पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. खेतों में फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद घटनाएं सामने आ रही हैं.
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की 4 नवंबर 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पराली जलाने की कुल 2,347 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन मामलों में 40.37 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है, जबकि अब तक 23.05 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है.
रिपोर्ट के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई के तहत राज्य में 647 FIR दर्ज की गई हैं. इसके अलावा 1,942 खेतों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 868 स्थानों पर आग लगने की पुष्टि हुई है.
विभाग ने 801 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है. वहीं, कार्रवाई के तहत 723 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है और किसानों को पराली नहीं जलाने की चेतावनी देते हुए 689 नोटिस भी जारी किए गए हैं.
तरनतारन में सबसे ज्यादा मामले
जिला स्तर पर आंकड़ों को देखें तो तरनतारन में पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं. यहां अब तक कुल 558 मामले सामने आए हैं. इसके बाद फिरोजपुर में 316, अमृतसर में 207, बठिंडा में 167 और संगरूर में 163 घटनाएं दर्ज की गई हैं.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य के कई जिलों में धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की समस्या बनी हुई है. प्रशासन की ओर से इन घटनाओं को रोकने के लिए लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है.
पटियाला में पराली जलाने के 110 केस
पटियाला जिले में भी पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं. यहां अब तक कुल 110 मामले दर्ज किए गए हैं. विभागीय टीमों ने जिले में 67 स्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें 24 जगहों पर आग लगने की पुष्टि हुई.
इन मामलों में 15 पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है. जिले में कुल 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 35 हजार रुपये की वसूली की जा चुकी है.
पटियाला में पराली जलाने के मामलों को लेकर पुलिस ने 21 FIR दर्ज की हैं. इसके अलावा 10 मामलों में राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है. प्रशासन की ओर से किसानों को चेतावनी देने के लिए 25 नोटिस भी जारी किए गए हैं.
इस तरह जिले में निरीक्षण, जुर्माना, पुलिस कार्रवाई और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कार्रवाई के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है.
85.10 फीसदी धान की कटाई पूरी
PPCB की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में धान की खेती का कुल रकबा 32.87 लाख हेक्टेयर है. इसमें से 85.10 फीसदी क्षेत्र में धान की कटाई पूरी हो चुकी है. यानी राज्य में ज्यादातर खेतों से धान की फसल काटी जा चुकी है.
इसके बावजूद खेतों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार दर्ज की जा रही हैं. धान की कटाई के बाद बचे फसल अवशेषों का निस्तारण प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
राज्य में पराली जलाने के मामलों को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से खेतों का निरीक्षण करने के साथ पर्यावरणीय जुर्माना, FIR, राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री और चेतावनी नोटिस जैसी कार्रवाई की जा रही है.
4 नवंबर तक के आंकड़े बताते हैं कि इन प्रयासों के बावजूद राज्य में पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है. आने वाले दिनों में धान की कटाई और फसल अवशेषों के प्रबंधन के बीच प्रशासन के सामने इस समस्या को नियंत्रित करने की चुनौती बनी रहेगी.
कमलजीत संधू / मुनीश कौशल