तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपा है. पश्चिम बंगाल की बारासात सीट से सांसद काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई वाले इस गुट ने स्पीकर से नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय की मंजूरी देने का आग्रह किया है. इस धड़े में 20 सांसद शामिल हैं. टीएमसी सांसदों की ओर से एनसीपीआई में विलय के लिए दिए गए आवेदन को लोकसभा सचिवालय अब प्रॉसेस कर रहा है.
सूत्रों की मानें तो अगले पांच से सात दिनों में लोकसभा सचिवालय इसे प्रॉसेस कर सकता है. बताया जाता है कि लोकसभा सचिवालय की आंतरिक समिति इस आवेदन की छानबीन कर रही है. लोकसभा सचिवालय की इस समिति में कानूनी विशेषज्ञ भी हैं. आंतरिक समिति की रिपोर्ट आने के बाद स्पीकर ओम बिरला इस पर कोई फैसला लेंगे. सूत्रों के मुताबिक इस पर फैसला दसवीं अनुसूची के पैरा 4(2) के मुताबिक हो सकता है.
दसवीं अनुसूची के पैरा 4(2) के अनुसार यदि कोई राजनीतिक दल किसी दूसरी पार्टी में अपना विलय करता है, तो उसके विधायकों या सांसदों की सदस्यता सुरक्षित रहेगी. लेकिन इसके लिए दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा होना अनिवार्य है. टीएमसी के बागी सांसदों के मामले में देखें, तो पार्टी के कुल 28 में से 20 सांसदों ने एनपीसीआई में विलय की याचिका दी है. यह जरूरी दो तिहाई के आंकड़े से कहीं अधिक है.
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जरूरी संख्याबल बागी गुट के साथ है, ऐसे में स्पीकर उनके विलय को मंजूरी देते हुए उन्हें मान्यता दे सकते हैं. इस तरह उनकी लोक सभा सदस्यता सुरक्षित रहेगी. विलय के साथ ही लोकसभा में इन सांसदों के बैठने की जगह भी बदली जा सकती है. ये सभी सांसद अब तक विपक्ष की ओर बैठते रहे हैं. अब विलय के बाद इनको ट्रेजरी बेंच की ओर बैठने की सीट दी जा सकती है.
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ऐसा इसलिए है, क्योंकि काकोली घोष की अगुवाई वाले गुट के नेता बगावत के बाद से ही लगातार यह कहते रहे हैं कि हम एनडीए सरकार का समर्थन करेंगे. गौरतलब है कि टीएमसी के 18 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र काकोली घोष ने 18 मी को ही स्पीकर को भेजकर अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की थी. दो सांसदों ने बाद में पत्र लिखकर बागी गुट के समर्थन की बात कही थी.
हिमांशु मिश्रा