यह पहली बार नहीं है जब रेलवे ने इस तरह का सराहनीय काम किया हो. ऐसा तीसरी बार हुआ है, जब वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से मनुष्य का धड़कता दिल (हार्ट) को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सावधानी के साथ पहुंचाया गया.
दरअसल, अब रेलवे केवल एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ने का माध्यम नहीं है, भारतीय रेलवे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी प्रतिबद्धता केवल यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि समय पड़ने पर इंसानी जान बचाना भी उसकी पहली प्राथमिकता है.
1 नवंबर 2026 को पश्चिम रेलवे ने एक बार फिर संवेदनशीलता और फास्ट सिस्टम का बेहतरीन उदाहरण पेश किया है. एक मरीज की जान बचाने के लिए 'धड़कता दिल' (Human Heart) को सूरत से अहमदाबाद तक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के जरिए सुरक्षित और रिकॉर्ड समय में पहुंचाया गया.
ये तीसरा मौका है जब वंदे भारत ट्रेन 'लाइफ-सेवर' बनी है. 01 नवंबर 2026 को 5 डॉक्टरों की स्पेशल टीम सूरत के न्यू सिविल अस्पताल से ट्रासप्लांट के लिए ह्यूमन हार्ट लेकर निकली, जिसे अहमदाबाद के यू.एन. मेहता अस्पताल पहुंचाया गया. इसके लिए सूरत-अहमदाबाद वंदे भारत एक्सप्रेस की सेवा ली गई.
कैसे तैयार हुआ 'ग्रीन कॉरिडोर' और कैसे बनी बात?
आर्गेन ट्रांसप्लांट के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती समय होती है. दिल को शरीर से निकालने के बाद कम से कम समय में दूसरे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट करना होता है, इसमें एक-एक सेकंड की कीमत होती है.
इसी बात की गंभीरता को समझते हुए सूरत और अहमदाबाद में रेलवे प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत तालमेल बिठाया. सूरत रेलवे स्टेशन पर एक विशेष 'ग्रीन कॉरिडोर' बनाया गया, ताकि डॉक्टरों की टीम बिना किसी रुकावट के सीधे ट्रेन की बोगी तक पहुंच सके.
सूरत रेलवे स्टेशन पर पहुंचने से लेकर ट्रेन में बैठने तक की सभी व्यवस्थाओं को आसान बनाया. इसके लिए RPF और GRP ने भीड़-भाड़ वाले स्टेशन पर सुरक्षा प्रदान की और डॉक्टरों के लिए रास्ता खाली कराया. अस्पताल से रेलवे स्टेशन तक बिना ट्रैफिक के एम्बुलेंस पहुंचाने में मदद की. इन सभी के बेहतरीन समन्वय के कारण डॉक्टरों की 5 सदस्यीय टीम बिना किसी असुविधा या देरी के वंदे भारत एक्सप्रेस में सवार हो सकी.
भारतीय रेलवे को सलाम
सूरत से अहमदाबाद पहुंचने के बाद भी इसी तरह की व्यवस्था की गई और दिल को बिना किसी देरी के अहमदाबाद के यू.एन. मेहता अस्पताल पहुंचा दिया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ट्रांसप्लांट के लिए पहले से तैयार थी. पश्चिम रेलवे के कर्मचारियों, सुरक्षा बलों और डॉक्टरों के तालमेल से किसी को नई जिंदगी मिल गई. भारतीय रेलवे का यह कदम यह संदेश देता है कि जब बात देश के नागरिकों की सुरक्षा और जीवन रक्षा की आती है, तो रेलवे हमेशा सबसे आगे खड़ी मिलती है.