल को धर्मशाला में शिफ्ट किया गया. कहा गया था कि यह अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन यह स्थायी होती जा रही है.
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ग्रामीणों ने स्कूल के नए भवन की मांग को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया. ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है लेकिन अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ. ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल में पहले 63-64 बच्चे पढ़ाई करते थे लेकिन सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों की संख्या 45 हो गई है.
वहीं, इस मामले पर संगरूर के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि बेनड़ा ने नए स्कूल भवन के लिए 20 लाख रुपये की मंजूरी हो गई है. बहुत जल्द निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा. पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जिन स्कूलों में भी समस्या है वहां मरम्मत का काम कराया जाएगा.
ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द स्कूल के लिए नया भवन मिले. उनका कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं जमीन पर काम चाहिए, नया स्कूल भवन चाहिए. जिससे बच्चे धर्मशाला में नहीं अच्छे स्कूल में पढ़ें.
कमलजीत संधू