'अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन धार्मिक भावनाओं...', शर्मिष्ठा पनोली की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोलकाता हाईकोर्ट की टिप्पणी

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हमारे देश में विभिन्न समुदाय, जाति और धर्म के लोग एक साथ रहते हैं.

Advertisement
आरोपी शर्मिष्ठा पनोली (File photo) आरोपी शर्मिष्ठा पनोली (File photo)

राजेश साहा

  • कोलकाता,
  • 03 जून 2025,
  • अपडेटेड 3:05 PM IST

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली की जमानत अर्जी पर कोलकाता हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. उन्हें एक वीडियो को लेकर गिरफ्तार किया गया है और इस वीडियो में शर्मिष्ठा ने कुछ बॉलीवुड सितारों की आलोचना की थी कि उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चुप्पी क्यों साध रखी है. हालांकि इस वीडियो को बाद में हटा दिया गया था. अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 जून को होगी, जिसमें राज्य सरकार एक हलफनामा दायर करेगी और पुलिस केस डायरी को कोर्ट के सामने पेश करेगी.

Advertisement

पुलिस के पास गिरफ्तारी का अधिकार

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शर्मिष्ठा के वकील से कहा कि वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और ऐसा सुनने में आया कि इससे एक खास वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं. बेंच ने कहा कि हमें अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं. अदालत ने कहा कि अगर सज़ा 7 साल से कम भी हो, तो भी पुलिस को किसी को भी गिरफ़्तार करने का पूरा अधिकार है. बेंच ने कहा कि अगर कथित अपराध की सज़ा 7 साल से कम है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुलिस आपको गिरफ़्तार नहीं कर सकती. भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 35 की कोई भी शर्त पूरी होने पर पुलिस चाहे तो किसी को भी गिरफ़्तार कर सकती है, आपको पहले प्रावधान पढ़ने चाहिए.

Advertisement

ये भी पढ़ें: शर्मिष्ठा पनोली पर केस करने वाले वजाहत खान के पीछे क्यों लगी पुलिस? कोलकाता से लेकर असम में केस

हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी टिप्पणी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हमारे देश में विभिन्न समुदाय, जाति और धर्म के लोग एक साथ रहते हैं. कोर्ट ने तय किया है कि शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ कोलकाता के गार्डनरीच थाने में दर्ज केस को मुख्य मामला माना जाएगा क्योंकि यह पहले दर्ज किया गया था. उनके खिलाफ दर्ज अन्य सभी मामलों की कार्यवाही बंद की जाएगी.

राज्य दाखिल करेगा हलफनामा

कोर्ट ने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि शर्मिष्ठा पनोली के खिलाफ उसी आरोप के साथ कोई और एफआईआर दर्ज न हो. एजेंसी आरोपी के खिलाफ मुख्य मामले की जांच करेगी. राज्य को हलफनामा दाखिल करने का मौका दिया जा रहा है क्योंकि वे जवाब और संबंधित दस्तावेज दाखिल करना चाहते थे. कोलकाता पुलिस से केस डायरी मांगी जा रही है, क्योंकि कोर्ट पहले केस डायरी देखना चाहता है. मामले की अगली सुनवाई 5 जून को होगी.

शर्मिष्ठा पर आरोप है कि उन्होंने अपने वीडियो में एक समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और विवाद पैदा हो गया. इसी के चलते पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और गिरफ्तारी हुई है. शर्मिष्ठा पनोली को 30 मई की देर रात गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया और कोलकाता लाया गया, जहां उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. 

Advertisement

ये भी पढ़ें: शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी पर घमासान, BCI और विदेश से भी मिला समर्थन, जानें क्या है पूरा विवाद

इसके बाद आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उनकी तरफ से जिस वीडियो के कारण विवाद शुरू हुआ था, उसे पनोली ने बाद में हटा दिया था और अपनी टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी. हालांकि बाद में इस पर सियासी विवाद भी शुरू हो गया और बीजेपी खुलकर पनोली के समर्थन में आ गई है और राज्य की टीएमसी सरकार को कटखरे में खड़ा कर रही है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »