कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने अपने राजनीतिक करियर और परिवार की भूमिका को लेकर खुलकर बात की है. उन्होंने माना कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बेटा होने से उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने का मौका मिला. हालांकि, उन्होंने कहा कि सिर्फ परिवार की वजह से कोई लंबे समय तक राजनीति में नहीं टिक सकता.
प्रियंक खड़गे ने यह बात इंडिया टुडे कर्नाटक राउंडटेबल में कही. उनसे पूछा गया कि क्या वह नेपो किड हैं. उनसे यह भी पूछा गया कि अगर वह मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे नहीं होते तो क्या कर्नाटक के गृह मंत्री बन पाते.
'पिता का नाम मिला तो शुरुआत आसान हुई'
प्रियंक खड़गे ने कहा कि परिवार की वजह से उन्हें राजनीति में एक शुरुआत जरूर मिली. उन्होंने इसे स्प्रिंगबोर्ड बताया. उनका कहना था कि नेता हो या अभिनेता, अगर कोई अच्छा प्रदर्शन नहीं करता तो वह आगे नहीं टिक सकता. जनता ही तय करेगी कि वह अच्छे नेता हैं या नहीं. असली सवाल यह है कि उन्हें जो मौका मिला, उसका उन्होंने क्या किया.
प्रियंक ने कहा कि उनके काम का आकलन होना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि क्या उन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई है. उनका कहना था कि राजनीति में सिर्फ मौका मिलना काफी नहीं है. उस मौके पर प्रदर्शन करना भी जरूरी है.
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'मुझे खड़गे का बेटा होने पर गर्व'
प्रियंक खड़गे ने कहा कि उन्हें अपने पिता मल्लिकार्जुन खड़गे का बेटा होने पर गर्व है. कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व और कर्नाटक का राज्य नेतृत्व उनके काम से संतुष्ट है. इसी वजह से उन्हें जिम्मेदारियां मिल रही हैं.
उन्होंने इस बहस को बीजेपी की ओर भी मोड़ा. प्रियंक ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र का उदाहरण दिया. उन्होंने सवाल किया कि विजयेंद्र को लेकर ऐसे सवाल क्यों नहीं पूछे जाते.
उन्होंने कहा कि विजयेंद्र पहली बार विधायक बनने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने. वहीं चार बार विधायक रह चुके व्यक्ति के आईटी मंत्री बनने पर सवाल उठाए जाते हैं. प्रियंक ने इसी तुलना के जरिए अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब दिया.
इंटरव्यू में प्रियंक खड़गे ने साइबर अपराध और फेक न्यूज को लेकर भी सरकार की तैयारी बताई. उन्होंने गलत और भ्रामक सूचनाओं को लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती बताया.
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में साइबर अपराध को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. अब साइबर अपराध केवल शहरों तक सीमित नहीं है. गांवों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. प्रियंक ने दावा किया कि साइबर अपराध के मामलों को सुलझाने में कर्नाटक का प्रदर्शन देश के बेहतर राज्यों में है.
प्रियंक खड़गे ने बताया कि सरकार ने इनफॉर्मेंशन डिसऑर्डर ट्रैफिक यूनिट का पायलट प्रोजेक्ट किया है. यह व्यवस्था करीब दो महीने में काम करना शुरू कर सकती है. इसका उद्देश्य लोगों की बोलने की आजादी रोकना नहीं है. इसका मकसद संभावित रूप से गलत या नुकसान पहुंचाने वाली जानकारी को पहचानना है.
उन्होंने बताया कि सरकार खुद यह तय नहीं करेगी कि कोई खबर फेक है या नहीं. इसके लिए स्पेशलिस्ट की एक समिति बनाई जाएगी. इसमें मीडिया से जुड़े लोग भी शामिल होंगे. समिति सामग्री की जांच करेगी और गलत जानकारी होने पर उसका खंडन करेगी.
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प्रियंक ने कहा कि सरकार की मुख्य चिंता ऐसी जानकारी को लेकर है, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है या सरकार और उसकी नीतियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है.
अगर किसी सामग्री से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका होगी तो विशेषज्ञ समिति उसकी जांच करेगी. इसके बाद मामला कानूनी टीम के पास जाएगा. कानूनी टीम यह देखेगी कि मामला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS के तहत कार्रवाई योग्य है या नहीं.
प्रियंक ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य अभिव्यक्ति की आजादी को दबाना नहीं, बल्कि गलत सूचना से पैदा होने वाली गंभीर समस्याओं को रोकना है.
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