PM मोदी को TMC सांसद की चिट्ठी, इन मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

परिसीमन और FCRA संशोधन बिल को लेकर TMC ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दोनों मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और प्रस्तावित कानूनों पर पहले सभी दलों से चर्चा करने की मांग की है.

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डेरेक ओ ब्रायन ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी. (Photo: ITG) डेरेक ओ ब्रायन ने पीएम नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:03 PM IST

संसद के मानसून सत्र से पहले परिसीमन (डीलिमिटेशन) और FCRA संशोधन बिल को लेकर सियासत तेज हो गई है. TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दोनों प्रस्तावित कानूनों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है. उनका कहना है कि इतने अहम मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों से चर्चा किए बिना आगे बढ़ना ठीक नहीं होगा. उन्होंने सरकार से संसद में कोई भी कदम उठाने से पहले व्यापक सहमति बनाने की अपील की है.

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डेरेक ओ'ब्रायन ने 19 जुलाई को लिखे अपने पत्र में कहा कि सरकार परिसीमन और FCRA संशोधन जैसे अहम मुद्दों पर पहले सभी दलों से बातचीत करे. उन्होंने प्रधानमंत्री से सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसे कानूनों पर संसद में आगे बढ़ने से पहले सभी पक्षों की राय लेना जरूरी है.

परिसीमन को लेकर क्या जताई चिंता?

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि मानसून सत्र के लिए जारी सरकारी कार्यसूची में फिलहाल परिसीमन से जुड़ा कोई बिल नहीं है. इसके बावजूद विपक्ष को सरकार के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए चिंता सता रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी अचानक राज्यसभा में पेश किया गया था, इसलिए परिसीमन जैसे बड़े मुद्दे पर सरकार को ऐसी रणनीति नहीं अपनानी चाहिए. अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने इसी साल अप्रैल में लोकसभा में पेश हुए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक सहित परिसीमन बिल का भी जिक्र किया. उनका दावा है कि ये विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सके थे, जिसके चलते अगले ही दिन खारिज हो गए.

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FCRA संशोधन बिल पर भी उठाए सवाल

डेरेक ओ'ब्रायन ने FCRA संशोधन बिल, 2026 पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक नए प्रावधानों का असर गरीब और वंचित तबकों के लिए काम करने वाले कई सामाजिक संगठनों पर पड़ सकता है।. पत्र में दावा किया गया है कि इससे ईसाई समुदाय के हजारों शैक्षणिक संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कई चैरिटेबल संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण बढ़ जाएगा. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 और 26 के तहत मिले अधिकारों की रक्षा की जरूरत पर भी जोर दिया.

अपने पत्र में डेरेक ओ'ब्रायन ने तीन कृषि कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को उसी तरह जल्दबाजी में कानून नहीं लाने चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि किसी भी नए कानून को आगे बढ़ाने से पहले सभी दलों को भरोसे में लिया जाए.

परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि अभी इसकी प्रक्रिया पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. संविधान के मुताबिक 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना पूरी होने से पहले नया परिसीमन शुरू नहीं किया जा सकता. वहीं सरकार का कहना है कि FCRA संशोधन का मकसद विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही बढ़ाना है.

रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी ने FCRA संशोधन बिल को संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की है, ताकि उस पर विस्तार से चर्चा हो सके. पार्टी संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में इस बिल पर चर्चा के लिए समय तय किए जाने का भी विरोध करेगी. उसका कहना है कि पहले विधेयक की विस्तृत जांच होनी चाहिए, उसके बाद ही इसे संसद में पारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए.
 

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