पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने सरकार से राहत की मांग की है. एसोसिएशन ने पेट्रोल पंपों को UPI लेनदेन पर एमडीआर और दूसरे ट्रांजैक्शन चार्ज से पूरी तरह छूट देने की मांग की है. इस संबंध में एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने बुधवार को वित्त मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की.
एसोसिएशन का कहना है कि UPI पेमेंट पर लगने वाला चार्ज सीधे पेट्रोल पंप डीलर्स की कमाई को प्रभावित करता है. पेट्रोलियम डीलर्स को मिलने वाला मार्जिन लेनदेन की रकम के हिसाब से नहीं बढ़ता, बल्कि मुख्य रूप से प्रति लीटर के आधार पर तय होता है.
पत्र में कहा गया है कि डीलर का मार्जिन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मार्गदर्शन में तेल विपणन कंपनियां (OMCs) तय करती हैं. यह आम तौर पर प्रति लीटर तय होता है, न कि लेनदेन की कुल रकम के प्रतिशत के आधार पर. ऐसे में किसी बड़े UPI लेनदेन पर लगने वाला शुल्क डीलर की कमाई पर सीधा असर डालता है.
एसोसिएशन के मुताबिक, अक्टूबर 2017 के बाद से डीलर कमीशन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि बिजली, कर्मचारियों की सैलरी और नियमों के पालन से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. तेल कंपनियों के साथ बातचीत के बावजूद इस मुद्दे का समाधान नहीं हो पाया है.
₹5 का चार्ज भी पड़ेगा भारी
एसोसिएशन ने कहा कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन पर अगर ₹5 का फिक्स्ड चार्ज लगाया जाता है, तो पेट्रोल पंपों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा. पेट्रोल पंपों पर हर दिन बड़ी संख्या में लेनदेन होते हैं. ऐसे में हजारों ट्रांजैक्शन पर लगने वाला छोटा-सा चार्ज भी रोजाना और महीने के हिसाब से बड़ा वित्तीय बोझ बन सकता है.
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि 0.4 फीसदी तक का प्रतिशत आधारित MDR पेट्रोलियम कारोबार की अर्थव्यवस्था के लिहाज से और ज्यादा बोझिल होगा. डीलर्स के मुताबिक, उनके पास इस अतिरिक्त लागत को अपनी कमाई बढ़ाकर संतुलित करने का कोई विकल्प नहीं है.
UPI को हतोत्साहित करने की स्थिति बन सकती है
एसोसिएशन ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर पेट्रोल पंपों पर UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो डीलर्स को ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन को हतोत्साहित या सीमित करने की स्थिति आ सकती है. एसोसिएशन का कहना है कि यह सरकार के डिजिटल पेमेंट, पारदर्शिता और ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने के लक्ष्य के खिलाफ होगा.
एसोसिएशन ने कहा कि ईंधन की बिक्री में भुगतान का तरीका बदलने से लेनदेन की प्रकृति नहीं बदलती. उसने पुराने उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने पहले कार्ड से होने वाले कुछ ईंधन लेनदेन पर शुल्क से राहत दी है. डीलर्स का तर्क है कि यही सिद्धांत UPI भुगतान पर भी लागू होना चाहिए.
सभी UPI लेनदेन पर छूट की मांग
ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने केंद्र से सभी पेट्रोल पंपों पर UPI लेनदेन को MDR और संबंधित ट्रांजैक्शन फीस से पूरी तरह मुक्त करने की मांग की है, चाहे भुगतान की रकम कितनी भी हो.
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि अगर सरकार ₹2,000 की सीमा बरकरार रखती है तो भी पेट्रोल पंपों को इस सीमा से ऊपर होने वाले UPI भुगतान पर प्रतिशत आधारित MDR और फिक्स्ड प्रति-लेनदेन शुल्क, दोनों से छूट दी जानी चाहिए.
एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल पेमेंट से ग्राहकों को सुविधा मिली है, लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ी है और पेट्रोल पंपों का कामकाज भी आसान हुआ है. ऐसे में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले पेट्रोलियम डीलर्स पर इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए.
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