सुप्रीम कोर्ट ने बिना इंश्योरेंस वाहन चलाने वालों पर सख्ती की जरूरत बताई है और कहा है कि सभी गाड़ी मालिकों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कराना जरूरी है. अदालत ने कहा कि कानून में यह व्यवस्था पहले से अनिवार्य है, लेकिन इसका पालन कमजोर है. यही वजह है कि सड़क हादसों के पीड़ितों और मृतकों के परिवारों को मुआवजा पाने के लिए काफी भटकना पड़ता है.
कोर्ट ने सरकार से सख्त और असरदार कदम उठाने को कहा है. अदालत के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, ई-डीएआर के डेटा में करीब 22 फीसदी सड़क हादसे ऐसे वाहनों से जुड़े हैं जिनके पास वैध इंश्योरेंस नहीं था. वहीं, वित्त संबंधी स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सड़कों पर चल रहे करीब 56 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं.
यह भी पढ़ें: NEET PG कटऑफ पर विवाद, पर्सेंटाइल घटाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस के लिए कानूनी ढांचा पहले से मौजूद
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़ी यह एक दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई है कि थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस के लिए कानूनी ढांचा होने के बावजूद उसका पालन नहीं हो रहा. अदालत ने यह भी कहा कि कई मामलों में वाहन का रजिस्ट्रेशन भी वैध या सक्रिय नहीं होता.
ऐसे में हादसे के बाद ड्राइवर या मालिक की पहचान करना मुश्किल और समय लेने वाला हो जाता है. कोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति मोटर व्हीकल एक्ट के मकसद और कानूनी जिम्मेदारी दोनों को कमजोर करती है.
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 196 में भी हैं नियम
जानकारी के मुताबिक, मार्च 2026 में सरकार ने राज्यसभा में बताया था कि वीएएचएएन के सक्रिय वाहनों के आंकड़ों के आधार पर 6 मार्च 2026 तक 44.31 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के थे. अदालत ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 196 का भी जिक्र किया. कोर्ट ने कहा कि इस धारा में संशोधन किया गया है, जिसे अभी अधिसूचित किया जाना बाकी है.
यह भी पढ़ें: 'क्लास 9 के बच्चों पर न थोपें 3 भाषाएं...' सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBSE की पॉलिसी, वकील ने जताई बड़ी चिंता!
इस संशोधन के तहत बिना इंश्योरेंस वाहन चलाने पर पहली बार तीन गुना बेसिक प्रीमियम या 5000 रुपये, जो भी ज्यादा हो, का जुर्माना तय किया गया है. दोबारा उल्लंघन पर पांच गुना बेसिक प्रीमियम या 10000 रुपये, जो भी ज्यादा हो, का जुर्माना रखा गया है.
सुप्रीम कोर्ट टेक के इस्तेमाल का दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या से निपटने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी और सख्त प्रवर्तन पर भी जोर दिया है. अदालत ने सड़कों और हाईवे पर लगे कैमरों से बिना इंश्योरेंस वाहनों की पहचान, ऐसे वाहनों के खिलाफ ई-चालान और पेट्रोल-डीजल नहीं देने की व्यवस्था के लिए पायलट प्रोजेक्ट जैसे कदमों पर विचार करने को कहा है. कोर्ट का साफ कहना है कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि हादसों के पीड़ितों को मुआवजे के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े.
अनीषा माथुर