'भारत को भविष्य की टेक्नोलॉजी बनानी और दुनिया को लीड करना होगा', बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है. अब भारत का लक्ष्य सिर्फ नई तकनीक अपनाना नहीं, बल्कि उसे विकसित करना और दुनिया की समस्याओं का समाधान देना है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित किया (Photo: PTI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित किया (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:14 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों को विकसित करने, नए प्रयोग करने और दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है. अब देश का लक्ष्य भारत और दुनिया के लिए नई तकनीक बनाना, उसकी दिशा तय करना और वैश्विक समस्याओं का समाधान देने की क्षमता विकसित करना है.

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पीएम मोदी ने कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय दुनिया के कई देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे थे, लेकिन भारत ने अपनी वैक्सीन विकसित की. देश में बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन किया गया और दूसरे देशों को भी वैक्सीन भेजी गई. उन्होंने इसे 21वीं सदी के भारत के आत्मविश्वास का उदाहरण बताया.

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मंगल और चंद्रमा तक पहुंचा भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले दुनिया में कोई नई तकनीक विकसित होती थी, तो कुछ साल बाद वह भारत तक पहुंचती थी. भारत उसे अपनाता था या उसमें सुधार करके आगे बढ़ता था. लेकिन अब देश की सोच बदल रही है. उन्होंने कहा कि आज भारत पहली ही कोशिश में मंगल ग्रह तक पहुंचता है. भारत चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव तक भी पहुंचा, जहां पहले कोई देश नहीं पहुंच पाया था. पीएम मोदी ने कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ उन्हें विकसित करने और दुनिया का नेतृत्व करने के लिए भी काम करना होगा.

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भारत की वैज्ञानिक विरासत और परमाणु ऊर्जा

पीएम मोदी ने कहा कि शून्य की खोज, संख्या पद्धति के विकास और खगोल विज्ञान में प्रगति से लेकर भारत की संस्कृति हमेशा ज्ञान और खोज पर आधारित रही है. आज देश आधुनिक तकनीक और नए आत्मविश्वास के साथ इस वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ा रहा है.

परमाणु ऊर्जा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए बड़े स्तर पर परमाणु ऊर्जा की जरूरत होगी. परमाणु ईंधन के आयात पर निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती है. इसलिए भारत अपनी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक विकसित कर रहा है. उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले देश के 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की, जो लंबे समय तक ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम उपलब्धि है.

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युवाओं के आत्मविश्वास की तारीफ

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत के युवा जिस तरह कौशल और तकनीक के बारे में सोच रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वह उत्साह बढ़ाने वाला है. उन्होंने कहा कि दशकों पहले भारत में विज्ञान और तकनीक का मतलब दूसरी दुनिया की बराबरी करने की कोशिश करना था, लेकिन अब देश को अपनी तकनीक विकसित करने और भविष्य की दिशा तय करने पर ध्यान देना होगा.

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