राहुल गांधी सहित कांग्रेस के कई सांसदों को प्रधानमंत्री आवास के पास धरना-प्रदर्शन करते हुए पुलिस ने हिरासत में ले लिया. इसके बाद सवाल उठने लगा कि क्या इससे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष या सांसदों के विशेषाधिकार का हनन नहीं होता? किन मामलों में सांसद, विधायक या जनप्रतिनिधियों को विशेष कवच हासिल है?
इन सवालों पर सुप्रीम कोर्ट के वकील और विधि विशेषज्ञ आरके सिंह के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होने पर पुलिस उसके लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है. ऐसे में प्रधानमंत्री आवास जैसे अति सुरक्षित और संवेदनशील क्षेत्र में बिना अनुमति दल-बल के साथ धरना-प्रदर्शन करने और लोगों को आमंत्रित करने वाले नेताओं को पुलिस हिरासत में ले सकती है. ऐसी स्थिति में कानून स्पष्ट है कि किसी भी सांसद को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने के लिए लोकसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती.
संसदीय विशेषाधिकार और गिरफ्तारी के नियमों में भी आपराधिक और दीवानी मामलों के बीच अंतर स्पष्ट है. हत्या, भ्रष्टाचार, दंगा या अन्य गंभीर संज्ञेय अपराध के मामले में पुलिस को किसी सांसद को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने के लिए स्पीकर की अनुमति नहीं चाहिए. हालांकि, गिरफ्तारी के बाद इसकी सूचना लोकसभा स्पीकर को तुरंत देना अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है.
संसद भवन परिसर के अंदर के नियमों में भी यह स्पष्ट है कि लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति के बिना संसद भवन के भीतर किसी भी सांसद को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता और न ही कोई कानूनी समन या नोटिस दिया जा सकता. यदि कोई विरोध-प्रदर्शन या हिरासत की कार्रवाई संसद परिसर के बाहर, जैसे विजय चौक या अन्य सार्वजनिक स्थलों पर होती है, तो पुलिस सामान्य नियमों के तहत कार्रवाई कर सकती है. पुलिस को ऐसी कार्रवाई करने का पूरा अधिकार और अख्तियार है.
संजय शर्मा