प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह 11 बजे अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में देश द्वारा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में हासिल की गई अनेक गौरवशाली स्वदेशी उपलब्धियों की विस्तृत चर्चा की.
PM ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि 2026 का आधा साल बीतने को है. इन 6 महीनों में हमने 'मन की बात' में देशवासियों की अनेक उपलब्धियों पर चर्चा की है. जून में भी देश ने कुछ ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं जो हर देशवासी को गर्व से भर देती हैं. ये सफलताएं देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी हैं. हाल ही में मुझे कोलकाता में नौ-सेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला. वहां INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को भारतीय नौ-सेना के बेड़े में शामिल किया गया. इन शिप्स की डिजाइन और मैन्यूफैक्चरिंग तक, सब कुछ स्वदेशी है.
'क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण'
पीएम ने आगे कहा, 'इसी महीने DRDO ने स्वदेशी 'लॉन्ग रेंस लैंड अटैक क्रूज मिलाइल' का भी सफल परीक्षण किया है. इसको DRDO की प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग साझेदार ने मिलकर बनाया है. यानी, आज समुद्र से लेकर आकाश तक हमारा भारत अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन रहा है.'
पीएम ने कहा कि साथियो जून में एक और आयोजन हुआ, जिसमें पूरी दुनिया भारत के प्रयासों से जुड़ी और ये कार्यक्रम था 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस'. इस बार दुनिया के 2500 से अधिक स्थानों पर योग के अनेक विविध कार्यक्रम हुए. हमारे देश में करोड़ों लोगों ने स्थान-स्थान पर योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. इस महीने अहमदाबाद में आयोजित 'विश्व योगासन चैम्पियनशिप' की भी बड़ी चर्चा हुई. इसमें भारत ने कुल 114 पदक जीते हैं, इनमें 102 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं.
नांदेड़ के पेठकर परिवार की सराहना
पीएम मोदी ने कार्यक्रम में महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित बहादुरपुरा गांव के पेठकर परिवार की एक बेहद संवेदनशील और अनूठी पहल की सराहना की. इस परिवार ने अपने घर में विवाह के अवसर पर फिजूलखर्ची या पारंपरिक उपहारों के बजाय गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की अनूठी व्यवस्था की. परिवार ने हर एक ग्रामीण को एक लाख रुपये का बीमा कवर उपहार में दिया ताकि मुश्किल वक्त में यह किसी भी गरीब परिवार का सहारा बन सके.
इस नेक पहल के पीछे की भावना को बेहद स्पर्श करने वाली बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पेठकर परिवार ने देखा था कि अचानक होने वाली किसी दुर्घटना के बाद पीड़ित परिवारों को बहुत भारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ऐसे मुश्किल वक्त में मिलने वाली एक छोटी-सी सहायता भी किसी परिवार के लिए बहुत बड़ा संबल और सहारा बन जाती है, इसी सोच के साथ परिवार ने खुशियां बांटने का यह अनूठा तरीका चुना.
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार देश के करोड़ों परिवारों तक सुरक्षा का मजबूत कवच पहुंचा रही है. 'प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना' के तहत देशवासियों को केवल 20 रुपये के सालाना प्रीमियम पर दो लाख रुपये तक का 'दुर्घटना बीमा' मिलता है. अब तक इस कल्याणकारी योजना से देश के 58 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जिनमें करीब 28 करोड़ हमारी माताएं, बहनें, बेटियां और महिलाएं शामिल हैं. इस योजना से पीड़ित परिवारों को अब तक 3,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता मिल चुकी है.
इसी प्रकार 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' के महत्व को समझाते हुए पीएम ने कहा कि ये योजना व्यक्ति की दुखद मृत्यु होने पर उसके परिवार को दो लाख रुपये का बीमा कवर देती है. इसका वार्षिक प्रीमियम सिर्फ 436 रुपये है, जो दैनिक रूप से मुश्किल से डेढ़ रुपये बैठता है. इस योजना से अब तक 27 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं और इसके तहत देश के करीब 11 लाख पीड़ित परिवारों को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की बड़ी सहायता राशि मिल चुकी है.
इन बड़े आंकड़ों का प्रभाव समझाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस मदद से कहीं किसी मां को अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिल गई, तो कहीं किसी बेसहारा पत्नी को घर की जिम्मेदारियां संभालने का मजबूत सहारा मिल गया. कई बार बहुत बड़ी सुरक्षा की शुरुआत बहुत छोटी राशि और एक छोटे-से कदम से हो सकती है. उन्होंने सभी देशवासियों से आग्रह किया कि वो अपने परिवारों में इन सरकारी बीमा योजनाओं की जानकारी जरूर साझा करें.
अंधविश्वास का शिकार हो रहा है 'हरगिला'
PM ने लोगों के अंधविश्वास का शिकार हो रहे असम के एक पक्षी का जिक्र करते हुए कहा कि साथियो असम में एक पक्षी पाया जाता है. उस पक्षी का नाम है 'हरगिला'. 'हरगिला' एक दुर्लभ पक्षी है. ये प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था. लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे. कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था, जिन पर हरगिला के घोसलें बने होते थे. सोचिए, एक ऐसा पक्षी जो पर्यावरण की सफाई में मदद करता है, वही 'हरगिला' लोगों के डर का शिकार बन गया था.
इसी दौरान जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने ये सब देखा. उन्होंने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया. उन्होंने महिलाओं से बात की, उन्होंने लोगों को विज्ञान के आधार पर समझाया, धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुडने लगीं. फिर एक बड़ा बदलाव शुरु हुआ. जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा. हजारों ग्रामीण महिलाएं 'हरगिला' को बचाने के लिए आगे आईं -आज उन्हें 'हरगिला आर्मी' के नाम से जाना जाता है.
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