मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग खारिज कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि उसे उम्मीद है कि संवैधानिक संस्था कानून के मुताबिक काम करेगी.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के कई अन्य फैसले कानून में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए लिए गए. याचिकाओं में कहा गया कि चुनाव आयोग से जुड़े कानून के मुताबिक फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए.
ये याचिकाएं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की हैं. राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह पेश हुए. उन्होंने जनप्रतिनिधित्व कानून के मूल स्वरूप और उसमें किए गए बदलावों के साथ धारा 10(2) और 10(3) का हवाला दिया.
'नए कानून ने CEC को सबसे शक्तिशाली व्यक्ति बना दिया'
विकास सिंह ने दलील दी कि नए कानून ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बेहद शक्तिशाली बना दिया है. उन्होंने कहा कि CEC को रिटायरमेंट के बाद भी जांच से संरक्षण दिया गया है. सिंह ने कहा, "प्रधानमंत्री तक को ऐसी इम्युनिटी नहीं है. यहां तक कि जजों को भी ऐसा संरक्षण नहीं मिला है."
इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि पद पर रहते हुए संरक्षण पहले भी कानून में था. सिंह ने जवाब दिया कि अब कानून रिटायरमेंट के बाद भी सुरक्षा देता है. CJI ने कहा कि संबंधित कानून को चुनौती देने वाला मामला पहले से लंबित है.
विकास सिंह ने कहा कि वह इस मामले में कानून को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि यह देखना चाहते हैं कि चुनाव आयोग में क्या हो रहा है.
ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से ज्ञानेश कुमार को CEC पद से निलंबित करने की मांग भी की गई. विकास सिंह ने कहा कि बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों को चुनाव आयोग चलाने दिया जाए. उन्होंने अनूप बरनवाल मामले वाली व्यवस्था बहाल करने की भी मांग की, जिसमें नियुक्ति समिति में CJI शामिल थे.
सिंह ने आरोप लगाया कि CEC एकतरफा फैसले ले रहे हैं, जबकि कानून के मुताबिक चुनाव आयोग के फैसले जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से होने चाहिए और ऐसा नहीं होने पर बहुमत से फैसला होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए, जबकि वास्तविक कामकाज से जुड़े फैसले बहुमत से किए जा सकते हैं.
'पहले चुनाव आयोग का जवाब आने दें'
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर अपनी बात रख रहे हैं और अदालत केवल उसके आधार पर आदेश पारित नहीं कर सकती. पहले चुनाव आयोग का जवाब आना चाहिए.
इस पर विकास सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग की अपनी प्रेस रिलीज भी है, जिसने संबंधित समाचार रिपोर्ट का खंडन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग वैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन नहीं कर सकता.
CJI ने कहा, 'पहले उन्हें जवाब देने दीजिए. एक अनिवार्य कानून है और हम उम्मीद करते हैं कि उन्होंने कानून का पालन किया होगा. अगर इसका उल्लंघन हुआ है तो हम फैसले को पलट सकते हैं.'
इस पर विकास सिंह ने कहा कि चुनाव हो जाने और सरकार बन जाने के बाद चुनाव परिणाम को कैसे पलटा जा सकता है. उन्होंने अदालत से अंतरिम कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं.
संजय शर्मा / अनीषा माथुर