कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सह-आरोपी बनाए गए दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत की ओर जारी किए गए समन को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रद्द कर दिया.
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के आदेश से दिसंबर 2024 में दिवंगत हो चुके भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब बरी हो गए. उनके कार्यकाल में यह मामला बेहद चर्चित हुआ था और उस वक्त विपक्ष ने सरकार के फैसले को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे.
दरअसल, कोल ब्लॉक आवंटन मामले में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विशेष सीबीआई अदालत से जारी समन को सुप्रीम कोर्ट में 2015 में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर पहली ही सुनवाई में मनमोहन सिंह को राहत देते हुए समन पर रोक लगा दी थी.
हालांकि, लंबे समय तक यह मामला लंबित रहने के दौरान सुप्रीम कोर्ट से समन की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया और दिसंबर 2024 में मनमोहन सिंह का निधन हो गया. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ समन रद्द करने का आदेश दिया.
क्या था मामला?
कोयला घोटाले को देश के बड़े घोटालों में से एक माना जाता है. 1.86 लाख करोड़ के इस घोटाले की जांच में कई मोड़ आए, यह मामला 2004 से 2009 के दौरान 100 कंपनियों को कोयला खदानों के आवंटन का था. आरोप था कि इन खदानों की नीलामी प्रक्रिया में अनियमितताएं बरतीं गईं. कई बड़ी कंपनियों समेत 100 कंपनियों को बिना नीलामी के कोयला खदानें आवंटित की गई थीं.
इस मामले की जांच करने के बाद कैग ने कोल ब्लॉक्स के आवंटन पर अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपी थी. इसमें कोयला खदानों में हुए बंदरबांट का खुलासा किया गया था. जिन कपंनियों को खदानें मिली थीं, उनमें निजी और सरकारी कंपनियां शामिल थीं. ये बिजली, स्टील और सीमेंट का कारोबार करने वाली कंपनियां थीं.
संजय शर्मा