बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम का ऐलान सोमवार (17 अगस्त) को हुआ. इसमें कई दिग्गजों को जगह मिली है, जिनमें से एक हैं राम माधव. बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में राम माधव की वापसी को अहम माना जा रहा है. उनकी वापसी से तीन बड़े संकेत मिलते हैं. पहला, RSS और बीजेपी के बीच कॉर्डिनेशन को मजबूत करना. दूसरा, पार्टी में अनुभव को फिर से महत्व देना और तीसरा, संगठन पर फोकस बढ़ाना.
राम माधव कभी बीजेपी अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में माने जाते थे. 2020 में राष्ट्रीय महासचिव पद छोड़ने के बाद वह 2024 में जम्मू-कश्मीर के पार्टी प्रभारी के रूप में फिर सक्रिय चुनावी भूमिका में लौटे. अब उनकी वापसी से एक अनुभवी रणनीतिकार फिर पार्टी के राष्ट्रीय संगठन के केंद्र में आ गया है.
राम माधव का अनुभव दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और उन राज्यों में बीजेपी के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां पार्टी को नए सामाजिक और राजनीतिक गठजोड़ की जरूरत है. वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पार्टी की अहम आवाज बन सकते हैं, खासकर विदेश नीति, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव
राम माधव किशोरावस्था से ही RSS से जुड़े रहे हैं और 1981 में वह पूर्णकालिक RSS कार्यकर्ता बने. इसके बाद उन्होंने संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. 2003 से 2014 तक वह RSS के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे और संगठन की प्रमुख आवाजों में शामिल हुए. 2014 में बीजेपी की जीत के बाद RSS ने उन्हें पार्टी में भेजा. वह 2014 से 2020 तक बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहे और संघ व पार्टी के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरे. इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में बीजेपी की राजनीतिक रणनीति में प्रमुख भूमिका निभाई.
राम माधव बीजेपी-PDP गठबंधन की बातचीत में भी करीब से जुड़े रहे. काफी दिनों की चर्चा के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन हुआ और 2015 में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पेश किया गया. इसके बाद पूर्वोत्तर में बीजेपी के विस्तार में भी उनकी अहम भूमिका रही. असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में पार्टी के विस्तार और नए गठजोड़ बनाने में वह सक्रिय रहे.
अहम मानी जा रही वापसी
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब बीजेपी संगठन को मजबूत करने और अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है. 2027 से 2029 के चुनावी दौर की तैयारी के बीच राम माधव का अनुभव गठबंधन, क्षेत्रीय राजनीति और मुश्किल राजनीतिक क्षेत्रों में पार्टी के विस्तार में अहम माना जा रहा है.
ऐश्वर्या पालीवाल