बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने गुरुवार को कहा कि छात्रों की जायज मांगों को सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए. उन्होंने छात्र प्रदर्शनों से निपटने के लिए बल प्रयोग और डंडे चलाने की आलोचना की. जोशी ने कहा कि इस तरीके से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता.
दरअसल, जोशी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शुरू हुए 21वें FICCI हायर एजुकेशन समिट में बोल रहे थे. दो दिवसीय इस सम्मेलन की थीम 'हायर एजुकेशन फॉर ए न्यू वर्ल्ड ऑर्डर: रिफॉर्म, रेजिलिएंस एंड रिलिवेंस' है. कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत में जोशी ने कहा कि छात्रों की उचित और जायज मांगों को हमेशा सहानुभूति के साथ सुना जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, 'डंडे चलाने का तरीका उचित नहीं है. आप इस तरह कभी समाधान नहीं निकाल सकते. अगर कोई समस्या है तो उनकी बात सुनिए. वे हमारे बच्चे हैं.'
शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य क्या होना चाहिए?
पद्म विभूषण से सम्मानित मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था ऐसी दुनिया बनाने में विश्वास करती है, जहां इंसान के विकास के सभी पहलुओं के बीच संतुलन हो. उन्होंने कहा कि इसमें इंसान के भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता है.
फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से यह बदल रहा है कि एक छात्र को स्नातक होने के बाद क्या-क्या जानकारी और कौशल की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि एआई इतनी तेजी से बदलाव ला रहा है कि कोई भी पाठ्यक्रम समिति उतनी तेजी से बदलाव नहीं कर सकती.
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