प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर लगातार 25 साल पूरे होने के मौके पर देश के सामने बड़ा संकल्प दोहराया. उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर को जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तब उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन यह पड़ाव भी आएगा. पीएम ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करना है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनका राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड एक संगठन में करने वाले कार्यकर्ता का था. अगर उन्हें चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा होती तो वह बहुत पहले ही चुनाव लड़ लेते. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी अपने बारे में नहीं सोचा. उनकी सीख रही है कि वह महत्वकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि मिशन के लिए जीने वाले इंसान रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मैं एम्बीशन के लिए नहीं मिशन के लिए जीने वाले इंसान जीया.'
'कर्म सिर्फ जिम्मेदारी नहीं साधना है'
पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें समय-समय पर जो भी जिम्मेदारी मिली, उन्होंने उसे निभाया. उनके जीवन का एक ही लक्ष्य रहा है- देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करना. उन्होंने कहा, 'मेरे लिए कर्म ही सब कुछ है. कर्म ही मेरा धर्म है.' पीएम ने कहा कि वे कर्म को ही अपना कर्तव्य मानते हैं. पीएम मोदी ने कर्म को सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रति उनकी साधना बताया.
उन्होंने कहा कि उन्होंने बिना फल, श्रेय की चिंता किए देश के लिए काम किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें यह नहीं सोचना है कि हम कहां पहुंचे, बल्कि यह सोचना है कि देश कहां पहुंचा है. पीएम मोदी ने अपने गुजरात के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि वह दौर चुनौतियों से भरा था.
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उन्होंने जनता पर विश्वास को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने जनता को साथ लेकर नीतियां बनाई, निर्णय लिया और कहा 'We Will do it.' उन्होंने कहा कि जब जनता साथ हो तो निर्णय भी आते हैं. उन्होंने कहा कि गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें जो अनुभव मिला, उसने उन्हें बहुत कुछ सिखाया.
गौरतलब है कि पीएम मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. इसके बाद 26 मई 2014 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर उन्हें जनसेवा में 25 साल पूरे हो गए हैं.
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